"मोदी बनाम योगी" के फर्जी नैरेटिव में उलझा वामपंथी पोर्टल: आंकड़ों की आड़ में छिपाई योजना प्रचार की सच्चाई!
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। वामपंथी डिजिटल मीडिया पोर्टल Newslaundry ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के विज्ञापन और प्रचार-प्रसार व्यय को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश स…

सौजन्य से:- Panchjanya
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। वामपंथी डिजिटल मीडिया पोर्टल Newslaundry ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के विज्ञापन और प्रचार-प्रसार व्यय को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले आठ वर्षों में औसतन ₹2.32 करोड़ प्रतिदिन खर्च किए, जो केंद्र सरकार के औसतन प्रतिदिन के विज्ञापन व्यय से अधिक है.
इसी आधे-अधूरे आंकड़े के आधार पर पोर्टल ने एक मनगढ़ंत नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की कि योगी सरकार का विज्ञापन बजट केंद्र की मोदी सरकार से भी बड़ा है और यह मुख्य रूप से मुख्यमंत्री की ‘छवि निर्माण’ (Image Building) पर केंद्रित है.
हालांकि, यदि Newslaundry द्वारा ही पेश किए गए तथ्यों और उत्तर प्रदेश की धरातलीय सच्चाई का निष्पक्ष अध्ययन किया जाए, तो साफ हो जाता है कि यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का चुनिंदा इस्तेमाल करके “Modi PR vs Yogi PR” का भ्रामक नैरेटिव खड़ा करने का एक और वामपंथी एजेंडा मात्र है.
‘छवि निर्माण’ नहीं, डबल इंजन सरकार की योजनाओं का जन-प्रचार
Newslaundry की रिपोर्ट का सबसे बड़ा झोल यह है कि उसने पूरे प्रचार व्यय को केवल मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत ब्रांडिंग से जोड़ दिया. जबकि हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला (लगभग 25 करोड़) राज्य है, जहाँ सूचना और योजनाओं की पहुँच अंतिम व्यक्ति तक बनाना सरकार की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी है.
पोर्टल ने खुद अपनी रिपोर्ट में जिन विज्ञापनों का उल्लेख किया है, उनमें से अधिकांश विज्ञापन निम्नलिखित राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित थे :
- मिशन शक्ति (Mission Shakti): महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए चलाया गया व्यापक जन-जागरूकता अभियान.
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना & स्वावलंबन उद्यम: केंद्र की महत्वाकांक्षी रसोई गैस योजना और रोजगार सृजन अभियानों का राज्य स्तर पर क्रियान्वयन.
- वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP): उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के स्थानीय हस्तशिल्प, कारीगरों और एमएसएमई (MSME) को वैश्विक पहचान दिलाने का ऐतिहासिक अभियान.
- केंद्रीय योजनाओं का संयुक्त प्रचार: प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, लखपति दीदी और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी केंद्र-राज्य की संयुक्त योजनाओं का सूचना प्रसार.
“उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की ‘डबल इंजन सरकार’ कार्यरत है। केंद्र की योजनाएं यूपी में लागू होती हैं और राज्य का सूचना विभाग केंद्रीय व राज्य की कल्याणकारी योजनाओं को 25 करोड़ नागरिकों तक पहुँचाने के लिए संयुक्त प्रचार अभियान चलाता है। इसे केवल किसी एक नेता का ‘PR’ बताना पत्रकारिता नहीं, बल्कि जानबूझकर फैलाया गया भ्रम है।” – राजनीतिक विश्लेषक
न्यूजलांड्री का ‘तुलनात्मक गणित’ कितना तार्किक? जानिए बजट का अंतर
न्यूजलांड्री ने केंद्र सरकार के औसत दैनिक खर्च (लगभग ₹1.5 करोड़) की तुलना उत्तर प्रदेश के दैनिक औसत खर्च (₹2.32 करोड़) से करके यह साबित करने का प्रयास किया कि राज्य सरकार का बजट बड़ा है. लेकिन वामपंथी पोर्टल ने दोनों के बजटीय आकार और प्राथमिकताओं के अंतर पर चुप्पी साध ली.
नेताओं के भाषणों में भी केंद्र की योजनाओं पर बल, ‘मोदी vs योगी’ का नैरेटिव ध्वस्त
वामपंथी मीडिया अक्सर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच मनगढ़ंत दरार और प्रतिस्पर्धा का काल्पनिक ड्रामा रचने का प्रयास करता रहता है. परंतु जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने हर सार्वजनिक मंच, जनसभा और सरकारी कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन का ही प्रमुखता से उल्लेख करते हैं. राज्य सरकार के अधिकांश विज्ञापनों और होर्डिंग्स में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें संयुक्त रूप से दिखाई देती हैं. ऐसे में यह स्पष्ट है कि राज्य का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग केवल राज्य सरकार का नहीं, बल्कि पूरे डबल इंजन मॉडल का संदेश जन-जन तक पहुँचा रहा है.
आठ वर्षों में पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रिया:
- नेतृत्व में निरंतर परिवर्तन: आठ वर्षों के दौरान सूचना विभाग का प्रशासनिक नेतृत्व कई शीर्ष आईएएस अधिकारियों द्वारा संभाला गया, जिनमें अवनीश अवस्थी, नवनीत सहगल, संजय प्रसाद और शिशिर सिंह शामिल हैं.
- नियमों के तहत आवंटन: पूरा बजटीय खर्च राज्य विधानसभा द्वारा स्वीकृत बजट प्रावधानों, CAG ऑडिट नियमों और पारदर्शी निविदा प्रक्रियाओं के तहत ही संपन्न किया जाता है.
- स्थानीय रोजगार व मीडिया का समर्थन: विज्ञापनों का एक बड़ा हिस्सा राज्य व राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों, क्षेत्रीय पत्रकारों, टीवी चैनलों और स्थानीय डिजिटल मीडिया को आर्थिक मजबूती भी प्रदान करता है.
स्पष्ट है कि वामपंथी पोर्टल Newslaundry ने बजटीय आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर और सरकारी योजनाओं के प्रचार की आवश्यकता को नजरअंदाज करके केवल एक दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास किया, जिसकी पोल खुद उनके द्वारा दिए गए योजनागत आंकड़ों से ही खुल जाती है.
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