अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC पर योगी सरकार का दांव, निजी हाथों में सौंपा
अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC पर योगी सरकार का दांव, निजी हाथों में सौंपा निजी हाथों में देने की पहले ही सहमति हो चुकी थी लेकिन संस्था का चयन नहीं हुआ था. सरकार ने इसे जैसे है तैसे की शर्त पर इसे निजी हाथों में सौ…

सौजन्य से:- ABP News
अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC पर योगी सरकार का दांव, निजी हाथों में सौंपा
निजी हाथों में देने की पहले ही सहमति हो चुकी थी लेकिन संस्था का चयन नहीं हुआ था. सरकार ने इसे जैसे है तैसे की शर्त पर इसे निजी हाथों में सौंपा है.अभी सपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. लखनऊ के गोमतीनगर स्थित JPNIC के संचालन को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. सरकार ने वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और रॉकवुड होटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड को सेंटर 30 साल की लीज पर देने की मंजूरी दी है.
हालांकि निजी हाथों में देने की पहले ही सहमति हो चुकी थी लेकिन संस्था का चयन नहीं हुआ था. सरकार ने इसे जैसे है तैसे की शर्त पर इसे निजी हाथों में सौंपा है.इसको लेकर अभी समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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निजी कंपनियां करेंगी संचालन और मरम्मत
अब JPNIC का संचालन इन निजी कंपनियों के जिम्मे होगा. सेंटर की मरम्मत, रखरखाव और जरूरी काम भी संबंधित निजी संस्था की जिम्मेदारी होगी. यानी लंबे समय से बंद पड़े इस बड़े परिसर को दोबारा शुरू करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को खुद पूरा संचालन नहीं करना पड़ेगा. अभी तक इसकी जिम्मेदारी प्राधिकरण की ही थी.
2017 में अखिलेश यादव ने किया था उद्घाटन
JPNIC का निर्माण वर्ष 2013 में करीब 265.58 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ था. इसके बाद परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई. 2014 में लागत 615.44 करोड़ रुपये हुई, जबकि 2015 और 2016 में भी इसमें करोड़ों रुपये जोड़े गए. आखिरकार परियोजना की लागत करीब 864.99 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. अखिलेश यादव ने वर्ष 2017 में JPNIC का उद्घाटन किया था. हालांकि उस समय सेंटर पूरी तरह तैयार नहीं था. इसके बाद से यह लंबे समय तक बंद पड़ा रहा.
बंद रहने से खराब हुआ करोड़ों का सामान
JPNIC के लंबे समय तक बंद रहने का असर यहां लगे उपकरणों पर भी पड़ा है. अलग-अलग फर्मों के जरिए लगाए गए विद्युत और आधुनिक उपकरणों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जाती है. इनमें बड़ी संख्या में विदेशी और महंगे उपकरण शामिल हैं.
इंटरनेशनल स्विमिंग पूल भी बदहाल
JPNIC परिसर में बना इंटरनेशनल स्विमिंग पूल भी लंबे समय से बंद है. पूल में काई जम गई है और खिलाड़ियों के बैठने के लिए बनाए गए रैंप की विदेशी लकड़ी भी गायब हो चुकी है. परिसर में कई जगह टाइल्स टूट गई हैं, जबकि लोहे और एल्युमिनियम के पोल में जंग लग गई है.
2 साल में पूरा करना होगा काम
जेपीएनआईसी में इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल एवं फायर उपकरण सहित कई काम अभी अधूरे है. इसको पूरा करने में 200 से 250 करोड़ रुपये की लागत आएगी. अनुबंध के अनुसार चयनित कंसोर्टियम को अपने खर्च से 2 साल के अंदर सभी अधूरे कामों को पूरा करना होगा. और उसका संचालन भी करना होगा. इतना ही नहीं, कंसोर्टियम को अनुबंध की शर्तों के तहत 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी प्राधिकरण में जमा करनी होगी. वहीं, स्वीकृति पत्र प्राप्त होने पर कंसोर्टियम द्वारा प्राधिकरण को 10 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा.
संचालन शुरू होते ही मिलेगा राजस्व
जेपीएनआईसी का संचालन शुरू होने के बाद कंसोर्टियम द्वारा एलडीए को प्रति वर्ष 6 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा. इस राशि में प्रत्येक वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी और निर्धारित लीज अवधि पूरे होने तक यह सालाना धनराशि लगभग 35 करोड़ रूपये हो जाएगी. इस प्रकार से जेपीएनआईसी के संचालन से प्राधिकरण को नियमित राजस्व मिलेगा. एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इसके निर्माण में लगभग 821 करोड़ रुपये की लागत आयी है, जिसे एलडीए अगले 30 वर्षों में शासन को वापस करेगा. लीज व्यवस्था से जेपीएनआईसी के रखरखाव, अधूरे कामों को पूरा करवाया जाएगा. वहीं, म्यूजियम ब्लॉक के संचालन का अधिकार लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास सुरक्षित रहेगा.
मेंबरशिप की दरें तय करेगी समिति
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि चयनित कंसोर्टियम द्वारा जेपीएनआईसी में स्पोर्ट्स फैसिलिटी मेंबरशिप एवं क्लब मेंबरशिप का प्रावधान किया जाएगा. जिसके लिए लोगों को शुल्क देना होगा. हालांकि, मेंबरशिप के लिए प्रभावी दरों का निर्धारण कंसोर्टियम द्वारा नहीं, बल्कि कमेटी द्वारा किया जाएगा.
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