यूपी में KCC से किसानों पर 1.40 लाख करोड़ का कर्ज, पिछले पांच सालों में 16,900 करोड़ बढ़ा बकाया
यूपी में किसान क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है। यूपी के किसानों पर कर्ज का बकाया कर्ज 1.40 लाख करोड़ रुपये के करीच पहुंच गया है। लखनऊ: किसान क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले में उत्तर प्रद…

सौजन्य से:- Navbharat Times
यूपी में किसान क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है। यूपी के किसानों पर कर्ज का बकाया कर्ज 1.40 लाख करोड़ रुपये के करीच पहुंच गया है।
लखनऊ: किसान क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है। उत्तर प्रदेश के किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का बकाया कर्ज 1.40 लाख करोड़ रुपये के करीच पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य में केसीसी के तहत कुल बकाया ऋण 1,39,986 करोड़ रुपये हैं, जो देश में सर्वाधिक है। राज्य ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े कृषि राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।
5 साल में 16,900 करोड़ का बढ़ा केसीसी कर्ज
लोकसभा में वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 में उत्तर प्रदेश में केसीसी बकाया 1,23,076 करोड़ रुपये था। इसके बाद यह लगातार बढ़ते हुए 2022-23 में 1,28,123 करोड, 2023-24 में 1,38,621 करोड़ और 2024-25 में रेकॉर्ड 1,41,375 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, 2025-26 में इसमें मामूली गिरावट आई, लेकिन बकाया राशि अब भी 1.40 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बनी हुई है। पांच वर्षों में राज्य का कुल बकाया करीब 16,900 करोड़ रुपये बढ़ा है।
KCC ऋण वाले शीर्ष 5 राज्य (करोड़ में)
क्यों बढ़ रहा कर्ज
विशेषज्ञों का मानना है कि बीज, उर्वरक, कीटनाशक, डीजल और कृषि मशीनरी पर बढ़ते खर्च के कारण किसान केसीसी का अधिक उपयोग कर रहे हैं। केसीसी किसानों को सस्ती दरों पर फसल ऋण उपलब्ध करवाता है, लेकिन बकाया ऋण का लगातार ऊंचा स्तर यह भी संकेत देता है कि खेती की लागत और आय के बीच संतुलन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
केसीसी अनुदान बढ़ना भी एक वजह
बजट 2025-26 में संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत केसीसी ऋण सीमा 3 लाख स्रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। सरकार का तर्क है कि इससे किसानों को अधिक सस्ता संस्थागत ऋण मिलेगा और साहूकारों या अन्य गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।
लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

लखनऊ की नैमिष नगर और वरुण विहार योजना का आज शुभारंभ, सीएम योगी करेंगे शिलान्यास

बेटी की जिद और मां का प्यार! लखनऊ चिड़ियाघर में मादा जिराफ सुजाता को अपर्णा यादव ने लिया गोद, दिया ₹5.51 लाख का चेक

Uttar Pradesh farm pond scheme helps farmers store rainwater for irrigation


