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जयंत चौधरी को बड़ा झटका, यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने छोड़ी रालोद, क्या अगला कदम?

जयंत चौधरी को बड़ा झटका, यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने छोड़ी रालोद, क्या अगला कदम? रालोद के यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अध्यक्ष के साथ ही पार्टी भी छोड़ दी है। कहा जा रहा है कि वह विधानसभा चुना…

Hindustan के अनुसार7 अगस्त 2026 को 01:18 pm बजे
जयंत चौधरी को बड़ा झटका, यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने छोड़ी रालोद, क्या अगला कदम?

सौजन्य से:- Hindustan

जयंत चौधरी को बड़ा झटका, यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने छोड़ी रालोद, क्या अगला कदम?

रालोद के यूपी अध्यक्ष रामाशीष राय ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अध्यक्ष के साथ ही पार्टी भी छोड़ दी है। कहा जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के लिए टिकट मांग रहे थे।

यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को बड़ा झटका लगा है। रालोद के यूपी अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रामाशीष राय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे में उन्होंने अपनी ही पार्टी की नीतियों पर इशारों में कई आरोप लगाए हैं। किसानों और नौजवानों की बात कहते हुए उनकी समस्याओं को उठाया है। जय प्रकाश नारायण औऱ अटल बिहारी वाजपेयी के अह्वानों की चर्चा करते हुए लिखा कि आज संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में है। रामाशीष राय इससे पहले भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। कहा जा रहा है कि वह समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं। अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ने की तैयारी है।

व्यवस्था परिवर्तन का सपना आज भी अधूरा

रामाशीष ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि मैं राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था। उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण और शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने "संपूर्ण क्रांति" का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है।

किसान-नौजवान दोनों परेशान

कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है। नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है।

उच्च स्थानों पर पहुंच गए विभाजनकारी लोग

कहा कि देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए "जाति तोड़ो, समाज जोड़ो" का संदेश दिया था। दुर्भाग्यवश आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित—तीनों के लिए घातक है।

अटल जी की आशंकाएं सही लग रहीं

कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भी राजनीति और चुनावों में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था। आज उनकी आशंकाएं काफी हद तक सही सिद्ध होती दिखाई दे रही हैं। राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता के स्थान पर आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए चिंताजनक है।

व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश

संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है। व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश, इन्हीं वैचारिक और नैतिक कारणों से राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।

देवरिया से चुनाव लड़ने की चर्चा

कुछ दिनों पहले ही जयंत चौधरी ने अनुपम मिश्रा को रालोद का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया था। तभी से माना जा रहा था कि डा. राय पार्टी छोड़ सकते हैं । उनके सपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं । कहा जा रहा है कि देवरिया से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं । ऐसे में कांग्रेस में भी जाने की चर्चा है । हालांकि उन्होंने अभी इस पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

लेखक के बारे में

Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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