होमक्राइम'सरकार नींद में नहीं रह सकती', लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर हाई कोर्ट की टिप्पणी - lucknow erickshaw control high court demands policy
क्राइम

'सरकार नींद में नहीं रह सकती', लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर हाई कोर्ट की टिप्पणी - lucknow erickshaw control high court demands policy

'सरकार नींद में नहीं रह सकती', लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर हाई कोर्ट की टिप्पणी लखनऊ हाई कोर्ट ने शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की है, जिससे यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है। HighLight…

Jagran के अनुसार26 अगस्त 2026 को 04:55 am बजे
'सरकार नींद में नहीं रह सकती', लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
 - lucknow erickshaw control high court demands policy

सौजन्य से:- Jagran

'सरकार नींद में नहीं रह सकती', लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

लखनऊ हाई कोर्ट ने शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की है, जिससे यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

HighLights

- हाई कोर्ट ने लखनऊ में ई-रिक्शा की संख्या पर चिंता जताई।

- सरकार को ई-रिक्शा नियंत्रण के लिए प्रभावी नीति बनाने का निर्देश।

- यातायात पुलिस के लिए अलग कैडर बनाने पर भी विचार किया।

विधि संवाददाता, लखनऊ। राजधानी लखनऊ में तेजी से बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शहर में करीब 80 हजार ई-रिक्शे चल रहे हैं और इससे यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

राज्य सरकार इस समस्या को लेकर नींद में नहीं रह सकती। उसे ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और संचालन को नियंत्रित करने के लिए जल्द प्रभावी नीति बनानी होगी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने लखनऊ में यातायात प्रबंधन से संबंधित सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

कोर्ट को बताया गया कि ई-रिक्शों के लिए पर्याप्त और निर्धारित पार्किंग स्थल नहीं हैं। इसके कारण चौराहों और प्रमुख मार्गों के आसपास बड़ी संख्या में ई-रिक्शा के खड़े होने से यातायात बाधित होता है। प्रत्येक सड़क की वाहनों को वहन करने की एक निश्चित क्षमता होती है।

सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से यह क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार को यह बताना होगा कि ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती बिक्री और उनके संचालन को किस तरह नियंत्रित किया जाएगा। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को अपर मुख्य सचिव, परिवहन से सरकार की प्रस्तावित नीति के संबंध में स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान अलग यातायात पुलिस कैडर गठित करने के मुद्दे पर भी कोर्ट ने विचार किया। पीठ ने कहा कि यातायात पुलिस का काम सामान्य पुलिसकर्मियों के दायित्वों से अलग है। बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए पृथक कैडर बनाने पर सरकार को विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस पहले से ही पर्याप्त संख्या में कर्मियों की कमी से जूझ रही है। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को यातायात व्यवस्था में लगाने से कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पर भी असर पड़ सकता है।

कोर्ट ने पालीटेक्निक से कमता क्रासिंग तक हाई कोर्ट परिसर के आसपास यातायात सुधार के लिए चिह्नित 153 बिंदुओं पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की। नगर निगम की रिपोर्ट और कोर्ट द्वारा गठित समिति के प्रस्तावों पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें