लखनऊ में किसान उत्पादक संगठनों का धरना; शासन से दखल देने की मांग, जानें क्या हैं इनकी मांगें
लखनऊ में किसान उत्पादक संगठनों का धरना; शासन से दखल देने की मांग, जानें क्या हैं इनकी मांगें आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 625 FPO गठित किए जाने का लक्ष्य रखा गया था. By ETV Bharat Uttar…

सौजन्य से:- etvbharat.com
लखनऊ में किसान उत्पादक संगठनों का धरना; शासन से दखल देने की मांग, जानें क्या हैं इनकी मांगें
आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 625 FPO गठित किए जाने का लक्ष्य रखा गया था.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 10, 2026 at 7:39 AM IST
लखनऊ: आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत गठित किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लंबित अनुमोदन और वित्तीय सहयोग की मांग को लेकर क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) और FPO प्रतिनिधियों ने कृषि निदेशालय लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया.
प्रतिनिधियों का कहना है कि योजना की अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके तहत गठित FPO को वित्तीय और संस्थागत सहयोग अब तक नहीं मिल पाया है. उनका आरोप है कि इससे करीब 5 लाख किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं.
आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 625 FPO गठित किए जाने का लक्ष्य रखा गया था. प्रतिनिधियों के मुताबिक, इसके बदले करीब 500 FPO का गठन किया जा चुका है.
इन संगठनों से लगभग 5 लाख किसान सीधे जुड़े हैं. योजना का उद्देश्य किसानों को संगठित कर कृषि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और बाजार से जोड़ना है. उनकी आय और आर्थिक क्षमता को मजबूत करना है.
योजना खत्म मामले अब भी लंबित: धरने पर बैठे CBBO और FPO प्रतिनिधि अंजनी चौबे ने बताया कि योजना की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद पहले से गठित FPO से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं. इनमें वित्तीय सहयोग, अनुमोदन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, व्यवसायिक गतिविधियों और विपणन से संबंधित सहायता प्रमुख हैं.
प्रतिनिधि अंजनी चौबे का कहना है कि FPO का गठन केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है. इन संगठनों के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से कृषि इनपुट उपलब्ध कराने, उत्पादों की खरीद-बिक्री, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जानी थी.
ऐसे में यदि गठन के बाद FPO को आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहयोग नहीं मिलता है, तो उनके सामने संचालन का संकट खड़ा होना स्वाभाविक है. उनका कहना है कि योजना के तहत किसानों को FPO से जोड़ते समय उन्हें संगठन के माध्यम से बेहतर बाजार और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था. अब वित्तीय सहयोग और अनुमोदन लंबित रहने से न केवल FPO की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि किसानों को भी लाभ नहीं मिल पा रहा है.
5 लाख किसानों से जुड़ा मामला: CBBO और FPO प्रतिनिधियों ने कहा कि यह विवाद केवल संगठनों अथवा उनके प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं है. करीब 500 FPO से जुड़े लगभग 5 लाख किसानों का हित प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है. FPO व्यवस्था का मूल उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक शक्ति देना है, ताकि वह अकेले किसान के बजाय संगठित समूह के रूप में बाजार में अपनी बेहतर स्थिति बना सकें.
कृषि उत्पादों की सामूहिक खरीद और बिक्री से लागत कम करने और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी FPO की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. ऐसे में गठित संगठनों को बीच में छोड़ देने से योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं.
कृषि निदेशक से हुई वार्ता: पहले प्रतिनिधियों ने कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं. प्रतिनिधियों के अनुसार वार्ता के दौरान कृषि निदेशक की ओर से कहा गया कि योजना की अवधि समाप्त हो चुकी है और मौजूदा स्तर पर उनके स्तर से इस संबंध में कोई कार्रवाई संभव नहीं है. इस जवाब से प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई.
उनका कहना है कि योजना की अवधि समाप्त होना अपने आप में उन FPO और किसानों की जिम्मेदारी खत्म होने का आधार नहीं हो सकता, जिन्हें इसी योजना के तहत संगठित किया गया है. यदि योजना समाप्त हो चुकी है तो शासन स्तर पर ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे पहले से गठित FPO और उनसे जुड़े किसानों के हित सुरक्षित रह सकें.
प्रतिनिधियों ने कहा कि FPO के गठन और किसानों को उनसे जोड़ने में CBBO सहित संबंधित संस्थाओं ने लंबे समय तक काम किया है. ऐसे में लंबित अनुमोदन और वित्तीय मामलों को केवल योजना की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर लंबित रखना उचित नहीं है.
शासन स्तर पर हस्तक्षेप की मांग: धरना दे रहे प्रतिनिधियों ने पूरे मामले में शासन स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि करीब 500 FPO और 5 लाख किसानों से जुड़े इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर सभी लंबित मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए.
प्रतिनिधियों ने मांग की है कि पात्र FPO के लंबित अनुमोदन तत्काल पूरे किए जाएं और नियमानुसार वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए. इसके साथ ही CBBO द्वारा योजना के तहत किए गए कार्यों से जुड़े लंबित दावों और भुगतान का भी शीघ्र निस्तारण किया जाए.
उनकी मांग है कि योजना की अवधि समाप्त होने के कारण उत्पन्न प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए आवश्यक शासनादेश अथवा उचित प्रशासनिक निर्णय जारी किया जाए. साथ ही FPO को निष्क्रिय होने से बचाने के लिए तकनीकी, वित्तीय, प्रशिक्षण और विपणन संबंधी सहयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग: CBBO और FPO प्रतिनिधियों ने लंबित अनुमोदन और भुगतान के लिए स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया तय करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि संबंधित संस्थाओं और FPO को अपने मामलों के निस्तारण के लिए लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े.
प्रतिनिधियों ने कहा कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि योजना के तहत गठित FPO को आगे किस व्यवस्था के तहत सहयोग मिलेगा. इससे FPO को भविष्य की गतिविधियों की योजना बनाने में भी आसानी होगी और किसानों का भरोसा कायम रहेगा.
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना: प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर शासन और कृषि विभाग की ओर से ठोस, लिखित और समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि सरकार की किसान केंद्रित योजना को उसके मूल उद्देश्य तक पहुंचाना है.
प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और शासन स्तर के संबंधित अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि इसे केवल भुगतान या प्रशासनिक अनुमोदन का मामला न मानकर किसानों की आजीविका और FPO की संस्थागत मजबूती से जुड़े विषय के रूप में देखा जाना चाहिए.
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