Lucknow-Kanpur Expressway: 20 दिन में छह जगह धंसी सड़क, रॉन्ग साइड दौड़ रहीं गाड़ियां
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सौजन्य से:- Hindustan
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By Pawan Kumar Sharmaसंवाददाता, उन्नाव
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश ने निर्माण गुणवत्ता की पोल खोल दी है। गंभीर बात यह है कि बारिश में एक तरफ की तीनों लेन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद गाड़ियों को दूसरी कैरिजवे पर रॉन्ग साइड से चलाया जा रहा है।
Lucknow-Kanpur Expressway: जिस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को जाम मुक्त और सुरक्षित सफर का सपना दिखाकर शुरू किया गया, वही अब यात्रियों के लिए खतरे का रास्ता बन गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश ने निर्माण गुणवत्ता की पोल खोल दी है। सबसे गंभीर बात यह है कि बारिश में एक तरफ की तीनों लेन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद गाड़ियों को दूसरी कैरिजवे पर रॉन्ग साइड से चलाया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले मार्ग पर यह व्यवस्था किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। आलम यह है कि महंगा टोल वसूलने के बावजूद एनएचएआई यात्रियों को सुरक्षित सफर देने में नाकाम साबित हो रहा है।
बीते 20 दिन में एक्सप्रेसवे पांच बार अलग-अलग स्थानों पर धंस चुका है। बार-बार सड़क उखड़ने, बैरिकेडिंग, डायवर्जन और रॉन्ग साइड यातायात से वाहन चालकों का भरोसा टूटने लगा है। नतीजा यह है कि करीब 30 प्रतिशत वाहन फिर से पुराने नेशनल हाईवे का रुख करने लगे हैं। रविवार को बेहटा गांव पुल के पहले करीब 200 मीटर तक तीनों लेन धंस गईं। इसके बाद पूरी कैरिजवे बंद कर वाहनों को दूसरी तरफ से निकाला गया। मंगलवार को भी यहां मरम्मत जारी रही। डामर हटाकर दोबारा लेयरिंग का काम चलता रहा और करीब चार किलोमीटर तक यातायात डायवर्ट रहा। लगातार बारिश के कारण मरम्मत कार्य भी प्रभावित होता रहा।
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बिछिया के पास एक्सप्रेसवे किनारे मवेशियों को रोकने के लिए लगाई गई सुरक्षा जाली भी बारिश में करीब 40 मीटर तक धराशायी हो गई। इसके चलते मवेशियों और ग्रामीणों की आवाजाही सीधे एक्सप्रेस-वे तक पहुंच गई है। खेत पर काम कर रहे किसान सजीवन ने बताया कि करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में कई जगह मिट्टी धंसने से सुरक्षा जाली टूट चुकी है। इससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है।
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कोरारी इंटरचेंज से लखनऊ की ओर बढ़ते ही करीब 100 मीटर आगे दो लेन पूरी तरह धंसी हुई है। लगभग 40 मीटर सड़क नालीनुमा हो चुकी थी, जिसमें बारिश का पानी भरा था। किलोमीटर 64 प्वाइंट पर सड़क में करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा मिला। हैरत की बात यह रही कि यहां सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग तक नहीं लगाई गई थी। कुछ दूरी आगे पूरी कैरिजवे बंद कर वाहनों को दूसरी लेन पर डायवर्ट किया गया था। मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि बारिश के कारण मरम्मत में अभी दो दिन और लग सकते हैं।
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देश में पहली बार एआईएमसी तकनीक से बने और गंगा एक्सप्रेसवे के बाद प्रदेश के दूसरे सबसे महंगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (एनई-6) का तकनीकी ऑडिट होगा। लोकार्पण के महज 15 दिनों के भीतर पहली ही बारिश में छह अलग-अलग स्थानों पर सड़क उखड़ने और धंसने के बाद यह फैसला लिया गया है। ऑडिट करने वाली टीम में आईआईटी कानपुर और एनएचएआई के दिल्ली स्थित मुख्यालय से विशेषज्ञ शामिल होंगे।
संयुक्त टीम 7 और 8 अगस्त को 63 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे का भौतिक सत्यापन करते हुए गहनता से पड़ताल करेगी। लोकार्पण के 15वें ही दिन कानपुर से लखनऊ आने पर किमी 64 पर सड़क उखड़ने व धंसने पर कार्यदायी संस्था ने मरम्मत करवाते हुए कहा था कि बारिश के कारण यह दिक्कत आई। उसके बाद एक-एक करके एक्सप्रेसवे पर कुल छह स्थानों पर सड़क उखड़ी और धंसी। घटना को लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की हो रही किरकिरी को देखते हुए 30 और 31 जुलाई को एनएचएआई दिल्ली मुख्यालय से आए दो वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों ने एक्सप्रेसवे की जांच की। इस टीम की रिपोर्ट के बाद ही एनएचएआई ने तकनीकी ऑडिट का फैसला लिया है।
तकनीकी टीम में आईआईटी के तीन और एनएचआई मुख्यालय के तीन विशेषज्ञों के शामिल रहने की संभावना है। टीम सात और आठ अगस्त को जांच करेगी। टीम इस बात का गहनता से विश्लेषण करेगी कि निर्माण कार्य के दौरान वह कौन सी कमियां रहीं, जिससे एक-एक कर के सड़क छह स्थानों पर उखड़ी और धंसी है। बताते हैं पूर्व में दिल्ली से आई एनएचएआई की टीम ने ड्रेनेज सिस्टम सही न होने की ओर इशारा किया था। जिसके कारण बारिश का पानी जमा हुआ और सड़क की दुर्दशा हो गई। कार्यदायी संस्था पीएनसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए। ऐसे में माना जा रहा है टीम कार्यदायी संस्था पर जुर्माने की सिफारिश भी कर सकती है।
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पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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