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वाराणसी में चेतावनी बिंदु से तीन सेमी ऊपर पहुंचकर गंगा का जलस्तर स्थिर, गोमती सह‍ित वरुणा और नाद नदी में भी उफान - ganga water level stable reaching three cm above warning point in varanasi surges in varuna and nad rivers including gomati

वाराणसी में चेतावनी बिंदु से तीन सेमी ऊपर पहुंचकर गंगा का जलस्तर स्थिर, गोमती सहित वरुणा और नाद नदी में भी उफान वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर स्थिर है, लेकिन वरुणा, गोमती और नाद नदियों में भी उफान ...और…

Jagran के अनुसार2 सितंबर 2026 को 12:31 am बजे
वाराणसी में चेतावनी बिंदु से तीन सेमी ऊपर पहुंचकर गंगा का जलस्तर स्थिर, गोमती सह‍ित वरुणा और नाद नदी में भी उफान - ganga water level stable reaching three cm above warning point in varanasi surges in varuna and nad rivers including gomati

सौजन्य से:- Jagran

वाराणसी में चेतावनी बिंदु से तीन सेमी ऊपर पहुंचकर गंगा का जलस्तर स्थिर, गोमती सहित वरुणा और नाद नदी में भी उफान

वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर स्थिर है, लेकिन वरुणा, गोमती और नाद नदियों में भी उफान ...और पढ़ें

HighLights

- गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर, स्थिति गंभीर बनी हुई।

- वरुणा, गोमती, नाद नदियों में उफान से बाढ़ का कहर।

- निचले इलाकों में पानी घुसा, फसलें डूबीं, प्रशासन अलर्ट पर।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। चेतावनी बिंदु को पार करने के बाद काशी में गंगा का जलस्तर तीन सेमी ऊपर पहुंचकर लगभग स्थिर हो चला था। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे के बीच आठ घंटों में जलस्तर में महज दो सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। फिर भी बाढ़ के चलते स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं।

अपने सभी घाटों, किनारे के मंदिरों को डुबोती हुई गंगा अब गलियों और सड़कों पर बहने लगी हैं। वरुणा में पलट प्रवाह से अनेक मुहल्लों के घरों मेें पानी घुस गया है तो चौबेपुर, चिरईगांव आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अनेक गांव पानी से घिर गए हैं, उनके संपर्क भंग हो गए हैं तो इधर शहर में मणिकर्णिका घाट की छत और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह किया जा रहा है। घाटों के किनारें फूल-माला, चाय-पान व पूजन सामग्री आदि की रेहड़ी लगाने वालों की आजीविका पर संकट आ गया है।

राजघाट पर शाम चार बजे तक गंगा राजघाट पर 70.29 मीटर पर बह रही थीं। यहां चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है, फिलहाल जलस्तर स्थिर है लेकिन बहाव तेज बना हुआ है। वरुणा नदी में पलट प्रवाह से निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है।

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जल पुलिस निरीक्षक सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर गंगा में सभी नावों का संचालन बंद कर दिया गया है। जल पुलिस की टीम निगरानी कर रही है। श्रद्धालुओं से घाटों और तेज बहाव में न जाने की अपील की जा रही है। एसीपी दशाश्वमेध डा. अतुल अंजान त्रिपाठी ड्रोन से बाढ़ के हालात पर नजर बनाए हुए हैं, घाटों पर पुलिस तैनात है।

नाले के सहारे वरुणा का पानी घरों में घुसा, लोगों ने ली अन्यत्र शरण

वरुणा नदी में गंगा के पलट प्रवाह से जलस्तर दूसरी बार बढ़ गया है। वरुणा नदी से जुड़े नालों के सहारे बाढ़ का पानी सलारपुर, पुराना पुल पुलकोहना इलाके में दर्जनों मकानों में घुस चुका है। लोग मकान खाली कर दूरी जगहों पर शरण लिए हैं। वहीं दूसरी तरफ नाला के सहारे सलारपुर रेलवे लाइन के किनारे इलाकों में राजेश, सुभाष, विजय, राजकुमार के घरों सहित आधा दर्जन से अधिक मकानों में लगभग सात फीट तक बाढ़ का पानी मकानों में भर गया है। पुराना पुल छोटी मस्जिद के पास पुलकोहना क्षेत्र में नाले से सटे कुतुबुद्दीन, अकरम, जवाहर लाल सहित दो दर्जन मकानों में बाढ़ का पानी लगभग छह फीट तक पहुंच गया है। यही स्थिति दनियालपुर, पंचक्रोशी, रुप्पनपुर आदि क्षेत्रों मे भी है।

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सलारपुर बाढ़ राहत शिविर में 30 परिवार

सारनाथ क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोग सारनाथ के सलारपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में बने बाढ़ राहत शिविर में मंगलवार को 30 परिवारों के 108 सदस्य हैं। राजस्व निरीक्षक केके सिंह ने बताया कि शिविर में 108 सदस्य है जिन्हें समय समय पर नाश्ता, भोजन, चाय दिया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य कैंप भी लगा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा, ली सुविधाओं की जानकारी

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने मंगलवार को नमो घाट से एनडीआरएफ की नाव से गंगा एवं वरुणा नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों से वार्ता कर उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि दैवी आपदा की इस घड़ी में प्रशासन हर समय उनके साथ है।

पुलिस आयुक्त एवं जिलाधिकारी गंगा एवं वरुणा नदी के संगम स्थल आदि केशव घाट से आगे सलारपुर, सरैया, कोनिया, पुल कोहना, ढेलवरिया, सराय मोहना सहित विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव से पहुंचे। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने संबंधित अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने को कहा। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने, आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों एवं नावों की उपलब्धता बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।

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पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने पुलिस एवं एनडीआरएफ की टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारीद्वय ने प्राथमिक विद्यालय सलारपुर विकास खंड के चिरईगांव और विद्या विहार इंटर कालेज सलारपुर, रसूलगढ़ का निरीक्षण कर राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बिजली, प्रकाश, शौचालय, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सुविधा एवं सुरक्षा व्यवस्था पर सतत् निगरानी रखते हुए सभी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित रखने पर बल दिया।

बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, शिविर में रह रहे बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों की बुनियादी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान रखने को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नगर निगम/संबंधित विभाग को शिविर में साफ-सफाई की व्यवस्था लगातार बनाए रखने तथा शिविर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने के भी निर्देश दिए।

गंगा के साथ गाेमती व नाद के उफान ने भी बिगाड़े हालात, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न

गंगा में लगातार जलस्तर बढ़ने के बाद नाद व गोमती नदी भी उफना गई हैं। नाद नदी के बीच बसा पिपरी गांव चतुर्दिक पानी से घिर गया है। धौरहरा से बेला की ओर जाने वाली सड़क बाढ़ के पानी में डूब जाने से संपर्क मार्ग टूट गया है। मठिया प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। नाद व गोमती नदी के किनारे बर्थरा खुर्द, टांड़, मठिया, धौरहरा हरिहरपुर समेत कई गांवों के किसानों की बोई गई फसल गन्ना, धान पशुओं के हरे चारे जलमग्न हो गए हैं।

उगापुर विद्युत उपकेंद्र के उपखंड अधिकारी अजीत कुमार सोनकर ने बताया कि अभी पिपरी गांव की विद्युत आपूर्ति जारी है। इस पर नजर है पानी का बढ़ाव जारी रहा तो आपूर्ति ठप कर दी जाएगी। उधर गंगा के किनारे बर्थराकलां, शिवदशां, परनापुर, चंद्रावती, रामपुर, ढकवां ,कैथी गंगा नदी में बढ़ाव से किसान चिंतित हो उठे हैं।कैथी मार्कंडेय महादेव घाट, चंद्रावती घाट,पर सीढीयो पर पानी भर गया है।

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