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'बीजेपी दरवाजा बंद करेगी तो विचार करेंगे', यूपी के मंत्री संजय निषाद क्या एनडीए से हुए खफा?

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद समाजवादी पार्टी के बड़े नेता माता प्रसाद पांडे से मिले। इससे पहले वे अपनी ही सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर चुके है। इस घटनाक्रम के कई कयास लगाए जा र…

Navbharat Times के अनुसार15 सितंबर 2026 को 01:04 pm बजे
'बीजेपी दरवाजा बंद करेगी तो विचार करेंगे', यूपी के मंत्री संजय निषाद क्या एनडीए से हुए खफा?

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद समाजवादी पार्टी के बड़े नेता माता प्रसाद पांडे से मिले। इससे पहले वे अपनी ही सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर चुके है। इस घटनाक्रम के कई कयास लगाए जा रहे हैं।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड के मामले में यूपी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कुछ दिन पहले विरोध प्रदर्शन किया था। और अब उन्होंने समाजवादी पार्टी के बड़े नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात की है। तब जब यूपी में विधानसभा चुनाव में पांच-छह माह ही शेष हैं, इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि संजय निषाद एनडीए का नेतृत्व करने वाली बीजेपी से नाराज हैं। क्या निषाद अब बगावत पर उतर आए हैं? संजय निषाद ने यह तो नहीं कहा है कि वे बीजेपी का साथ छोड़ेंगे, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा है कि सपा ने दरवाजा बंद किया था तो वे भाजपा के साथ गए थे। भाजपा दरवाजा बंद करेगी तो विचार करेंगे।

उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय की आबादी बहुत है। कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद इस समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं। गोंडा के व्यापारी और निषाद पार्टी के कार्यकर्ता विनोद कुमार सहनी की कुछ दिन पहले हत्या कर दी गई। इस पर संजय निषाद ने पुलिस की लापरवाही के विरोध में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिया था।

विपक्ष के दलों के साथ धरना

गोंडा में पिछले सप्ताह विनोद कुमार सहनी पर हमला हुआ था। उनकी इलाज के दौरान लखनऊ के किंग्स जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मौत हो गई थी। संजय निषाद ने लखनऊ में गुरुवार को केजीएमयू के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरना दिया था, जिसमें उनके साथ विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी और समाजवादी पार्टी के नेता भी शामिल हुए थे। संजय निषाद ने इसके अगले दिन शुक्रवार को भी सैकड़ों लोगों के साथ गोंडा के कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

क्या सपा के साथ जाएंगे संजय निषाद?

संजय निषाद के यूपी सरकार के खिलाफ यह तेवर संदेह पैदा करने वाले हैं। सवाल उठ रहा है क्या एनडीए के घटक दल निषाद पार्टी और बीजेपी की दोस्ती में दरारें पड़ने लगी हैं? लखनऊ के सियासी गलियारों में चर्चा चलने लगी है कि संजय निषाद अब समाजवादी पार्टी के राजनीतिक हमराही बन सकते हैं।

क्या सीटों के बंटवारे को लेकर असंतोष?

संजय निषाद के बारे में कहा जा रहा है कि चुनाव में एनडीए के सीटों के बंटवारे में उन्हें उतनी सीटें नहीं दी जा रही हैं जितनी वे चाहते हैं। हालांकि संजय निषाद ने एक इंटरव्यू में इस बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि निषाद पार्टी आंदोलन की पार्टी है। यह देश में भीख मांगने वाली पार्टी नहीं है। यह न्याय दिलाने वाली पार्टी है।

माता प्रसाद पांडे से मुलाकात पर सफाई

माता प्रसाद पांडे से मुलाकात को लेकर संजय निषाद का कहना है कि, 'जो भी बातें हैं वे एक तस्वीर (मुलाकात की) को देखकर कही जा रही हैं। उस तस्वीर के गलत मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। वे हमारे पुराने नेता हैं। स्टूडेंट लाइफ में साथी रहे हैं, हमारे मार्गदर्शक रहे हैं। वे बीमार थे तो मेरा मिलने का कर्तव्य बनता है। दो बड़े नेता जहां बैठते हैं तो चर्चा भी होती है।'

सपा के दरवाजा बंद करने पर भाजपा का साथ चुना था

संजय निषाद ने कहा कि, 'सपा ने दरवाजा बंद किया था तो मैं भाजपा के साथ गया था। भाजपा दरवाजा बंद करेगी तब विचार करेंगे। आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने लिखा था। गृह मंत्री ने आरजीआई से कहा है कि इनके मामले को देखो। आरजीआई ने लिखा है कि मछुआरों को अनसूचित जाति के तहत सामाजिक न्याय मंत्रालय के दिशानिर्देश पर चर्चा होनी चाहिए। इस पर 2022 में चर्चा हुई, 2024 (लोकसभा चुनाव) में नुकसान हुआ। यह आंदोलन चलता रहेगा। 2027 (विधानसभा चुनवा) से पहले कई न कोई रास्ता निकलना ही चाहिए। हमारा नाम ओबीसी से खारिज हो अनसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी हो। उन्होंने कहा कि, बसपा ने हमारी जमीन छीनी थी। वह तालघाट नदी बालू की वापस हो।'

मछुआरों को आरक्षण के मुद्दे पर मुखर निषाद

संजय निषाद की बीजेपी से नाराजगी की खबरें कुछ दिन से आ रही हैं। संजय निषाद यूपी में निषाद समाज को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने और नौ प्रतिशत आरक्षण देने की मांग लंबे अरसे से कर रहे हैं। वे पहले भी कई बार यह संकेत दे चुके हैं कि यदि उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला तो एनडीए से अलग होकर अपनी अलग राह चुन सकते हैं।

निषाद के सामने अब मुकेश सहनी की चुनौती

दूसरी तरफ बिहार के विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश सहनी उनके लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। मुकेश सहनी भी मछुआरा जाति समुदाय से हैं और उनकी पार्टी विपक्ष के इंडिया गठबंधन में शामिल है। सहनी कुछ समय से उत्तर प्रदेश में, खास तौर पर पूर्वोत्तर में काफी सक्रिय हैं। वे यूपी के विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वे मछुआरों को दलित आरक्षण नहीं मिलने के मुद्दे को हवा दे रहे हैं।

संजय निषाद के सामने दो रास्ते

यदि मछुआरों को दलित वर्ग में शामिल करके आरक्षण नहीं दिया जाता है तो संजय निषाद को नुकसान हो सकता है। दूसरी तरफ इसी मुद्दे को लेकर मुकेश सहनी उनके वोट छीन सकते हैं। माना जाता है कि संजय निषाद पूरी कोशिश कर रहे हैं कि मछुआरों को दलित श्रेणी में शामिल करा लिया जाए। यदि यह नहीं होता है तो समाजवादी पार्टी के दरवाजे पर इंडिया गठबंधन में शामिल होने के लिए दस्तक दी जा सकती है। ऐसा होता है तो उन्हें मुकेश सहनी से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ेगी।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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