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रातभर अफवाहों का शोर, तड़के सहारनपुर में मस्जिद पर चल गया बुलडोजर, जानिए डेढ़ साल पुराना विवाद

कलेक्ट्रेट परिसर जैसे संवेदनशील स्थान पर रात में पुलिस की भारी तैनाती और पांचों गेट बंद किए जाने से स्थिति को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की…

Navbharat Times के अनुसार5 सितंबर 2026 को 06:31 am बजे
रातभर अफवाहों का शोर, तड़के सहारनपुर में मस्जिद पर चल गया बुलडोजर, जानिए डेढ़ साल पुराना विवाद

सौजन्य से:- Navbharat Times

कलेक्ट्रेट परिसर जैसे संवेदनशील स्थान पर रात में पुलिस की भारी तैनाती और पांचों गेट बंद किए जाने से स्थिति को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया।

नेताओं की बढ़ी सक्रियता

देर रात अचानक यह खबर फैलने लगी कि प्रशासन कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को गिराने की तैयारी कर रहा है। देखते ही देखते यह चर्चा शहर और सोशल मीडिया तक पहुंच गई। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए आपने समाज से शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वहीं, उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव के जरिए घटनाक्रम की जानकारी साझा की।

गेट पर रोक दिए गए सपा विधायक आशु मलिक

इधर, सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेताओं के कलेक्ट्रेट पहुंचने की कोशिश की खबर सामने आई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें परिसर के गेट पर ही रोक दिया गया। प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के पांचों गेट बंद कर दिए थे और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

डीएम से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम

देर रात सपा नेताओं की डीएम अरविंद चौहान से मुलाकात की भी जानकारी सामने आई। नेताओं ने मस्जिद पर कार्रवाई की आशंका जताई। बताया गया कि उस समय प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने और तत्काल ध्वस्तीकरण नहीं किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष के लोगों को उम्मीद थी कि रात में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन शनिवार तड़के करीब चार बजे प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होते ही पूरा घटनाक्रम बदल गया।

चार बजे पहुंचा बुलडोजर, छह मशीनों से शुरू हुआ ध्वस्तीकरण

शनिवार सुबह करीब चार बजे कलेक्ट्रेट परिसर के गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई। परिसर के भीतर अधिकारी और पुलिसकर्मी तैनात रहे, जबकि बाहर भी भारी पुलिस बल मौजूद रहा। इसके बाद बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचाए गए और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा जमींदोज कर दिया गया। पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए जाने की बात सामने आई है।

दो दिन पहले अदालत ने बरकरार रखा था आदेश

मस्जिद पर हुई कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल पुराना कानूनी विवाद है। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी जमीन मानते हुए मस्जिद को अनधिकृत निर्माण माना था। आदेश में परिसर खाली करने के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी।

150 साल पुराने मस्जिद होने का किया गया दावा

मस्जिद पक्ष ने इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए करीब 150 साल पुरानी मस्जिद होने का दावा किया था। हालांकि, अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने की बात आदेश में सामने आई।

2025 में शिकायत से शुरू हुआ था विवाद

कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल किया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में अपील की, लेकिन 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज कर दी।

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