दिल्ली हादसे के बाद लखनऊ में अलर्ट: LDA 25 साल पुरानी जर्जर इमारतों का कराएगा सेफ्टी ऑडिट
दिल्ली में हुए हादसे के बाद एलडीए ने जर्जर इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है। प्राधिकरण अपनी आवासीय योजनाओं में 25 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों का सर्वे कराएगा। यदि कोई भवन संरचनात्मक रूप से कमजोर पाया गया तो…

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली में हुए हादसे के बाद एलडीए ने जर्जर इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है। प्राधिकरण अपनी आवासीय योजनाओं में 25 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों का सर्वे कराएगा। यदि कोई भवन संरचनात्मक रूप से कमजोर पाया गया तो मरम्मत या ध्वस्तीकरण का आदेश दिया जाएगा।
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी हॉस्टल की इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। किसी भी संभावित बड़े हादसे को रोकने के लिए एलडीए ने अपनी आवासीय योजनाओं में 25 वर्ष से अधिक पुरानी और जर्जर इमारतों की सेफ्टी ऑडिट कराने का बड़ा फैसला लिया है। एलडीए अब अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली कॉलोनियों में ऐसी पुरानी इमारतों का व्यापक सर्वे कराएगा। जांच के दौरान यदि कोई भवन संरचनात्मक रूप से कमजोर या खतरनाक पाया गया तो भवनस्वामी को अनिवार्य मरम्मत कराने अथवा आवश्यकता पड़ने पर उसे तत्काल ध्वस्त करने का आदेश दिया जाएगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में सभी सातों जोनल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। गोमतीनगर, अलीगंज, जानकीपुरम, कानपुर रोड, शारदा नगर, महानगर और आशियाना समेत प्राधिकरण की सभी प्रमुख योजनाओं में 25 वर्ष या उससे अधिक पुरानी इमारतों की पहचान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उपाध्यक्ष ने प्रत्येक जोनल अधिकारी को अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम 20 ऐसी पुरानी व जर्जर इमारतों को चिह्नित करने का सख्त लक्ष्य दिया गया है। अब तक खतरनाक और जर्जर भवनों को चिन्हित करने का काम मुख्य रूप से नगर निगम करता रहा है लेकिन अब दिल्ली में हुए हादसे के बाद एलडीए ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
सेफ्टी ऑडिट में असुरक्षित मिले तो मरम्मत या ध्वस्तीकरण अनिवार्य बताया जाता है कि एलडीए के सर्वे में चिन्हित की जाने वाली 25 वर्ष पुरानी इमारतों का विशेषज्ञों की टीम से विस्तृत सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। तकनीकी जांच में यदि नींव, बीम या पिलर कमजोर पाए गए और भवन रहने योग्य नहीं निकला, तो भवनस्वामी को नोटिस देकर सुरक्षित उपाय करने होंगे। इतना ही नहीं, यदि भवनस्वामी निर्धारित समय सीमा में मरम्मत नहीं कराता है या भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पाया जाता है तो आम जनमानस की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एलडीए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की सख्त कार्रवाई करेगा। एलडीए ने साफ किया है कि जनता की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
अलीगंज के 51 अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई इसी बीच अलीगंज क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर खड़े किए गए 51 खतरनाक और अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका की सुनवाई भी गुरुवार को होगी। यह मामला 'लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य' के साथ सुना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की तकनीकी टीम 5 सितंबर को ही लखनऊ आकर इन निर्माणों का स्थलीय सर्वे कर चुकी है। पहले यह सुनवाई 15 सितंबर को होनी थी लेकिन दिल्ली की घटना के मद्देनजर इसे पहले ही सूचीबद्ध कर लिया गया है। एलडीए की विधिक टीम पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुकी है। सर्वे में सामने आया है कि 45 आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल, अस्पताल और रेस्टोरेंट चल रहे हैं, जिनमें से 39 ने शमन आवेदन किया है और 17 ने शुल्क जमा किया है।
लेखक के बारे मेंविशाल चौबेविशाल चौबे नवभारतटाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हैं। विशाल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम, शासन और व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों की खबरें लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 साल का अनुभव हासिल कर चुके हैं। उन्होंने अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ज्वॉइन किया था। विशाल चौबे ने टाइम्स ग्रुप से पहले लाइव यूपी न्यूज 24 और दैनिक भास्कर में काम किया है। उन्हें इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा इलेक्शन और यूपी नगर निकाय चुनाव में रिपोर्टिंग करने का भी मौका मिला।
विशेषज्ञता- अपराध जगत से जुड़ी खबरों को तहकीकात के साथ पेश करने का खासा अनुभव है। इसके अलावा सियासी उठापटक से जुड़े राजनीतिक विश्लेषण और ओपनियन भी करते रहते हैं।
पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 4 साल से कार्यरत
शिक्षा- विशाल चौबे ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज कॉलेज से पत्रकारिता और जनसंचार में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में MA किया है। विशाल चौबे मूलरूप से महराजगंज जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें
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