'जन्माष्टमी पर प्रदेश में कहीं कोई दंगा या उपद्रव हुआ?' CM योगी ने बताया, कैसे बदल गई यूपी की पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर गोरखपुर में शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित किया। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए बड़े बदलावों को रेखांकित किया। हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री…

सौजन्य से:- Navbharat Times
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर गोरखपुर में शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित किया। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए बड़े बदलावों को रेखांकित किया।
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए बड़े बदलाव और बदलती तस्वीर को प्रमुखता से रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की याद दिलाते हुए सवाल किया कि क्या कल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर प्रदेश में कहीं कोई दंगा या उपद्रव सुनाई पड़ा? उन्होंने कहा कि कल पूरे प्रदेश के हर जिले, पुलिस लाइन, थानों और गली-मोहल्लों में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया लेकिन कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई। यह शांतिपूर्ण माहौल ही आज के बदलते और सुरक्षित उत्तर प्रदेश की वास्तविक पहचान है।
'दंगों और कर्फ्यू के साए में नहीं चल सकते थे स्कूल-कॉलेज'
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में आए दिन कर्फ्यू और दंगों का मंजर बना रहता था। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई कल्पना कर सकता था कि ऐसे उपद्रव और कर्फ्यू के माहौल में हमारे स्कूल-कॉलेज ठीक से चल सकते थे? बीते साढ़े नौ वर्षों में पूरे प्रदेश ने देखा है कि कहीं कोई दंगा-फसाद नहीं हुआ। अब शांति का वातावरण स्थापित होने के कारण प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट चुकी है और कोई भी हमारे शिक्षकों की निष्ठा और योग्यता पर प्रश्न खड़ा नहीं कर सकता।
सैफई महोत्सव का पैसा शिक्षा में लगाते तो बच्चों का भविष्य बनता
मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर करारा हमला किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने जनता के संसाधनों को सैफई महोत्सव के आयोजनों और विदेशों से 'बकिंघम की बग्घी' मंगाकर शाही अंदाज में जन्मदिन मनाने पर बर्बाद किया। उन्होंने कहा कि यदि वह बेहिसाब पैसा प्रदेश के जर्जर स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किया गया होता तो आज लाखों बच्चों का भविष्य संवर चुका होता और यूपी के सामने कभी पहचान का संकट न खड़ा होता। सीएम योगी ने कहा कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में विद्यालयों के जर्जर भवनों के पुनरुद्धार के लिए हमारी सरकार ने 1500 करोड़ से अधिक की धनराशि दी है, जो काम 2017 से पहले भी हो सकते थे। जो लोग अपने समय में कुछ नहीं कर सके, वे आज प्रश्न खड़ा करते हैं।
'ठेके पर नकल कराने वाले सेंटर किए बंद'
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के विद्यालय नकल के अड्डे बन चुके थे और ठेके पर परीक्षाएं कराई जाती थीं। दूसरे राज्यों से छात्र ठेके पर आते थे और उनकी जगह कोई दूसरा 'मुन्नाभाई' परीक्षा देता था। सरकार ने ऐसे दागी विद्यालयों और परीक्षा केंद्रों को हमेशा के लिए बंद करके नकल माफिया की रीढ़ तोड़ दी है, ताकि प्रदेश के शिक्षकों का सम्मान और गरिमा वापस लौट सके। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प और 'निपुण भारत' जैसे अभियानों ने बेसिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक गुणवत्तापूर्ण माहौल तैयार किया है।
शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार किया
शिक्षकों के हित में लिए गए फैसलों का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब हमारी सरकार आई थी तब शिक्षामित्रों को मात्र 3 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर आज 18 हजार कर दिया गया है। अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार किया गया है। इसके अतिरिक्त बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के 15 लाख से अधिक शिक्षकों व कार्मिकों को उनके पूरे परिवार समेत 5 लाख तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है। उन्हें सोशल सिक्योरिटी गारंटी योजना से जोड़ा गया है। सीएम ने कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र को संस्कारवान बनाने का सबसे बड़ा वाहक है और उनके सम्मान व सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।
सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।
सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।
पत्रकारिता अनुभव
सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।
सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।
सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।
अवॉर्ड/अचीवमेंट्स
बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें
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