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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में कहां हुई लापरवाही? IIT-NIT की जांच से खुलेगा राज

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में कहां हुई लापरवाही? IIT-NIT की जांच से खुलेगा राज लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शनिवार को एक बार फिर धंस गई। अब एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांचने के लिए चार कंपनियों को थर्ड पार्टी सर्वे का क…

Hindustan के अनुसार9 अगस्त 2026 को 02:18 am बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में कहां हुई लापरवाही? IIT-NIT की जांच से खुलेगा राज

सौजन्य से:- Hindustan

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में कहां हुई लापरवाही? IIT-NIT की जांच से खुलेगा राज

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शनिवार को एक बार फिर धंस गई। अब एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांचने के लिए चार कंपनियों को थर्ड पार्टी सर्वे का काम सौंपा गया है। इन कंपनियों ने 61 छेद कर 122 सैंपल लिए। इन सभी सैंपलों की लैबोरेट्री में अलग-अलग जांच होगी।

Lucknow-Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में नियमों की खूब अनदेखी की गई। जिसके कारण एक बार फिर शनिवार को सड़क किमी 63.9 और 30.3 पर धंस गई। इसके अलावा दो स्थानों पर तारकोल में आई दरार के कारण सड़क को उखाड़ कर नए सिरे से बनाया जा रहा है। जिसके कारण एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग स्थानों पर कुल पांच किमी का डायवर्जन किया गया है।

एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांचने के लिए चार कंपनियों को थर्ड पार्टी सर्वे का काम सौंपा गया है। इन कंपनियों ने कानपुर साइड के आजाद चौक से लखनऊ साइड के एलिवेटेड पुल के पहले तक एक्सप्रेसवे में 61 छेद किए हैं। नेशनल सर्वे व्हीकल और ड्रिलिंग मशीनों के जरिए बिटुमिन, कंक्रीट और मिट्टी समेत 122 सैंपल लिए गए हैं।

इन सभी सैंपलों की प्रयोगशाला में अलग-अलग जांच होगी। इससे साफ हो सकेगा की एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता में कहां खामी रह गई थी या सड़क धंसने के पीछे वजह क्या थी। शनिवार को भी सैंपल लेने का काम जारी रहा। इसमें थर्ड पार्टी एजेंसी के रूप में आईआईटी खड़गपुर और एनआईटी जांच कर रही हैं। इनके जरिए सक्षम सर्वे सॉल्यूशन, एनएसबी, क्यूब हाईवे और एनटीसी ने अलग-अलग स्थानों पर मशीन से होल बनाकर सैंपल उठाया। इसे लैमिनेट करके मौके पर ही सील कर दिया। ये सभी सैंपल प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाएंगे।

सक्षम सर्वे सॉल्यूशन के ट्रांसफोर्टेशन इंजीनियर अमन रतूड़ी का कहना है कि रोड धंसने के बाद हमने कई जगह का सर्वे किया है। कोर कटिंग की है। इसमें हम मिट्टी, बिटुमिन, कंक्रीट और मिश्रण की जांच कर रहे हैं। इससे यह पता चलेगा कि इस्तेमाल निर्माण सामग्री कितनी क्षमता का लोड सह सकती है। साथ ही दरारों को भी देख रहे हैं कि ये क्यों हुआ। सैंपल की लैब में जांच होगी। थिकनेस का अंदाजा तो लग रहा है मगर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

आठ बिंदुओं पर हो रही जांच

सड़क की थिकनेस : इसमें सड़क की मोटाई जांची जाती है क्योंकि इससे सड़क की उम्र और गुणवत्ता का पता चलता है। सड़क की जितनी सही मोटाई होगी वह उतनी ही टिकाऊ होगी।

लोड बेयरिंग कैपिसिटी : इसमें देखा जाता है कि सड़क भारी वाहनों का कितना वजन आसानी से संभाल सकती है। अगर थिकनेस कम होगी तो सड़क जल्दी धंसेगी और दरारें आ जाएंगी।

सब बेस क्वालिटी : यह सड़क की सबसे नीचे की परत होती है जो जमीन की नमी को रोकती है। इसमें यह देखा जाता है कि कहीं रोड का सब बेस तैयार करने में लापरवाही तो नहीं हुई।

बेस कोर्स क्वालिटी : यह सड़क की बीच की परत होती है। यह लोड को फैलाती है। यानी सड़क पर जो लोड आता है उसे अलग-अलग दूर तक कर देती है उसी प्वाइंट पर असर न पड़े।

सरफेस कोर्स क्वालिटी : यह सबसे ऊपरी डामर या कंक्रीट की परत होती है जिस पर वाहन गुजरते हैं। यह देखा जाता है कि पानी सड़क से नीचे की परत पर न जाए इसके लिए क्या हुआ।

मिट्टी की जांच : इसमें देखा जाता है कि मिट्टी का इस्तेमाल कैसा हुआ, उसकी गुणवत्ता कैसी थी? क्या सड़क पर डामरीकरण और कंक्रीट डालने के पहले मिट्टी ठीक से बैठाई गई या नहीं?

मौसम का प्रभाव: इसमें इसकी भी जांच होगी कि सड़क निर्माण करते वक्त मौसम की क्या स्थिति थी? क्या इतनी बारिश हुई कि सड़क नमी को नहीं झेल सकी और निचली परत प्रभावित हुई?

ड्रेनेज सिस्टम : इसमें यह देखा जा रहा है कि बारिश होने पर जल निकासी के लिए एक्सप्रेसवे पर बेहतर इंतजाम हुए थे या नहीं, लेबल ऐसा रखा गया था नहीं कि पानी मिनटों में बाहर हो जाए?

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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