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लखनऊ में अब सेंसर से लैस ट्रैक पर देना होगा ड्राइविंग टेस्ट, पहले प्राइवेट सेंटर एडीटीसी पर शुरू हुई टेस्टिंग

लखनऊ में अब सेंसर से लैस ट्रैक पर देना होगा ड्राइविंग टेस्ट, पहले प्राइवेट सेंटर एडीटीसी पर शुरू हुई टेस्टिंग मौदा स्थित एडीटीसी के टेस्टिंग ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देने जाना होगा. सोमवार से लखनऊ का पहला प्राइवेट सेंटर…

ETV Bharat के अनुसार15 सितंबर 2026 को 07:04 am बजे
लखनऊ में अब सेंसर से लैस ट्रैक पर देना होगा ड्राइविंग टेस्ट, पहले प्राइवेट सेंटर एडीटीसी पर शुरू हुई टेस्टिंग

सौजन्य से:- ETV Bharat

लखनऊ में अब सेंसर से लैस ट्रैक पर देना होगा ड्राइविंग टेस्ट, पहले प्राइवेट सेंटर एडीटीसी पर शुरू हुई टेस्टिंग

मौदा स्थित एडीटीसी के टेस्टिंग ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देने जाना होगा. सोमवार से लखनऊ का पहला प्राइवेट सेंटर शुरू हो गया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 15, 2026 at 11:30 AM IST

लखनऊ: अगर आप लखनऊ में रहते हैं और वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो अब टेस्ट के लिए ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय नहीं जाना होगा, बल्कि अब मौदा स्थित एडीटीसी (Accredited Driving Training Centre) के टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट देने जाना होगा. सोमवार से लखनऊ का पहला प्राइवेट सेंटर शुरू हो गया. यहां पर वाहन चालक को कड़े टेस्ट से गुजरना होगा.

सेंसर से लैस ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना होगा. ज़रा सी भी गलती भारी पड़ जाएगी और लाइसेंस हासिल करने से वंचित रह जाएंगे. पहले दिन यहां के सेंसर युक्त टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाने वाले 60% से ज्यादा चालक फेल हो गए. 30 वाहन चालकों ने यहां पर टेस्ट दिया और 20 से ज्यादा वाहन चालक इस कड़ी परीक्षा में फेल हो गए.

हाईटेक टेक्नोलॉजी से लैस ट्रैक पर चलाना होगा वाहन

लखनऊ के पहले प्रत्यायन चालान प्रशिक्षण केंद्र की सोमवार से शुरुआत हो गई. यहां पर अब वाहन चालकों को ट्रेनिंग के साथ ही कड़े टेस्ट से गुजरना होगा. हाईटेक टेक्नोलॉजी से लैस ट्रैक पर वाहन चलाना होगा.

दोपहिया वाहन के लिए सेंसर युक्त ट्रैक पर आठ के आकार को बिना जमीन पर पैर लगाए सफलतापूर्वक बनाएंगे तभी लाइसेंस के हकदार बन पाएंगे. जैसे ही पैर ज़मीन में लगेगा सेंसर तत्काल फेल कर देगा.

इसके बाद वाहन चालक को फिर से स्लॉट लेकर टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट देने आना होगा. मानवीय हस्तक्षेप ख़त्म होने और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से अब कुशल चालक ही ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर सकेंगे. नौसिखिया चालक ट्रैक पर टेस्ट पास नहीं कर पाएंगे.

टेक्नोलॉजी से लैस ट्रैक पर टेस्ट देने से वाहन चालक शायद घबरा रहे हैं, इसलिए प्रतिदिन लाइसेंस के 380 स्लॉट होने के बावज़ूद पहले दिन सिर्फ 30 वाहन चालक ही टेस्ट देने पहुंचे. उनमें से भी करीब 20 चालक कड़ी परीक्षा पास ही नहीं कर पाए.

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आने वालों को पहले प्रशिक्षण

"ईटीवी भारत" से बातचीत करते हुए एडीटीसी के संचालक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आने वाले चालकों को पहले यहां पर प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें वीडियो दिखाया जाता है कि किस तरह से टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाएंगे, तो सफल हो पाएंगे. यहां पर प्रशिक्षक तैनात किया गया है. जो वाहन चालकों को टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाने जाने से पहले ज़रूरी जानकारी देते हैं.

प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि यहां पर हाईटेक सिम्युलेटर लगाए गए हैं जिस पर कार और हैवी वाहन का प्रशिक्षण दिया जाता है, साथ ही वाहनों से संबंधित तमाम उपकरण भी यहां पर रखे गए हैं. उनके बारे में भी वाहन चालकों को बताया जाता है. ट्रैफिक रूल्स की जानकारी दी जाती है.

वाहन ट्रैक पर लगे होते हैं सेसर

उनका कहना है कि चार तरह के यहां पर ट्रैक हैं जिन पर वाहन चलाकर दिखाना होता है. सभी ट्रैक सेंसर से लैस हैं. जरा सी गलती, समझो फेल, इसलिए अब ड्राइविंग लाइसेंस ऐसे चालकों को ही मिलेगा, जो वास्तविकता में वाहन चला लेते होंगे. चालक टेस्ट पास ही नहीं कर पाएंगे इसलिए उन्हें लाइसेंस भी जारी नहीं हो सकेगा. इससे दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी.

उनका कहना है कि टेस्टिंग के साथ ही यहां पर ट्रेनिंग के भी व्यवस्था की गई है. 6000 से लेकर ₹10000 तक शुल्क चुकाकर वाहन चालकों को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था है. उनका कहना है कि महिलाओं को प्रशिक्षण की फीस में रियायत देने की भी हमने व्यवस्था की है.

क्या कहते हैं प्रशिक्षक

प्रशिक्षक रविंद्र यादव का कहना है कि टेस्ट देने जाने से पहले हम चालकों कि यहां पर क्लास लेते हैं. उन्हें बताते हैं कि किस तरह से टेस्टिंग ट्रैक पर गाड़ी चलाना है जिससे गलती न हो. यहां पर चार तरह के टेस्टिंग ट्रैक हैं जिन पर समय में टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है. 45 सेकंड से लेकर 50 सेकंड में टेस्ट की ये प्रक्रिया पूरी करनी होती है.

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