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एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व IPS राजेश पांडेय कौन हैं? अयोध्या के राम मंदिर में CEO की दौड़ में शामिल

उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए उम्मीदवार हैं। राजेश पांडेय पुलिस के तेजतर्रार अधिकारी रहे हैं। वे यूपी एसटीएफ और यूपी एटीएस क…

Navbharat Times के अनुसार12 अगस्त 2026 को 09:18 am बजे
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व IPS राजेश पांडेय कौन हैं? अयोध्या के राम मंदिर में CEO की दौड़ में शामिल

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए उम्मीदवार हैं। राजेश पांडेय पुलिस के तेजतर्रार अधिकारी रहे हैं। वे यूपी एसटीएफ और यूपी एटीएस के संस्थापक सदस्य अधिकारी रहे हैं। वे एनकाउंटर के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

अयोध्या: यहां के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस पद के उम्मीदवारों के इंटरव्यू मंगलवार को शुरू किए गए। सीईओ के पद के लिए पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय भी उम्मीदवार हैं। राजेश पांडेय वही पूर्व पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता है। उन्होंने पुलिस में सेवा के दौरान 80 से अधिक एनकाउंटर किए हैं। यही नहीं, राजेश पांडेय यूपी पुलिस की दो खास यूनिटें स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं।

पुलिस में 32 साल तक सेवाएं दीं

राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे। वे प्रमोट होकर आईपीएस अधिकारी बने थे। पांडेय उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए सन 1986 में पीपीएस (PPS) अधिकारी के रूप में चयनित हुए थे। उन्हें 21 फरवरी 1989 को यूपी पुलिस में डीएसपी के पद पर तैनात किया गया था। यूपी में कई स्थानों पर सेवाएं देने के बाद सन 2003 में वे आईपीएस बने थे। वे बरेली रेंज के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) के पद पर भी थे। वे 32 साल की सेवा के बाद 30 जून 2021 को उत्तर प्रदेश पुलिस के आईजी- इलेक्शन सेल के पद से रिटायर हुए थे।

पांडेय ने किए 80 एनकाउंटर

राजेश पांडेय एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी रहे हैं। लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में एसएसपी के पद पर रहते हुए राजेश पांडेय 80 से अधिक एनकाउंटर किए थे। वे उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) और यूपी की आतंकवाद रोधी यूनिट एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) के संस्थापक सदस्य रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आतंकवाद विरोधी अभियानों का लंबा अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय को मोबाइल फोन के इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में महारत हासिल है।

गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला को मार गिराया था

राजेश पांडेय के नाम पर कई आपराधिक गिरोहों का सफाया करने की उपलब्धि है। उन्होंने सबसे बड़ी कामयाबी कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला को मार गिराकर हासिल की थी। शुक्ला बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद और पूर्वी यूपी के माफिया वीरेंद्र कुमार शाही सहित कई लोगों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार था। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की साजिश भी रची थी।

राजेश पांडेय ने यूपी में संगठित अपराध और आतंकवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कई अहम ऑपरेशन का नेतृत्व किया और बहादुरी के लिए चार इंडियन पुलिस मेडल हासिल किए। उन्होंने कोसोवो में यूएन पीस कीपिंग मिशन के साथ भी काम किया और यूनाइटेड नेशन्स मेडल हासिल किया।

कई पुरस्कारों से नवाजे गए राजेश पांडेय

राष्ट्रपति के वीरता पदक (Gallantry Medals) से चार बार सम्मानित हुए। उन्हें सन 2005 में सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति का आईपीएस पदक, सन 2008 में कोसोवो में शांति स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र पदक से नवाजा गया था। सन 2018 और 2020 में उन्हें यूपी डीजीपी की सिल्वर कमेंडेशन डिस्क मिली थी। सन 2021 में उन्हे यूपी डीजीपी की प्लेटिनम डिस्क का सम्मान मिला था।

सेवानिवृत्ति के बाद लिखी किताब

सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राजेश पांडेय को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का नोडल सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया। उन्होंने सन 2023 में पत्रकार और मीडिया-स्टडीज के प्रोफेसर राकेश गोस्वामी के साथ मिलकर अपनी पहली किताब 'ऑपरेशन बाजूका' लिखी।

यूट्यूब पर सुनाते हैं कहानियां

प्रयागराज के मूल निवासी राजेश पांडेय का जन्म 15 जून 1961 को हुआ था। उनके पिता का नाम चंद्रप्रकाश पांडेय है। उन्होंने 1982 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बॉटनी में एएससी की डिग्री ली थी। सन 1984 में यूजीसी नेट परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने पूसा इंस्टीट्यूट में रिसर्च एसोसिएट के पद पर काम किया था। लखनऊ में रह रहे राजेश पांडेय को कहानियां सुनाने का शौक है। वे अपने यूट्यूब चैनल पर पुलिस से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हैं।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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