Lucknow Kanpur Expressway शुरू से लेकर आखिरी तक खस्ताहाल, जगह-जगह भरा भारी, सफर बना खतरनाक - lucknow kanpur expressway in poor condition throughout potholes and fillings make travel hazardous
Lucknow Kanpur Expressway शुरू से लेकर आखिरी तक खस्ताहाल, जगह-जगह भरा भारी, सफर बना खतरनाक लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक खस्ताहाल है, जहां सड़क धंसने, गड्ढे और जलभराव से यात्रा खतरनाक हो गई है। कमजोर मानसून के ब…

सौजन्य से:- Jagran
Lucknow Kanpur Expressway शुरू से लेकर आखिरी तक खस्ताहाल, जगह-जगह भरा भारी, सफर बना खतरनाक
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक खस्ताहाल है, जहां सड़क धंसने, गड्ढे और जलभराव से यात्रा खतरनाक हो गई है। कमजोर मानसून के बावजूद, थोड़ी सी बारिश ...और पढ़ें
HighLights
- एक्सप्रेसवे खस्ताहाल, जगह-जगह सड़क धंसी, गड्ढे बने
- थोड़ी बारिश में भी भारी जलभराव, सफर खतरनाक
- विशेषज्ञों ने बताई मिट्टी संघनन और मरम्मत की खामियां
जागरण संवाददाता, उन्नाव। निर्माण व गुणवत्ता में खामियों के कारण दोयम दर्जा प्राप्त कर चुका लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू से लेकर आखिरी तक खस्ताहाल होता जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर मार्ग दबने, गड्ढे होने का अंदाजा दूर से ही लगने लगता है। बरसात में तो यह स्थिति और स्पष्ट होती है। जब सड़क दबने के बाद बनी नालियां जलभराव से डूबी दिखने लगती हैं। बरसात में ही सड़क दबने के अलावा अब भी जहां कुछ समतल मार्ग माना जा रहा है, वहां भी पानी का जमाव कई घंटे तक बना रहता है। इस सफर करना भी खतरनाक हो सकता है।
बरसात का पानी नीचे चला जाने, मिट्टी के सही प्रकार से न दबने आदि के कारण एक्सप्रेसवे पर समस्या आने की बात विशेषज्ञ कह चुके हैं। 14 जुलाई को मार्ग पर जब संचालन शुरू हुआ तो बरसात की शुरुआत हुई थी। मौसम विभाग जहां शुरुआत में ही इस बार अच्छा मानसून न होने का दावा सैटेलाइट व अन्य उपकरणों से पेश की जा रही तस्वीर के आधार कर चुका है, जो बहुत हद तक सही भी रहा है। जनपद में इस बार मानसून सामान्य से भी कमजोर रहा है। सदर, पुरवा व नवाबगंज तहसील के 32 गांव से निकले एक्सप्रेसवे पर शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां ऊपर बने एक्सप्रेसवे मार्ग के धंसने, दबने, स्लिपेज होने, जर्क आने की समस्या न हो। कमजोर बारिश के कारण जहां संबंधित गांव के खेत अब प्यासे हैं।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसव पर उन्नाव से लखनऊ जाने वाले लेन पर सड़क दबने के बाद बनी नाली में भरा वर्षा का पानी। जागरण
जगह-जगह एक्सप्रेसवे जलमग्न
वहीं एक्सप्रेसवे जरा सी बरसात में इस तरह भर रहा है जैसे कोई तालाब हो। रविवार को दोपहर 3:20 से 3:30 तक हुई 10 मिनट की बरसात के बाद एक्सप्रेसवे जगह-जगह जलमग्न दिखाई दिया। मार्ग पर 60 से 90 किमी गति तक निकल रहे वाहनों के पहिए पानी में पड़ते ही 15 मीटर दूर तक छींटे उड़ते नजर आए। वहीं बरसात का पानी सड़क दबने के बाद इन्हीं नालियों में भर जाने के बाद वाहन सवार धोखे में आकर संबंधित स्थान पर लहराते नजर आए।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लखनऊ से उन्नाव आने वाले लेन पर जगह-जगह भरे वर्षा के पानी के बीच निकलते वाहन। जागरण
मार्ग पर हुए गहरे गड्ढे से सड़क के अंदर जा रहा पानी
उन्नाव लखनऊ लेन पर किलोमीटर 49.6 रावल गांव के पास एक्सप्रेसवे पर लगे डिजिटल बोर्ड के खंभे के नीचे डिवाइडर किनारे चार फीट गहरा, छह फीट लंबा व तीन फीट चौड़ा गड्ढा हुआ है। जहां रविवार को दोपहर 3:30 बजे हुई बरसात के दौरान बड़ी मात्रा में पानी इसी गड्ढे में समाता रहा। जो भीतर ही भीतर सड़क के अंदर प्रवेश करता रहा। इसी स्थान से 300 मीटर आगे किलोमीटर 48 पर निर्माण एजेंसी पीएनसी की मशीनरी और कर्मचारी पूर्व में आई सड़क समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत करते रहे। जबकि, इस खामी पर अभी तक किसी की नजर नहीं पड़ी है।
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इस तरह कमजोर रहा मानसून
मौसम विज्ञानियों के अनुसार उन्नाव में अब तक मानसून कमजोर रहा है। बरसात का आखिरी महीना चल रहा है इस दौरान आंकड़ों में बात करें तो उन्नाव में अब तक 352 एमएम बरसात यदि होती तो सामान्य मानी जाती। जबकि, रविवार नौ अगस्त तक महज 202 एमएम बरसात ही जिले में हुई है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी संख्या 48.7 पर खराबी आने के बाद नए सिरे से की जाती मरम्मत। जागरण
इसलिए नहीं रुक रहा पैचवर्क
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त इंजीनियर सुबोध कुमार ने बताया कि पैचिंग में जो सामग्री डाल रहे हैं। उसके पहले पूरी सफाई से पुराना मैटीरियल हटाया जाना चाहिए। यह लोग जो पुराना हटाने के बाद यह लोग जो पेज मिक्स का मैटीरियल डाल रहे हैं। वहीं लंबी रीच के लिए सही नहीं है। यह छोटे पैच पर काम कर सकता है। वैसे भी पूरे ग्रीन फील्ड क्षेत्र में मिट्टी कंपेक्शन सहीं नहीं हुआ है। नियम तो यह है कि जहां भी समस्या आए वहां की मिट्टी कंपेक्शन किए जाने के बाद उसका नमूना लेकर लैब में जांच कराई जाए। जिससे यह तय होगा कि मिट्टी मानक स्तर तक कंपेक्शन हो चुकी है अथवा नहीं। यह तय होने के बाद ही उस पर डामर की लेयर डालें। मिट्टी में जब तक नमी रहेगी तब तक पैच टिकेगा नहीं। प्लास्टिसिटी बनी रहेगी।
रविवार को यहां मिली नई खामियां (उन्नाव से लखनऊ लेन)
- किलोमीटर 63 गांव बेहटा नथई सिंह निकट सड़क में आया जर्क, वाहनों को दाएं और दबने पर मजबूर कर रहा है।
- किलोमीटर 63.9 बेहटा नथई सिंह गांव पर बीच में मार्ग दब गया, नाली बन गई।
- किलोमीटर 60.2 गांव अड़ेरुवा के पास मार्ग की दो लेन दब गई। जिससे बीच सड़क में चौड़ी और बड़ी नालियां बन गई हैं।
- किमी 63.9 पर मार्ग की तीनों लेन डामर दबने से एक फीट गहरी हो गई है। इसके बाद 30 मीटर के इस स्थान पर सड़क फटने लगी है। वाहनों को जर्क, लहराने और उछलने की समस्या आ रही है।
- किमी 57.7 गांव बड़ौरा के पास पुलिया दबी है, जहां वाहनों को उछाल मिल रही है।
- किमी 55.5 पर पुलिया दबी, वाहनों में उछाल।
- किलोमीटर 49.6 से 49.5 भवानी खेड़ा गांव से रावल बीच रोड के डिवाइडर किनारे पर सड़क छह फीट लंबाई चार फीट चौड़ाई में धंस गया है। जिससे यहां पर बरसात का पानी बहकर सड़क के अंदर जा रहा है।
- भवानी खेड़ा गांव के पास किलोमीटर 49.5 पर मार्ग की तीसरी लेने दबाकर गड्ढे में बदल गई है, हालांकि डामर नहीं फटा है। समस्या लगभग 10 मीटर तक है।
- गांव रावल के पास किलोमीटर 48.7 से 48.6 तक सड़क धंसने की समस्या आने के बाद मरम्मत कार्य चल रहा है।
- अमरसस और भवानी खेड़ा गांव के बीच किलोमीटर 45.3- 45.2 के बीच सड़क धंस गई है, बीच का हिस्सा उभर गया है। जिससे वाहनों को जर्क के साथ भारी उछाल मिल रहा है।
- किलोमीटर 36.4 से 36.3 तक 2 मी सड़क दबी, गड्ढा सा बना, गांव बाबा खेड़ा।
- किलोमीटर 29.5 से 29.4 के बीच सड़क दबी नालीनुमा आकर बना।
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