उत्तर प्रदेश: गन्ने की कमी से खड्डा की एथेनॉल योजना पर लगा ब्रेक ! - ChiniMandi
कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के खड्डा में प्रतिदिन एक लाख लीटर क्षमता वाले एथेनॉल प्लांट की स्थापना की योजना तकनीकी मंजूरी, दस्तावेजी प्रक्रिया और वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद अटक गई है। ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर के…

सौजन्य से:- chinimandi.com
कुशीनगर: उत्तर प्रदेश के खड्डा में प्रतिदिन एक लाख लीटर क्षमता वाले एथेनॉल प्लांट की स्थापना की योजना तकनीकी मंजूरी, दस्तावेजी प्रक्रिया और वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद अटक गई है। ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, परियोजना के सामने सबसे बड़ी बाधा गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति का अभाव है। एथेनॉल उत्पादन के लिए जरूरी मोलासिस (शीरा) आईपीएल चीनी मिल में गन्ने की पेराई के बाद प्राप्त होता है। मिल की कुल गन्ना पेराई क्षमता 45 लाख क्विंटल है, लेकिन पिछले पेराई सत्र में मिल ने केवल 27 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी।
स्थानीय उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या क्षेत्र में गन्ने की फसल की कमी नहीं है। असली समस्या स्थानीय गन्ना खरीद केंद्रों और मिल गेटों के दूसरे चीनी मिलों के बीच आवंटन से जुड़ी है। इसके कारण आईपीएल चीनी मिल को सीधे पर्याप्त मात्रा में गन्ना नहीं मिल पा रहा है। गन्ने की इस समस्या के कारण एथेनॉल परियोजना में हो रही देरी क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। खासतौर पर ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं।
खड्डा में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की पहल पहली बार फरवरी 2020 में एक स्थानीय योजना बैठक के दौरान सामने आई थी। इस बैठक में जिला प्रशासन के अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।परियोजना के शुरुआती प्रस्तावों में 60 किलोलीटर क्षमता वाले छोटे संयंत्र, सह-उत्पादन के जरिए बिजली उत्पादन या अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन जैसे विकल्पों पर विचार किया गया था। हालांकि, बाद में अधिकारियों ने मौजूदा 100 किलोलीटर क्षमता वाले मॉडल को अंतिम रूप दिया।
आईपीएल चीनी मिल के मुख्य प्रबंधक एन.पी. सिंह ने पुष्टि की कि परियोजना के लिए आरक्षित जमीन और प्रशासनिक मंजूरियां तैयार हैं। हालांकि, निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर संयंत्र का संचालन शुरू करने से पहले कच्चे माल यानी गन्ने की लगातार और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। गन्ने की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद ही परियोजना का निर्माण और संचालन आगे बढ़ने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
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