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योगी बोले- अखिलेश जन्मदिन पर बर्मिंघम से रथ मंगाते थे: सैफई महोत्सव में जो पैसे उड़ाए, उनसे बच्चों का भविष्य सुधर जाता - Gorakhpur News

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bhaskar.com के अनुसार7 सितंबर 2026 को 12:31 am बजे
योगी बोले- अखिलेश जन्मदिन पर बर्मिंघम से रथ मंगाते थे:  सैफई महोत्सव में जो पैसे उड़ाए, उनसे बच्चों का भविष्य सुधर जाता - Gorakhpur News

सौजन्य से:- bhaskar.com

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योगी बोले- अखिलेश जन्मदिन पर बर्मिंघम से रथ मंगाते थे:सैफई महोत्सव में जो पैसे उड़ाए, उनसे बच्चों का भविष्य सुधर जाता

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गोरखपुर में शनिवार को सीएम योगी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा। कहा- जन्मदिन पर जितने में बर्मिंघम से रथ मंगवाते थे, जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उतने में तो शिक्षा व्यवस्था ही बदल जाती। बच्चों का भविष्य सुधर जाता। ये सिर्फ प्रश्न खड़ा कर सकते हैं।

सीएम ने कहा- 2017 से पहले ठेके पर नकल होती थी। बदनाम शिक्षा व्यवस्था होती थी। पहचान का संकट हमारे युवाओं के सामने आता था। यूपी को शक की नजरों से देखा जाता था। भारत में सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कटघरे में खड़ा होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

सीएम ने शिक्षक दिवस पर 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। प्रोटोकॉल से अलग हटकर सभी को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। कहा- मुझे बताया गया था कि सिर्फ 10 शिक्षक ही मंच पर आएंगे। लेकिन, सभी शिक्षक दूर-दूर से आए हैं, इसलिए सभी को बुलाया।

योगी की 2 बड़ी बातें पढ़िए-

1- AI संस्कार नहीं दे सकता, यह तो शिक्षक ही दे सकता है

बहुत सारे लोग सवाल पूछते हैं कि तकनीक आएगी, तो क्या शिक्षक रह पाएंगे? उसका जवाब आसान है- आपकी जगह कोई नहीं ले सकता। मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन प्रश्न करना नहीं सिखाती। प्रश्न पूछना तो केवल शिक्षक सिखाता है।

AI संस्कार नहीं दे सकता, यह तो शिक्षक ही दे सकता है। कांग्रेस को लगभग 6 दशक तक यूपी में शासन करने का मौका मिला था, तब वे कुछ नहीं कर पाए। लेकिन, वही लोग आज एक बार फिर आप पर सवाल खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं।

2- पहले बिजली नहीं आती थी, ये लोग अंधेरे में जमीन कब्जाते थे

पहले एक हफ्ते रात, तो एक हफ्ते दिन में बिजली आती थी। अब स्कूल रात में तो चल नहीं सकते। ये बात कुछ लोगों को समझ नहीं आ सकती, क्योंकि वो लोग अंधेरे में रहने के आदी थे। अंधेरे में ही जमीनों पर कब्जा करते थे। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में डाका डालते थे।

सम्मानित होने वाले शिक्षकों की नौकरी 2 साल बढ़ी

सम्मानित होने वाले 81 शिक्षकों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल हैं। इनमें 33 महिला शिक्षिकाएं भी हैं। इन शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र भी 2 साल बढ़ा दी गई है। अब ये रोडवेज बसों में मुफ्त सफर भी कर सकेंगे।

शिक्षक सम्मान समारोह कार्यक्रम से जुड़े अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

अपडेट्स

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गोरखपुर से पहुंचीं शिक्षिका अंकिता सिंह ने कहा- आज का दिन मेरे लिए यादगार बन गया है। खास बात यह है कि आज ही के दिन मैंने शिक्षक की नौकरी शुरू की थी और आज मेरे करियर के 8 साल पूरे हो गए हैं। बच्चों को नवाचार और नई तकनीक से जोड़ना उनके भविष्य को और बेहतर बनाने में मदद करता है।

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वाराणसी से पहुंचीं शिक्षिका नीलम ने कहा- बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने बच्चों के लिए जितने भी नवाचार किए हैं, आज वे सफल होते दिखाई दे रहे हैं। यह सम्मान सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे सभी बच्चों और पूरे विद्यालय परिवार के लिए है।

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लखनऊ से पहुंचीं शिक्षिका विनीता ने कहा- आज शिक्षक दिवस मेरे लिए काफी खास बन गया है। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। यह सम्मान भविष्य में बेहतर काम करने और बच्चों के भविष्य को संवारने में मेरे लिए काफी मददगार रहेगा।

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लखीमपुर खीरी से आए शिक्षक प्रमोद कुमार ने कहा- आज शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मान पत्र मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। वह भी मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मान मिलना वाकई बहुत बड़ी बात है। आज मैं यहां से अपने घर गर्व के साथ जाऊंगा। बहुत अच्छा लग रहा है कि जिस ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से मैंने अपना काम किया, आज उसी का फल मुझे मिल रहा है।

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सीएम ने कहा कि बेसिक शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रदेश में 2,100 से अधिक विद्यालयों के भवन अच्छे बनाए गए हैं। यह काम 2017 से पहले भी हो सकता था। जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसके कुछ हिस्से में शिक्षा व्यवस्था बदल जाती। जितने में बर्मिंघम से रथ मंगाते थे, उतने में बच्चों का भविष्य बनता। लेकिन नहीं, जो लोग कर नहीं सकते, वे प्रश्न खड़ा करते हैं और यही हुआ।

आज उत्तर प्रदेश का मॉडल पूरा देश देख रहा है। इसलिए हमने तय किया है कि शिक्षा का यह मॉडल मजबूती से आगे बढ़ेगा।

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सीएम योगी ने कहा कि अब कक्षा पांच तक ‘निपुण अभियान’ चलाया जाएगा। 2017 से पहले बच्चों को अक्षर ज्ञान तक नहीं था। जिस बच्चे को अक्षर और अंकों का ज्ञान नहीं होगा, वह गणित और विज्ञान कैसे पढ़ेगा और वाक्य का अर्थ कैसे समझेगा?

इसका परिणाम यह था कि विद्यालय नकल के अड्डे बन गए थे। ठेके पर नकल होती थी और दूर-दराज के दूसरे राज्यों से छात्र यहां परीक्षा देने आते थे। परीक्षा के नाम पर ठेके चलते थे और किसी परीक्षार्थी की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देता था। मैंने ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाने के निर्देश दिए और भविष्य में ऐसे विद्यालयों को केंद्र बनाना बंद कर दिया गया।

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सीएम योगी ने कहा कि पहली बार शिक्षकों को सोशल सिक्योरिटी की गारंटी दी गई है, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में शिक्षक का परिवार खुद को अकेला महसूस न करे। यह भी शिक्षक के सम्मान का हिस्सा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और इसके लिए बेहतर माहौल बने, सरकार ने इस दिशा में कई काम किए हैं।

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सीएम योगी ने कहा कि 2017 में शिक्षा मित्रों का मानदेय 3 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार रुपये हो गया है। अनुदेशकों का मानदेय भी 17 हजार रुपये है। इसके साथ ही शिक्षकों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी दी गई है। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों की संख्या करीब 15 लाख है। शिक्षणेत्तर कर्मियों को जोड़ने पर यह संख्या और बड़ी हो जाएगी। सरकार सभी शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मियों और उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दे रही है।

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सीएम ने कहा- हमने कभी शिक्षा को व्यापार नहीं होने दिया। गुरुकुल में अपनी शिक्षा पूरी होने पर शिष्य तो अपने सामर्थ्य भी दक्षिणा देता था। गुरु उससे संतुष्ट होता था और उसे आगे बढ़ने का आशीर्वाद देता है। गुरु की सबसे बड़ी दक्षिणा क्या है। शिष्य संस्कारी हो और योग्य हो। इसी परंपरा ने भारत को दुनिया में ज्ञान की भूमि रूप में प्रस्तुत किया है।

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सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले ठेके पर नकल होती थी। शिक्षा व्यवस्था बदहाल थी और युवाओं के सामने पहचान का संकट था। यूपी पर सवाल खड़े होते थे और भारत की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कटघरे में खड़ा होता था।

उन्होंने कहा कि आज हालात बदल गए हैं। अब जब आप बाहर जाते हैं और बताते हैं कि आप उत्तर प्रदेश से हैं, तो सामने वाला व्यक्ति सम्मान के साथ आपका अभिवादन करता है। इस परिवर्तन के वाहक आप शिक्षक हैं।

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सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। आपने पिछले साढ़े 9 साल में उत्तर प्रदेश को बदलते देखा है। 2017 से पहले प्रदेश में कर्फ्यू और दंगे आम बात थे। कल पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी का आयोजन हुआ। मंदिरों, पुलिस लाइनों, जेलों, गांवों और मोहल्लों में कार्यक्रम हुए, लेकिन कहीं कर्फ्यू या दंगे की बात सुनने को नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि पहले उत्सव से पहले उपद्रव होता था। ऐसी अराजकता के बीच स्कूल-कॉलेज कैसे चल सकते थे? पहले सुरक्षा का संकट था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब उत्सव से पहले कोई उपद्रव नहीं कर सकता। प्रदेश में शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी कोई सवाल खड़ा नहीं करता।

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सीएम योगी ने कहा- मुझे बताया गया था कि सिर्फ 10 ही शिक्षक मंच पर आएंगे। मैंने सभी 81 शिक्षकों को मंच पर बुलाया क्योंकि मैं जानता था वे दूर-दूर से आए हैं। कोई मेरठ तो कोई हमीरपुर और महोबा से आए हैं। ठीक है वो बच्चों को संस्कारित करते हैं तो वह खुद भी संस्कारित हैं। वो बोले भले ही न, लेकिन भाव तो उनके भी हैं। मेरा समय भले ही लगा, लेकिम मैंने सभी को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया है। आपकी उपस्थित, आपका उत्साह इस समारोह को एक नई प्रेरणा प्रदान कर रहा है।

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सीएम योगी ने कहा- मैंने यह कार्यक्रम गोरखपुर में इसलिए रखा, क्योंकि कल जन्माष्टमी थी। कल मैं मथुरा में था। इसके बाद लखनऊ होते हुए देर रात गोरखपुर पहुंचा। यहां से मुझे दूसरे कार्यक्रम में जाना था। इस बीच आप लोगों से मिलने का मौका मिला, इसलिए मैंने आप सभी को यहां बुलाया।

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योगी ने कहा- शिक्षा के महत्व को भारत ने प्राचीन काल से ही बहुत अच्छे ढंग से रेखांकित किया है। अलग-अलग कालखंड में इसे अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत करने का कार्य हुआ। भारत का मानना रहा है कि कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त और समर्थ हो सकता है, जब उस राष्ट्र की भावनाओं के अनुरूप शिक्षा और संस्कार बचपन और युवा पीढ़ी को मिलें। यह महत्वपूर्ण कार्य एक शिक्षक ही कर सकता है।

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योगी ने कहा कि मां सरस्वती की पूजा वसंत पंचमी के अवसर पर भारत में ही होती है। गुरु पूर्णिमा का पर्व भी भारत में ही मनाया जाता है। शिक्षक दिवस हर शिक्षक को भारत की इस विशिष्ट ज्ञान परंपरा से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

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सीएम योगी ने शिक्षक दिवस पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि भारत दुनिया का वह देश है, जो सृष्टि के आदिकाल से ही ज्ञान का उपासक रहा है। समय के साथ ज्ञान की इस विशिष्ट उपासना का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन भारत ने ज्ञान की इस धरोहर और उसे आगे बढ़ाने वाली विशिष्ट परंपरा को हमेशा मान्यता दी है।

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शिक्षकों को सम्मानित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ। साथ में मंच पर उनके साथ मौजूद हैं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद, एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी सहित अन्य लोग।

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माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में किसी भी तरह की नकल या पेपर लीक नहीं हुआ है। परीक्षा के दौरान पूरा शिक्षा विभाग और अधिकारी तनावमुक्त होकर एकाग्रता से काम करते हैं और बच्चों के भविष्य पर किसी तरह की आंच नहीं आने देते। बच्चों का जीवन बदलने वाले शिक्षकों को अपने जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए।

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बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा- शिक्षा हमारी सरकार की प्राथमिकता है। आलोचना करने वालों से न हम कभी झुके थे और न कभी झुकेंगे। हम अपनी दूरदर्शी सोच के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।

अच्छे-अच्छे संस्थानों के शिक्षक भी हमारे शिक्षकों के आगे नहीं टिक पाएंगे। 2017 से पहले शिक्षा राजनीति का माध्यम बनी हुई थी। यह केवल सरकार के एजेंडे में होती थी, लेकिन काम नहीं होता था। बेसिक शिक्षा विभाग की पहले क्या दुर्गति थी, यह किसी से छिपी नहीं है। लेकिन 2017 के बाद इसमें बदलाव हुआ है।

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बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, “शिक्षकों के सम्मान और उनके कल्याण के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। हमारा मानना है कि जब तक शिक्षक का सम्मान नहीं होगा, तब तक वह अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकता। पिछले साल मुख्यमंत्री जी ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों समेत अन्य शिक्षकों की मांगों को पूरा किया है। आज हमारी सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर वह काम कर रही है, जिससे वे सशक्त बन सकें।

हमने हर स्कूल को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा है। आज एआई आधारित शिक्षा की जरूरत है और हमने इसे स्कूलों तक पहुंचाने का काम किया है। शिक्षा वह माध्यम है, जिससे हम पूरी दुनिया को बदल सकते हैं, लेकिन कुछ लोग शिक्षा को राजनीति का माध्यम मानते हैं। किसी पर उंगली उठाना आसान होता है, लेकिन बदलाव का माध्यम बनना मुश्किल होता है।

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गाजियाबाद के विजय नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की 63 वर्षीय विज्ञान शिक्षिका डॉ. रेनू त्रिपाठी को भी आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मानित होंगी।

उन्होंने विज्ञान जैसे कठिन विषय को सरल व प्रयोगात्मक बनाने के लिए स्मार्ट बोर्ड, PPT, टीचिंग-लर्निंग मटीरियल और स्कूल के बॉटनिकल गार्डन का इस्तेमाल किया। पारंपरिक शिक्षण के साथ-साथ खुद को तकनीक से जोड़ते हुए वह इस उम्र में भी YouTube, ऑनलाइन प्रेजेंटेशन और डिजिटल माध्यमों से छात्राओं को पढ़ा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने विज्ञान विषय पर 12 किताबें लिखी हैं और कई रिसर्च पेपर भी तैयार किए हैं।

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बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज के कला शिक्षक डॉ. इफ्तेखार खां भी आज राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक–2026 सम्मान ग्रहण करेंगे।

डॉ. खां के पढ़ाने का तरीका अनूठा है। वह बच्चों को केवल किताबों या कॉपियों तक सीमित रखने के बजाय प्रकृति से जोड़कर पढ़ाते हैं। विद्यालय परिसर के पेड़-पौधों और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को ही वह शिक्षा का माध्यम बनाते हैं। उनकी कार्यशैली 'लर्निंग बाय डूइंग' पर आधारित है।

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कौशांबी के कम्पोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा में कार्यरत शालिनी कुशवाहा को आज राष्ट्रपति के हाथों 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' मिलेगा।

अंग्रेजी से एमए करने वाली शालिनी की कक्षा का नियम अलग है। वह कठिन पाठ्यक्रम या गणित के सवालों को कभी 'मुश्किल' नहीं कहतीं, बल्कि "आओ, आज नया खेल खेलते हैं" कहकर पढ़ाना शुरू करती हैं।

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सीएम योगी योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह पहुंचे। यहां उन्होंने महिलाओं की गोदभराई कराई और बच्चों को खिलौने दिए। सीएम बच्चों की ओर से लगाए गए स्टॉल पर भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों से उनके प्रोडक्ट और नवाचार के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी मौजूद रहे।

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गोरखनाथ मंदिर में सुबह भ्रमण के दौरान सीएम योगी गोशाला पहुंचे। उन्होंने गायों की सेवा की और उन्हें गुड़ व रोटी खिलाई।

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गोरखनाथ मंदिर में शनिवार सुबह भ्रमण के दौरान सीएम योगी बच्चों से मिले। उन्होंने बच्चों को दुलारा, उनके साथ फोटो खिंचवाई और चॉकलेट व खिलौने भी दिए।

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राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले तीनों शिक्षकों को : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में रजत पदक, खुद के हस्ताक्षरयुक्त मेरिट सर्टिफिकेट और 50 हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान करेंगी। बाद में इन शिक्षकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने और संवाद करने का अवसर भी मिलेगा।

राज्य पुरस्कार पाने वाले 81 शिक्षकों को : प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और ₹25,000 की सम्मान राशि मिलेगी। साथ ही दो साल का सेवा विस्तार भी मिलेगा। इन्हें आजीवन हर साल उत्तर प्रदेश रोडवेज बस में 4,000 किलोमीटर तक की नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।

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डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह : प्रधानाचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लखीमपुर खीरी

विक्रम बहादुर सिंह परिहार : प्रधानाचार्य, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, प्रयागराज

कल्पना सिंह : प्रधानाचार्य, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झांसी

डॉ. आनन्द कुमार : मानविकी अध्यापक, महर्षि दयानन्द विद्यापीठ इंटरमीडिएट कॉलेज, गोविंदपुरम, गाजियाबाद

विजय पाल : कला अध्यापक, जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बरेली

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आगरा: संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली)

अलीगढ़: अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद 1-8)

अम्बेडकर नगर: राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय नसीरपुर छितौना)

अमरोहा: गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय चौबारा)

अयोध्या: पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ठेउँगा)

आजमगढ़: प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर)

बहराइच: प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय बेलवापदम)

बलिया: अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय इब्राहीमाबाद)

बलरामपुर: सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श)

बाराबंकी: राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता)

भदोही: उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर)

बिजनौर: रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोईया)

बदायूं: किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय रिसौली)

बुलन्दशहर: जूली मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना)

चंदौली: उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर)

चित्रकूट: हरीशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा)

एटा: ओमबीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय 1-8 पिदौरा)

इटावा: वीरेन्द्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा)

फर्रूखाबाद: गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद)

फ़तेहपुर: आनन्द कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर)

गौतमबुद्ध नगर: अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर)

गाजियाबाद: ज्योत्सना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी)

गाजीपुर: सन्तोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कन्या मनिहारी)

गोण्डा: सुनीत मित्र पाण्डेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला)

गोरखपुर: नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पी एम श्री कंपोजिट विद्यालय उनवल प्रथम)

हमीरपुर: नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चुनकी का डेरा)

हापुड़: शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा)

हरदोई: विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर)

हाथरस: पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी)

जौनपुर: संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियाँव)

झांसी: प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका)

कन्नौज: सुमन लता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुँवरपुर बनवारी)

कानपुर देहात: विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता)

कानपुर नगर: डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरौताहरपुर)

कासगंज: धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला)

कौशांबी: सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर)

लखीमपुर खीरी: प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया)

ललितपुर: प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड)

लखनऊ: विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू)

महाराजगंज: राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव)

महोबा: ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट बिलखी)

मैनपुरी: सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली)

मऊ: अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर)

मेरठ: प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय हर्रा)

मिर्जापुर: दयानन्द मिश्र (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धी)

मुरादाबाद: सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां गौड)

पीलीभीत: सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु)

मुजफ्फरनगर: आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़)

प्रतापगढ़: डॉ. देवेन्द्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना)

प्रयागराज: राम लखन मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसा)

रामपुर: वैलेन्टीना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमद नगर)

संभल: बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर)

शाहजहांपुर: अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा)

शामली: दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू -1)

श्रावस्ती: अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी)

सिद्धार्थनगर: महेश कुमार (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बूडा)

सीतापुर: अतुल शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अडवेनिया ग्रांट)

सोनभद्र: मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह)

सुल्तानपुर: सत्येंद्र कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय साढ़ापुर)

उन्नाव: प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज)

वाराणसी: नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मण्डुआडीह)

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