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आगरा, मथुरा, वाराणसी और प्रयागराज की कई संपत्तियां राजस्थान की? दावे से यूपी में हलचल, घरों की खरीद-बिक्री रोकी

राजस्थान सरकार ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के चार शहरों में उसकी रियासतों के दौर की संपत्तियां हैं, जिन पर उसका अधिकार है। इस दावे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने रेवेन्यू विभाग के रिकॉर्डों की जांच शुरू कर दी है। प्रयागराज…

Navbharat Times के अनुसार21 सितंबर 2026 को 06:04 am बजे
आगरा, मथुरा, वाराणसी और प्रयागराज की कई संपत्तियां राजस्थान की? दावे से यूपी में हलचल, घरों की खरीद-बिक्री रोकी

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान सरकार ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के चार शहरों में उसकी रियासतों के दौर की संपत्तियां हैं, जिन पर उसका अधिकार है। इस दावे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने रेवेन्यू विभाग के रिकॉर्डों की जांच शुरू कर दी है। प्रयागराज में इस दावे से 1263 घरों और दुकानों की खरीद और बिक्री रोक दी गई है।

आगरा: राजस्थान सरकार ने आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में पूर्व की जयपुर रियासत की संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा किया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 70 साल से ज्यादा पुराने रेवेन्यू और मालिकाना हक के रिकॉर्डों की दोबारा जांच शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया को मिले दस्तावेजों से पता चला है कि राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने यूपी सरकार से इन संपत्तियों को राजस्थान के नाम दर्ज करने को कहा था। इसके बाद यूपी बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के कमिश्नर ने चारों जिलों के डीएम को रिकॉर्डों की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

'राजस्थान समझौते' के रिकॉर्डों की जांच

राजस्थान ने अपना दावा 1949 में हुए 'राजस्थान समझौते' के आर्टिकल VI(2)(c) और 1952 के विलय-काल के रिकॉर्डों के आधार पर किया है। उनका कहना है कि विलय के बाद राजस्थान के बाहर मौजूद पुरानी जयपुर रियासत की संपत्तियां राजस्थान सरकार के पास चली गई थीं। इस दावे के बाद पुरानी बिक्री डीड, म्यूटेशन (नाम-परिवर्तन), डेवलपमेंट स्कीम और मौजूदा कब्जे की जांच शुरू हो गई है, क्योंकि रियासतों के खत्म होने के कई दशकों बाद इनमें से कई संपत्तियों के मालिक बदले या उनके स्थान पर डेवलपमेंट हो गया।

आगरा में जमीन, हवेलियां और मंदिर

आगरा में राजस्थान का दावा जयपुर हाउस की लगभग 100 बीघा जमीन, दो हवेलियों, सदाशिव मान कामेश्वर मंदिर और सड़क की जमीन के एक हिस्से पर है। अब यह इलाका किसी रियासती संपत्ति वाले क्षेत्र जैसा नहीं दिखता। जयपुर हाउस अब घनी आबादी वाला रिहायशी और कमर्शियल इलाका बन गया है। यहां पर आगरा डेवलपमेंट अथॉरिटी (ADA), जीएसटी भवन और बीजेपी व आरएसएस के दफ्तर हैं।

राजस्थान के पीडब्लूडी ने बेची थी जमीन

एडीए की वाइस चेयरपर्सन एम अरुणमौलि ने बताया कि, जयपुर हाउस एस्टेट के पुराने रिकॉर्डों और 31 मई 1969 की रजिस्टर्ड डीड की जांच से साफ होता है कि यह जमीन म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने राजस्थान सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) से खरीदी थी। एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है और राज्य सरकार को भेजी जा रही है। सरकार के स्तर पर लिए गए फैसले के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

प्रयागराज में 1263 घरों पर संकट मंडराया

राजस्थान का दावा प्रयागराज को कहीं ज्यादा बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाला है। यहां अधिकारियों ने कटरा सवाई जय सिंह में 35.25 एकड़ में फैले 1263 घरों और दुकानों की पहचान की है। जिला प्रशासन ने इन संपत्तियों की खरीद और बिक्री पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। अधिकारी पुराने मालिकाना हक के रिकॉर्ड, म्यूटेशन और मौजूदा कब्जे की जांच कर रहे हैं। इससे रिकॉर्डों की जांच पूरी होने तक इलाके के एक बड़े हिस्से में लेन-देन रुक गया है।

वाराणसी और मथुरा में घर और जमीन

वाराणसी और मथुरा में भी इसी तरह की जांच शुरू हो गई है। राजस्थान ने वाराणसी के मानमंदिर इलाके में मानमंदिर घाट के साथ-साथ 44 घरों पर अपना दावा जताया है। मथुरा में राजस्थान का दावा करीब 2.16 एकड़ जमीन पर है। इसमें जसवंतगंज धर्मशाला के छह कमरे भी शामिल हैं। दोनों जिलों के रेवेन्यू और म्युनिसिपल अधिकारी अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को भेजने से पहले ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।

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