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Dainik Bhaskar के अनुसार26 अगस्त 2026 को 12:56 am बजे
जिन बदमाशों की निगरानी की, उनके नाम पर लोन लिया:  दुबई में भी ठगी की, जानिए गोरखपुर के शातिर सिपाही की कहानी - Gorakhpur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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जिन बदमाशों की निगरानी की, उनके नाम पर लोन लिया:दुबई में भी ठगी की, जानिए गोरखपुर के शातिर सिपाही की कहानी

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गोरखपुर में आरोपी सिपाही नीतीश कुमार यादव से पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सिपाही ने पुलिस सत्यापन के नाम पर 15 शातिर अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और गैंगस्टरों के आधार-पैन हासिल कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके नाम पर तीन से पांच लाख रुपये तक के व्यक्तिगत लोन कराने की बात बताई है।

इनमें महराजगंज का जिला बदर अपराधी अजय साहनी भी शामिल है। उसके नाम पर पांच लाख रुपये का लोन लिए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही दुबई में हवाला कारोबार से जुड़े होने की आशंका जाहिर की जा रही है। सिपाही ने दुबई में भी ठगी की है। पुलिस इसका पता लगा रही है।

शार्टकट अमीर बनना चाहता था

जांच में सिपाही के बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपये का लेनदेन मिला है। करीब 1.10 लाख रुपये ईएमआई चुकाने के बाद भी उस पर लोन और उधारी मिलाकर करीब 80 लाख रुपये का बोझ हो गया था। पुलिस के मुताबिक जुए की लत के कारण रकम गंवाने के बाद वह दिसंबर 2024 में फरार हो गया था। वह अरबपति बनना चाहता था। इसलिए उल्टे सीधे काम करता रहता था।

लुकआउट नोटिस पर पकड़ा गया

दो साल से फरार 25 हजार का इनामी सिपाही दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। एसएसपी ने लुक आउट नोटिस जारी किया था। पुलिस के मुताबिक, रविवार को वह दुबई की फ्लाइट से दिल्ली में उतरा। इस दौरान वहां मौजूद एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर गोरखपुर पुलिस को सूचना दी। जिले की कैंट पुलिस दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर आरोपी सिपाही को मंगलवार को गोरखपुर लेकर आई। यहां पूछताछ के बाद उसे जेल भिजवा दिया गया।

भागते समय किया था सुसाइड की कोशिश

पूछताछ में सिपाही ने बताया कि फरारी के दौरान सबसे पहले वह सोनौली बॉर्डर पहुंचा। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उसने अपना मोबाइल तोड़ दिया। इसके बाद बुखार की 60 गोलियां खाकर जान देने की कोशिश की। हालांकि उसकी जान बच गई। इसके बाद उसने लखनऊ निवासी एक दोस्त से संपर्क किया और वहां काम की तलाश में पहुंचा। कुछ दिन गत्ता उठाने का काम किया, जिसके बदले उसे प्रतिदिन 100 रुपये मिलते थे।

लखनऊ से पटना, फिर कोलकाता और दुबई सिपाही के मुताबिक लखनऊ में कुछ दिन रहने के बाद वह पटना और फिर कोलकाता गया। वहां गूगल के जरिये उसे दुबई में बाइक राइडर की नौकरी की जानकारी मिली। एजेंट के माध्यम से करीब 75 हजार रुपये खर्च कर मई 2025 में दुबई चला गया। उस समय उसके पास महज पांच हजार रुपये थे। वीजा नहीं होने के कारण वहां कुछ दिन छिपकर रहने का दावा किया। बाद में एजेंट के जरिये वर्किंग वीजा मिलने पर काम शुरू करने की बात बताई।

हादसे के बाद बहन से किया संपर्क

पूछताछ में सिपाही ने बताया कि करीब दो महीने पहले दुबई में हादसे का शिकार हो गया था। इसके बाद उसने दिल्ली में रहने वाली बहन से संपर्क किया। रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। दुबई में भी फ्रॉड की आशंका पुलिस को सिपाही के चेहरे और हाव-भाव से उसकी कहानी में कई बातें संदिग्ध लग रही हैं। पुलिस को आशंका है कि दुबई में वह हवाला कारोबार से जुड़ा हो सकता है। वहां भी उसके किसी फ्रॉड में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस इन बिंदुओं पर भी जांच कर रही है। अब उसके विदेश में संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और भारत से दुबई जाने के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

देवरिया में घर, आजमगढ़ में पहली तैनाती

आरोपी सिपाही की पहचान देवरिया के भाटपाररानी थाना क्षेत्र के जोगउर गांव निवासी नीतीश यादव (33) के रूप में हुई। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि 2019 बैच का सिपाही पीएसी आजमगढ़ के 20वीं बटालियन में भर्ती हुआ था। वहां से उसकाे पुलिस में भेजा गया। पहली तैनाती 2023 में महराजगंज में हुई थी। महराजगंज पुलिस में तैनात रहते हुए नीतीश यादव ने बैंक ऑफ बड़ौदा की गोरखपुर की बेतियाहाता, गोलघर मुख्य शाखा और मेडिकल कॉलेज रोड शाखा से फर्जीवाड़ा कर लोन कराया था।

इस तरह किया फ्राॅड

उत्तर प्रदेश पुलिस और बैंक के बीच MOU का दुरुपयोग कर फर्जी पुलिस आई कार्ड, सैलरी स्लिप, फार्म-16, बैंक स्टेटमेंट, कर्मचारी सत्यापन रिपोर्ट जैसे कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद अपने साथी प्रमोद कुमार यादव, संदीप कुमार यादव, लक्ष्मीकान्त यादव, अजय साहनी, संदीप अग्रहरि के नाम पर PSP बचत खाता खुलवाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पर्सलन लोन प्राप्त कर लिया। हर महीने 1 लाख से अधिक की किश्त आती थी। दो से तीन महीने तक वह किश्त जमा कर पाया। इसके बाद वह साल 2024 दिसंबर माह में महराजगंज पुलिस लाइन से भाग गया।

महराजगंज के कोतवाली थाने में दर्ज हुआ था केस

काफी ढूंढने के बाद भी जब उसका कहीं पता नहीं चला। तब बैंक ऑफ बड़ौदा के उप क्षेत्रीय प्रमुख आशीष सिंह ने महराजगंज के कोतवाली थाने में आरोपी सिपाही नीतीश यादव के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर कराई। थी।

उप क्षेत्रीय प्रमुख ने बताया कि आरोपी सिपाही नीतीश यादव मेडिकल कॉलेज की शाखा से 5 लाख, गोलघर शाखा से 23 लाख, बेतियाहाता शाखा से 11.70 लाख समेत कुल 39 लाख 70 हजार रुपये फर्जीवाड़ा कर लोन कराया था। बाद में यह केस गोरखपुर कैंट थाने में ट्रांसफर हो गया था।

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