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लखनऊ में बाढ़: पॉश कॉलोनियों में भी घुसा पानी, होटलों में शिफ्ट हुए परिवार

लखनऊ में बाढ़: पॉश कॉलोनियों में भी घुसा पानी, होटलों में शिफ्ट हुए परिवार लखनऊ में गोमती की बाढ़ का कहर पॉश कॉलोनियों तक पहुंच गया है। अधिकांश परिवार घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कई परिवारों ने आसपास के हो…

Hindustan के अनुसार7 अक्टूबर 2026 को 01:04 am बजे
लखनऊ में बाढ़: पॉश कॉलोनियों में भी घुसा पानी, होटलों में शिफ्ट हुए परिवार

सौजन्य से:- Hindustan

लखनऊ में बाढ़: पॉश कॉलोनियों में भी घुसा पानी, होटलों में शिफ्ट हुए परिवार

लखनऊ में गोमती की बाढ़ का कहर पॉश कॉलोनियों तक पहुंच गया है। अधिकांश परिवार घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कई परिवारों ने आसपास के होटलों में कमरे लेकर रहना शुरू कर दिया है।

गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने का असर अब गोमती नगर विस्तार की पॉश आवासीय कॉलोनियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सेक्टर-7 स्थित आर्क्सेला रिसॉर्टिको कॉलोनी पूरी तरह पानी से घिर गई है। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश परिवार घर छोड़कर होटलों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। पुलिस मुख्यालय के सामने स्थित इस हाई-प्रोफाइल कॉलोनी में गोमती का पानी भरने से सड़कें और खुले क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। कॉलोनी अब एक टापू की तरह नजर आ रही है।

जलभराव के कारण सामान्य आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कॉलोनी के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया है। गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश न देने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा कर्मियों के अनुसार जलभराव के कारण लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। बाहरी लोगों के साथ ही कॉलोनी में आने की कोशिश कर रहे अन्य लोगों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

गार्डों के अनुसार कॉलोनी में रहने वाले अधिकांश परिवार घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कई परिवारों ने आसपास के होटलों में कमरे लेकर अस्थायी रूप से रहना शुरू कर दिया है। आर्क्सेला रिसॉर्टिको में करोड़ों लोगों के करोड़ों रुपये के मकान और प्लॉट हैं। गृहस्थी पूरी चौपट हो गई है।

राहत की नावें तैयार लेकिन अब भी कई इलाके पहुंच से दूर

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। फैजुल्लागंज में बाढ़ में फंसे हजारों लोगों के लिए पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद योजना और समन्वय के अभाव में राहत समय पर नहीं पहुंच पा रही है। मामा कॉलोनी में नाले के ऊपर बने राहत शिविर में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और एसडीआरएफ के अधिकारी-कर्मचारी तैनात थे।

दोपहर 12 बजे राहत सामग्री से लदी तीन नावें तैयार थीं, लेकिन वीआईपी के आने के इंतजार में करीब दो घंटे तक रवाना नहीं की गईं। नावों पर तैनात पुलिसकर्मी धूप में परेशान होते रहे। करीब दो बजे वीआईपी पहुंचे तो नावें रवाना हुईं। राहत वितरण में समन्वय की कमी भी दिखी। तीनों नावें करीब आधे घंटे तक एक ही दिशा में चलती रहीं। बाद में अधिकारियों ने दो नावों को अलग-अलग दिशाओं में भेजा।

पता नहीं कहां फंसे हैं

रास्ता दिखा रहे प्रशासन के अधिकारियों को पता ही नहीं था कि कहां और किन घरों में कितने लोग फंसे हैं। पहली राहत सामग्री लगभग 2:18 बजे दाउदनगर कालोनी के राम कश्यप को पहुंची। उनके घर का आधा हिस्सा डूबा हुआ था। वह परिवार के चार सदस्यों के साथ फंसे हुए हैं। बताया कि सुबह से कुछ भी नहीं खाया है। पानी भी नहीं है। उनको सूखा राशन के साथ पूड़ी-सब्जी के चार पैकेट भी दिए गए। यहीं पर कृष्ण कुमार शुक्ला भी छह लोगों के साथ मकान की पहली मंजिल पर शरण लिए हुए हैं। उनका परिवार भी सुबह से प्रशासन की मदद का इंतजार कर रहा था। टीम ने उनको भी ख्राना-राशन दिया।

ट्रैक्टर से प्रति सवारी वसूल रहे 200,चोरी का आरोप

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। फैजुल्लागंज में बाढ़ क्या आयी, कुछ लोग आपदा में अवसर तलाशने में लग गए हैं। यहां पर लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने और ले आने के लिए ट्रैक्टर चलने लगे हैं। वह प्रति सवारी 200 रुपए वसूल रहे हैं। इस मनमानी से लोगों में बहुत नाराजगी है, लेकिन मजबूर हैं।

फैजुल्लागंज के गणेश विहार कालोनी के लोगों ने आरोप लगाया कि यहां पर अब तक प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं आया है। न तो राहत समग्री बांटी जा रही है और न ही नाव की व्यवस्था की गयी है। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में रह रहे हैं। जरूरी सामान लेने के लिए उनको बाजार जाना पड़ रहा है।

कालोनी में लगभग पांच फुट तक पानी भर गया है। कालोनी में लगभग एक हजार मकान हैं। बाहर निकलने के लिए ट्रैक्टर ही एक मात्र सहारा बना हुआ है। लेकिन ट्रैक्टर चालक प्रति सवारी 200 रुपए वसूल रहा है। ऐसे में एक बार आने-जाने में 400 रुपए खर्च हो जा रहे हैं। नाव चलाने के लिए कई बार गुहार लगायी गयी, लेकिन कोई जिम्मेदार झांकने तक नहीं आया।

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