ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी से धंस रहा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, सड़क पर कई मीटर तक पड़ गई दरारें - lucknow kanpur expressway sinking drainage flaws cause cracks
ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी से धंस रहा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, सड़क पर कई मीटर तक पड़ गई दरारें लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी के कारण सड़क धंसने और दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे 4200 करोड़ की परियोजना क…

सौजन्य से:- Jagran
ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी से धंस रहा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, सड़क पर कई मीटर तक पड़ गई दरारें
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी के कारण सड़क धंसने और दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे 4200 करोड़ की परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में कार्यदायी संस्था पीएनसी और एनएचएआई सवालों के घेरे में हैं, और कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है।
HighLights
- एक्सप्रेसवे पर 18 किलोमीटर के एलिवेटेड हिस्से में सड़क धंसी।
- ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी को मुख्य कारण बताया गया।
- पीएनसी और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
जागरण सवांददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ग्रीन फील्ड के बाद अब 18 किलोमीटर के एलिवेटेड हिस्से पर भी सड़क धंसनी शुरू हो गई है। कई-कई मीटर तक दरारें पड़ गई हैं। साइड वाल पर भी दरारें हैं। पिछले माह 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण हुआ था और 13 दिन बाद से ही सड़क खराब होने की शिकायतें आने लगीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क बनाते समय ड्रेनेज सिस्टम की अनेदखी की गई, जो अब सामने आ रही है। पानी के निकास के लिए सड़क के बीच के हिस्से को किनारों की तुलना में ऊंचा करके बनाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। 4200 करोड़ की लागत से बनाए गए इस एक्सप्रेसवे की हालत देख अब कार्यदायी संस्था पीएनसी और एनएचएआई दोनों ही सवालों के घेरे में हैं।
एक्सप्रेसवे की जांच कर रही आईआईटी खड़गपुर की टीम को भी ड्रेनेज सिस्टम में खामियां मिली थीं। ऐसे में क्या पूरे एक्सप्रेसवे की ढाल सही की जाएगी, इस सवाल का जवाब देने से एनएचएआई बच रहा है। सेतु निगम से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक संदीप गुप्ता कहते हैं कि स्ट्रक्चर को हमेशा ढाई प्रतिशत और डामर पड़ने पर पांच प्रतिशत की ढाल देनी चाहिए। यह ढाल स्ट्रक्चर और डामर वाली सड़क के बीचो-बीच से दाएं व बाएं होनी चाहिए।
लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता एन राम कहते हैं कि एलीवेटेड हिस्से पर जो सड़क धंसी है, वह स्ट्रक्चर पर नहीं होगी, उसके नीचे जरूर मिट्टी होगी, वहीं मिट्टी दबी है, क्योंकि पानी वहां रुका होगा। मिट्टी नीचे बैठने से साइड वाल दरक गई और फिर सड़क के आसपास वाले हिस्से में भी दरार आ गई है।
चीन में होता है मुकदमा
भारत में नहीं चीन में एक्सप्रेसवे या अन्य परियोजनाओं में गुणवत्ता की अनदेखी और सड़क धंसने जैसी खामियां मिलने पर सरकार कड़े कदम उठाती है। दोषी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाकर प्रतिबंधित कर दिया जाता है। जिम्मेदारों पर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होता है। वहीं भारत में नियम तो चीन से मिलते जुलते हैं, लेकिन अमल नहीं होता है।
यहां अब तक किसी पर मुकदमा नहीं हुआ है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के मामले में निवर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा और तत्कालीन परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट दी जा चुकी है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाने के साथ ही दो साल के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई, नेशनल हाईवेज एंड इन्फ्रास्टक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। कार्यदायी संस्था को नान परफार्मर करने की संस्तुति मुख्यालय में की गई है।
ये हैं जवाबदेह
एनएचएआई लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंध गौतम विशाल, तत्कालीन परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया, निवर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार हैं।
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