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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सड़क के कई फुट नीचे तक मिली नमी, IIT खड़गपुर की टीम ने चार घंटे तक की निरीक्षण

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे में खामियों को लेकर आईआईटी खड़गपुर की टीम ने जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को करीब चार घंटे तक चली छानबीन में ग्रीनफील्ड एरिया में सड़क के नीचे कई फुट तक नमी मिली। लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे क…

Navbharat Times के अनुसार8 अगस्त 2026 को 01:18 am बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सड़क के कई फुट नीचे तक मिली नमी, IIT खड़गपुर की टीम ने चार घंटे तक की निरीक्षण

सौजन्य से:- Navbharat Times

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे में खामियों को लेकर आईआईटी खड़गपुर की टीम ने जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को करीब चार घंटे तक चली छानबीन में ग्रीनफील्ड एरिया में सड़क के नीचे कई फुट तक नमी मिली।

लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे कई जगह धंसने के बाद उसकी खामियों की जांच आईआईटी खड़गपुर की टीम ने शुरू कर दी है। शुक्रवार को करीब चार घंटे तक चली छानबीन में ग्रीनफील्ड एरिया में सड़क के नीचे कई फुट तक नमी मिली, जिसे सड़क टूटने की मुख्य वजह माना जा रहा है। टीम के सदस्यों ने मिट्टी और डामर का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है।

चार घंटे तक चली छानबीन

आईआईटी खड़गपुर, स्वतंत्र लेबोरेटरी और एनएचएआई की संयुक्त टीम शुक्रवार को एक्सप्रेस-वे पहुंची और निरीक्षण शुरू किया। टीम के सदस्यों ने करीब चार घंटे तक छानबीन की। सूत्रों का कहना है कि सबसे पहले किमी 60 के आसपास उन्नाव इलाके में ग्रीनफील्ड एरिया में बनी सड़क की जांच शुरू हुई। यहीं पर सबसे पहले सड़क धंसी थी। टीम के सदस्यों ने ग्रीनफील्ड एरिया में कई फीट नीचे से मिट्टी निकाली, जो गीली मिली। इससे प्रथमदृष्टया यही सामने आ रहा है कि मिट्टी और गिट्टी की लेबलिंग में लापरवाही से बारिश का पानी सड़क के भीतर काफी नीचे तक चला गया। मिट्टी की पटान ठीक से नहीं की गई थी।

एक्सप्रेस-वे का ड्रेनेज सिस्टम मिला गड़बड़

इसके साथ ही एक्सप्रेस-वे के ड्रेनेज सिस्टम भी गड़बड़ मिले हैं, जिसकी वजह से पानी बाहर निकलने के बजाए सड़क में ही आ रहा था। लिहाजा जैसे ही गाड़ियां एक्सप्रेस-वे से निकलीं तो सड़क नीचे दबने से टूट गई। संयुक्त टीम के सदस्यों ने करीब चार घंटे से अधिक समय तक एक्सप्रेस-वे के अप और डाउन रूट पर सफर कर बारीकी से निरीक्षण किया और नमूने लेने के साथ ही फोटोग्राफ भी लिए हैं। वहीं, पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजी सूचना में दावा किया है कि उनकी ओर से परियोजना के निर्माण में सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है।

कहीं अधिक घुमाव तो कहीं मिला स्लोप

टीम को लीड कर रहे आईआईटी खड़गपुर के प्रफेसर केएस रेड्डी ने सभी बिंदुओं पर जांच की। जांच में सामने आया कि लखनऊ से कानपुर जाते वक्त एक्सप्रेस-वे पर घुमाव अधिक है। इस पर एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रफेसर को बताया कि नीचे से नदी निकली है, इसलिए घुमाव देना पड़ा है। वहीं, कानपुर से लखनऊ आने वाले एक्सप्रेस-वे पर स्लोप अधिक होने से भी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, टीम अभी चार-पांच दिन संयुक्त रूप से एक्सप्रेस-वे की जांच करेगी।

स्थलीय निरीक्षण से तैयार होगी रिपोर्ट

एक्सप्रेस-वे की जांच करने वाली टीम ने नमूने जांच के लिए भेजने शुरू कर दिए है। इसके साथ ही स्थलीय निरीक्षण कर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और स्थलीय रिपोर्ट के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। अभी इसमें वक्त लगेगा।

लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें

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