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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सतह फिर हुई खराब, जांच के आदेश, तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सतह फिर हुई खराब, जांच के आदेश, तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज पहले मरम्मत किए गए 20 मीटर लंबे हिस्से के पास फिर से नुकसान हुआ है. पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की फिर मरम्मत होगी. By ETV Bharat…

ETV Bharat के अनुसार3 अगस्त 2026 को 05:18 pm बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सतह फिर हुई खराब, जांच के आदेश, तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज

सौजन्य से:- ETV Bharat

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सतह फिर हुई खराब, जांच के आदेश, तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज

पहले मरम्मत किए गए 20 मीटर लंबे हिस्से के पास फिर से नुकसान हुआ है. पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की फिर मरम्मत होगी.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 3, 2026 at 10:06 PM IST

लखनऊ : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के एक ही माह के अंदर सड़क की सतह खराब होने की एक और घटना सामने आने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए हैं. जांच पूरी होने तक तीन अभियंताओं को कार्य से हटा दिया गया है.

एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्नाव जिले के कुरारी के पास पुल की संरचना में नहीं, बल्कि हालिया तकनीकी खामी पुल तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग पर सामने आई है. उन्होंने कहा कि पहले मरम्मत किए गए 20 मीटर लंबे हिस्से के पास फिर से कुछ नुकसान दिखाई दिया है जिसके बाद प्राधिकरण ने पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत करने का फैसला लिया है.

बता दें कि लगभग 4200 करोड़ रुपए की लागत से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ है. बीती 13 जुलाई को इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में किया था. 14 जुलाई को एक्सप्रेस-वे सार्वजनिक वाहनों के लिए खोल दिया गया था.

परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि कुरारी टोल प्लाजा के निकट मार्ग परिवर्तन कर दिया गया है. मरम्मत का कार्य दो दिन में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद ट्रैफिक सामान्य रूप से चलने लगेगा. एक्सप्रेस-वे पर सड़क में जो भी खामियां सामने आई हैं उसकी जांच के लिए एक समिति गठित की गई है. रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी.

प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर प्राधिकरण की तरफ से तीन इंजीनियरों को कार्य से हटा दिया गया है. निर्माण के दौरान मजबूती और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइड कंस्ट्रक्शन जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है. एनएचएआई के अधिकारियों ने लखनऊ से कानपुर की ओर जाने वाली सड़क का सर्वे किया.

इस दौरान 45.75 किलोमीटर पर तारकोल कमजोर नजर आया. 70 मीटर तारकोल को उखाड़कर नए सिरे से तारकोल बिछाया गया है. तारकोल की परत की मरम्मत के साथ ही वहां ड्रेनेज सिस्टम को भी दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे बारिश का पानी जमा होकर परत को खराब न करे. तारकोल की परत उखड़ने के बाद प्राधिकरण की तरफ से तर्क दिया गया कि सीवेज के कारण बारिश का पानी जमा हो गया था जिससे तारकोल की परत उखड़ गई थी. सड़क की निचली सतह को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है.

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