लखनऊ-कानपुर नमो कॉरिडोर; कम समय में तय होगी मंजिल, जानिए रेल कनेक्टिविटी से कितना आएगा बदलाव?
लखनऊ-कानपुर नमो कॉरिडोर; कम समय में तय होगी मंजिल, जानिए रेल कनेक्टिविटी से कितना आएगा बदलाव? पहले चरण में कानपुर से लखनऊ करीब 67 किलोमीटर पर कॉरिडोर का निर्माण By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August 25, 202…

सौजन्य से:- ETV Bharat
लखनऊ-कानपुर नमो कॉरिडोर; कम समय में तय होगी मंजिल, जानिए रेल कनेक्टिविटी से कितना आएगा बदलाव?
पहले चरण में कानपुर से लखनऊ करीब 67 किलोमीटर पर कॉरिडोर का निर्माण
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 8:56 PM IST
लखनऊ: लखनऊ-कानपुर के बीच प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी नमो भारत कॉरिडोर अब विस्तृत अध्ययन और सर्वे के चरण में पहुंच रहा है. हालिया जानकारी के अनुसार लखनऊ, कानपुर और उन्नाव तीनों जिले अध्ययन और सर्वे का खर्च उठाएंगे. इस परियोजना के पूरा होने के बाद लखनऊ-कानपुर आने-जाने वाले यात्रियों को काफी लाभ मिलेगा. अभी सड़क, ट्रेन और बस से दोनों शहरों के बीच यात्रा में काफी समय लगता है. प्रस्तावित रैपिड रेल आने पर इसमें काफी बदलाव आएगा.
सीएम योगी ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि लखनऊ-कानपुर रूट अब "नमो भारत" (रैपिड रेल) का हिस्सा बन चुका है. आगे अयोध्या तक इसका विस्तार किया जाएगा. सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य सीधे तौर पर जनता के कीमती समय की बचत करना है और उन्हें सफर में बेहतर सुविधाएं देना है. सरकार रोड कनेक्टिविटी के साथ ही रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है. सरकार ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे का निर्माण कर इसे जनता के लिए खोला, जिससे लखनऊ और कानपुर के बीच दूरी और समय दोनों ही कम हो गए. इसके बाद अब रैपिड रेल की योजना पूरा कर जनता को और सहूलियत देना सरकार का अहम कदम होगा. कानपुर से उन्नाव होते हुए लखनऊ तक ट्रेन के रूट पर कई प्रस्तावित स्टेशनों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे यात्री अपना सफर कम समय में पूरा कर सकें. अयोध्या को भी रेपिड रेल से जोड़ा जाएगा जिससे कानपुर से अयोध्या तक लोगों को आवागमन में काफी सहूलियत मिलेगी.
ये है रूट और प्रस्तावित स्टेशन
कानपुर-लखनऊ-अयोध्या कॉरिडोर की कुल लंबाई 187 किलोमीटर है, जिसे दो चरणों में डेवलप किया जाएगा. इसमें कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं. पहले चरण में कानपुर से लखनऊ की करीब 67 किलोमीटर पर कॉरिडोर का निर्माण होगा. कानपुर के नयागंज से प्रारंभ होकर लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट तक जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी सिर्फ 40 से 50 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है. इस रूट पर रेलवे स्टेशन के निर्माण की बात की जाए तो नयागंज (कानपुर शुरुआती स्टेशन, उन्नाव, बसीरतगंज/बशीरथपुर, नवाबगंज, बंथरा, अमौसी (लखनऊ एयरपोर्ट) पहले चरण का अंतिम स्टेशन होगा. दूसरे चरण में लखनऊ से अयोध्या कॉरिडोर का विस्तार होगा. इस रूट को लखनऊ एयरपोर्ट से आगे बाराबंकी होते हुए सीधे अयोध्या धाम तक जोड़ा जाएगा. इस रूट पर सुशांत गोल्फ सिटी, जुग्गौर, बरेल, सफदरगंज, भिटरिया और अयोध्या स्टेशन होंगे.
नमो भारत रैपिड रेल से होंगे कई लाभ
कानपुर से लखनऊ की यात्रा सिर्फ 40 मिनट और कानपुर से अयोध्या की 187 किमी की दूरी सिर्फ 90 मिनट में तय हो जाएगी. वर्तमान में इसी रूट पर इतनी दूरी तय करने में साढ़े तीन घंटे से लेकर चार घंटे तक का समय लगता है. आर्थिक विकास को भी रफ्तार दिलाने में नमो भारत रैपिड रेल सहायक होगी. दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) डेवलप कर रही है. यह हाई-स्पीड कनेक्टिविटी रियल एस्टेट, उद्योगों और स्थानीय व्यापार के लिए वरदान साबित हो सकती है. औद्योगिक शहर कानपुर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सीधे भगवान राम की नगरी अयोध्या से जुड़ जाएंगे, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास ट्रेन कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी.
डेली पैसेंजर्स को मिलेगी सहूलियत
नमो रैपिड ट्रेन के संचालन से नौकरीपेशा, उद्यमियों और छात्रों को हर रोज एक शहर से दूसरे शहर तक अप-डाउन करने के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक बेहतर विकल्प मिलेगा. लखनऊ के अमौसी स्टेशन पर इस रैपिड ट्रेन को लखनऊ मेट्रो और अमौसी एयरपोर्ट से सीधे इंटीग्रेट किए जाने का प्लान है, जिससे किसी भी यात्री को फ्लाइट पकड़नी है तो आसानी से स्टेशन के अंदर से ही एयरपोर्ट तक जा सकेंगे. इसके साथ ही मेट्रो स्टेशन से कनेक्ट होने के चलते एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से लखनऊ के विभिन्न मेट्रो स्टेशनों से सीधी कनेक्टिविटी के चलते लखनऊ के किसी भी कोने तक पहुंचाना आसान हो जाएगा. मेट्रो स्टेशन से बाहर आकर उन्हें विभिन्न यातायात साधन भी आसानी से मिल सकेंगे.
निर्माण और क्रियान्वयन की स्थिति
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम की तरफ से डीपीआर और अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जानकारी के मुताबिक लखनऊ, कानपुर और उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरणों ने 6.03 करोड़ रुपए का खर्च आपस में विभाजित किया है. स्थानीय विकास प्राधिकरणों जिनमें लखनऊ विकास प्राधिकरण और कानपुर विकास प्राधिकरण से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह प्रोजेक्ट अब कार्यान्वयन और धरातल पर उतरने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. डीपीआर पूरी होने और केंद्र व राज्य सरकार की अंतिम वित्तीय मुहर लगने के बाद निर्माण कार्य की वास्तविक शुरुआत व डेडलाइन का एलान किया जाएगा.
फर्स्ट फेज में निर्माण
फर्स्ट फेज में कानपुर से लखनऊ के बीच यह कॉरिडोर अमौसी से बनी नामक स्थान तक सड़क मार्ग के समानांतर और बनी से गंगा बैराज/नयागंज तक मौजूदा रेलवे लाइनों के पास से गुजरेगा. इसमें अधिकतर एलाइनमेंट सरकारी भूमि, एक्सप्रेसवे/सड़क के किनारे और रेलवे की खाली जमीनों के उपयोग पर आधारित है, जिससे प्राइवेट प्रॉपर्टी का अधिग्रहण कम से कम करना हो.
दावों की हकीकत
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया हाल ही में यात्रियों के लिए खोले गए लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे से यात्रा समय करीब 40 मिनट होने का दावा किया, लेकिन शुरुआती दौर में सड़क की गुणवत्ता और मरम्मत को लेकर सवाल खड़े हो गए. सड़क में कई जगह पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए और दरारें आ गईं जिसके चलते शुरुआत से ही इस एक्सप्रेस वे को संचालन के लिए बंद कर दिया गया. अब मरम्मत के बाद इसे फिर खोला जाएगा तब जाकर वास्तविक स्थिति सामने आएगी कि एनएचएआई ने 40 मिनट में इस रूट पर दूरी तय करने का जो दावा किया था, उसमें कितना दम है.
ट्रेन से सफर
लखनऊ और कानपुर के बीच प्रतिदिन 30 से 35 ट्रेनें संचालित होती हैं. इनमें मेमू, पैसेंजर, एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं. बड़ी संख्या में रोजना इन दोनों शहरों के बीच आवागमन करने वाले कर्मचारी, छात्र और व्यापारी ट्रेन से यात्रा करते हैं. रेलवे के मुताबिक हर रोज लखनऊ कानपुर के बीच ट्रेन से करीब 40000 यात्रियों का आवागमन होता है. इस रूट पर ट्रेन से सफर में एक घंटे से लेकर पौने दो घंटे तक का समय लगता है. यह विभिन्न ट्रेनों पर निर्भर करता है.
बस से सफर
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के साथ ही प्राइवेट बस ऑपरेटर भी इन दोनों शहरों के बीच बसों का संचालन करते हैं, जिससे बड़ी संख्या में यात्री बसों से भी अपना सफर तय करते हैं. यूपीएसआरटीसी की इस रूट पर ढाई सौ से ज्यादा बसें प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए कानपुर और लखनऊ होते हुए संचालित होती हैं. 100 से ज्यादा प्राइवेट बस ऑपरेटर इन दोनों रूटों पर बसों का संचालन करते हैं. सड़क मार्ग और एक्सप्रेस वे पर बसों से हर रोज करीब 20 हजार यात्री आवागमन करते हैं.
क्या कहते हैं यात्री
बुलंदशहर से बस के जरिए अयोध्या जाने के लिए लखनऊ स्टेशन पहुंचे यात्री राजेश का कहना है कि यहां तक आने में नौ घंटे लग गए हैं. ट्रेन से यात्रा में कम समय लगता है. तेज गति की ट्रेनें चलने से समय की बचत होती है और यात्रियों को इसका फायदा मिलता है. वंदे भारत ट्रेन चली, जिसके स्पीड काफी है तो इससे आना-जाना आसान हुआ. इसी तरह कानपुर लखनऊ के बीच जब तेज गति के ट्रेन चलेगी तो इसका सभी को लाभ मिलेगा.
बस से सफर करके लखनऊ स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने पहुंचे यात्री जितेंद्र का कहना हैं कि ट्रेन से जब भी सफर करते हैं तो समय की काफी बचत होती है. ट्रेन बहुत जल्दी पहुंचती है जबकि सड़क मार्ग से काफी समय लगता है. तेज गति वाले ट्रेनों में वंदे भारत बहुत अच्छी ट्रेन हैं. अब और ज्यादा गति से चलने वाली ट्रेनें आएंगी तो यात्रियों की यात्रा बहुत कम समय में पूरी हो जाएगी.
क्या कहते हैं आईआरटीएस अधिकारी
रेलवे के आईआरटीएस अधिकारी अजीत कुमार सिन्हा का कहना है कि इस तरह के जो भी यातायात के साधन बढ़ाए जाते हैं एक तो वह बढ़ती हुई इकोनामी का एक एक्सप्रेशन और मैनिफेस्टेशन होता है. यूपी में विकास की गति काफी बढ़ती जा रही है. इस बात का एक्सप्रेशन है कि अल्टरनेटिव मोड ऑफ ट्रांसपोर्ट यहां के लोगों के लिए उपलब्ध होगा. खासतौर से लखनऊ कानपुर के बीच में जो सोशल इकोनामी के इंटरैक्शन जॉब के उद्देश्य से और अन्य मामलों के कारण इतना ज्यादा है कि यहां पर चाहे इंडियन रेलवे के नेटवर्क के ट्रेनों के परिचालन में लोगों की आवाजाही को देखें. बसों के माध्यम से, रोड के माध्यम से लोगों की आवाजाही को देखें तो इसी का नतीजा है कि एक्सप्रेस वे का निर्माण किया गया. आने वाले समय में रीजनल रैपिड ट्रांसिट सिस्टम लाया जाता है तो न सिर्फ इकोनॉमी के डेवलपमेंट को बूस्ट मिलेगा बल्कि जो सोशल इंटरेक्शन है उसको भी बहुत मजबूती मिलेगी. जब चॉइस बढ़ती हैं तो कॉम्पिटेटिव फेयर के लोगों के पास ऑप्शंस होंगे कि वह आरआरटीएस के माध्यम से भी जा सकते हैं, रोड के माध्यम से भी जा सकते हैं. इंडियन रेलवे की दूसरी ट्रेनों के माध्यम से भी जा सकते हैं. ऐसी स्थिति में कॉम्पिटेटिव फेयर मिलेगा. उम्मीद है कि वह फेयर अफॉर्डेबल होगा. सबसे बड़ी बात ये है कि जैसे-जैसे डेवलपमेंट होता जा रहा है, स्टेट कैपिटल रीजन का विस्तार होता जा रहा है. इसके उन्नाव तक पहुंचाने की बात है. आने वाले समय में आरआरटीएस एक और मजबूती भरा कदम निभाएगी.
यात्रियों को होगा फायदा
रेलयात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल का कहना है कि लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा है. ऐसे में उनके सामने रेल के सस्ते किराए का विकल्प हमेशा होना ही चाहिए. ट्रेनों में मेमू की यात्रा यात्रियों को रास आती है. हालांकि कोरोना के बाद सस्ते किराए वाली कई ट्रेनें बंद कर दी गईं, जिससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है. रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी नमो भारत कॉरिडोर के निर्माण के बाद जब रैपिड ट्रेन चलनी शुरू होगी तो निश्चित तौर पर उन यात्रियों को काफी फायदा होगा, जिन्हें समय की बचत करते हुए कुछ ज्यादा किराया देकर भी अपने गंतव्य तक पहुंचना है. यात्रियों के पास विकल्प बढ़ जाएंगे जिसका वे लाभ उठा सकेंगे. रैपिड रेल का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में ज्यादा ही होगा, लेकिन किराया तय करते समय इसका ख्याल रखा जाए कि कम दूरी के यात्रियों पर ज्यादा भार न डाला जाए.
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