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सहारनपुर: मस्जिद पक्ष को HC से बड़ी राहत, 3 हफ्ते में मांगा एफिडेविट

सहारनपुर: मस्जिद पक्ष को HC से बड़ी राहत, 3 हफ्ते में मांगा एफिडेविट इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से एफिडेविट मांगा है और साथ ही मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए 6 करोड़ रुपये…

ABP News के अनुसार11 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
सहारनपुर: मस्जिद पक्ष को HC से बड़ी राहत, 3 हफ्ते में मांगा एफिडेविट

सौजन्य से:- ABP News

सहारनपुर: मस्जिद पक्ष को HC से बड़ी राहत, 3 हफ्ते में मांगा एफिडेविट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से एफिडेविट मांगा है और साथ ही मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए 6 करोड़ रुपये हर्जाने पर अंतरिम रोक लगा दी है.

सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया. गाई कोर्ट ने यूपी सरकार से काउंटर एफिडेविट मांगा है, जिसके लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया है. कोर्ट ने नगर मजिस्ट्रेट सहारनपुर द्वारा मस्जिद पर 6 करोड़ 41 लाख का हर्जाना लगाने पर अंतिम रोक लगाई है.

जानकारी के मुताबिक, हाई कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 2 को नोटिस जारी किया है. इस मामले में 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी. बात दें, याचीका मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से दाखिल की गई है, जिसपर जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई की.

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भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर अहमद द्वारा दायर इस याचिका में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट द्वारा 16 जुलाई, 2026 को जारी आदेश और सहारनपुर के जिला न्यायाधीश द्वारा दो सितंबर, 2026 को जारी आदेश को चुनौती दी गई है. इस रिट याचिका में सहारनपुर के जिला मजिस्ट्रेट के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार और कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के मौलवी अब्दुल हमीद को प्रतिवादी पक्षकार बनाया गया है.

याचिका में लगे क्या आरोप?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारियों द्वारा पारित आदेश उनके न्याय एवं अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं. सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई, 2026 को पारित आदेश के तहत परिसर खाली करने और 6.41 करोड़ रुपये जुर्माना भरने का आदेश पारित किया था.

नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी जिसे जिला न्यायाधीश द्वारा दो सितंबर, 2026 को खारिज कर दिया गया. जिला न्यायाधीश के आदेश के बाद अधिकारियों ने पांच सितंबर को सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद को वहां से हटा दिया था.

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