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गोरखपुर: देर से स्कूल पहुंची छात्रा को 'मुर्गा' बनाया तो उसके पिता ने प्रिंसिपल को पीटा, कपड़े फाड़े

गोरखपुर के एक स्कूल में छात्रा को देर से आने पर सजा के तौर पर मुर्गा बनाया गया तो उसका पिता इतना तमतमा गया कि उसने स्कूल के प्रिंसिपल के सात मारपीट कर दी। इसके बाद वह फरार हो गया। पुलिस उसे तलाश रही है। प्रमोद पाल, गोरखप…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार5 सितंबर 2026 को 10:31 am बजे
गोरखपुर: देर से स्कूल पहुंची छात्रा को 'मुर्गा' बनाया तो उसके पिता ने प्रिंसिपल को पीटा, कपड़े फाड़े

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

गोरखपुर के एक स्कूल में छात्रा को देर से आने पर सजा के तौर पर मुर्गा बनाया गया तो उसका पिता इतना तमतमा गया कि उसने स्कूल के प्रिंसिपल के सात मारपीट कर दी। इसके बाद वह फरार हो गया। पुलिस उसे तलाश रही है।

प्रमोद पाल, गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा को देर से स्कूल आने पर प्रिंसिपल ने मुर्गा बनने की सजा दी तो छात्रा के नाराज पिता ने अगले दिन स्कूल परिसर में घुसकर प्रिंसिपल के साथ मारपीट और गाली गलौज की। उसने प्रिंसिपल के कपड़े भी फाड़ दिए। स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

गोला थाना क्षेत्र के खिरकिटा दुबे में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छठवीं की एक छात्रा एक सितंबर को स्कूल देर से पहुंची। अनुशासनहीनता के कारण प्रिंसिपल जितेंद्र कुमार ने छात्रा को 5 मिनट तक मुर्गा बनने की सजा दी। इसके बाद छात्रा क्लास में चली गई। छुट्टी होने के पश्चात वह घर पहुंची और उसने अपने पिता दिलीप

कुमार को यह सारी बातें बताईं।

आरोपी दिलीप ने प्रिंसिपल के कपड़े फाड़े

आरोप है कि 3 सितंबर को छात्रा का पिता दिलीप कुमार स्कूल पहुंचा और प्रिंसिपल से सजा देने का कारण पूछा। प्रिंसिपल ने उसे पूरी बात बताई। आरोप है कि इसके बावजूद छात्रा का पिता गाली गलौज के साथ मारपीट करने लगा। उसने आसपास मौजूद सामान भी फेंक दिया। उपस्थित स्टाफ ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान उसने प्रिंसिपल के कपड़े भी फाड़ दिए।

स्कूल ने आरोपी को नहीं दिया था पेंटिंग का ठेका

किसी तरह लोगों के हस्तक्षेप के बाद उसे स्कूल से बाहर निकाला गया। इसकी सूचना स्थानीय पुलिस थाने में दी गई। प्रिंसिपल की तहरीर में आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। अब पुलिस आरोपी दिलीप कुमार के घर पर दबिश दे रही है। फिलहाल वह फरार है। दिलीप पेंट पॉलिश का काम करता है। स्कूल स्टाफ के लोगों का कहना है कि वह कुछ दिनों पहले पेंट पॉलिश का ठेका लेने स्कूल में आया था। लेकिन मानक के अनुरूप बात न हो पाने की वजह से उसे ठेका नहीं मिला था। आशंका जताई जा रही है कि इस बात की भी खुन्नस उसके मन में थी।

गोला थाना प्रभारी चंद्र प्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रिंसिपल जितेंद्र कुमार की तहरीर पर आरोपी दिलीप कुमार के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उसकी तलाश की जा रही है। फिलहाल वह फरार है, जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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