होमराजनीतियूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम - up tourism projects under scrutiny cag flags irregularities
राजनीति

यूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम - up tourism projects under scrutiny cag flags irregularities

यूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम विधानमंडल में पेश सीएजी रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ...और प…

Jagran के अनुसार5 अगस्त 2026 को 08:18 pm बजे
यूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम
 - up tourism projects under scrutiny cag flags irregularities

सौजन्य से:- Jagran

यूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम

विधानमंडल में पेश सीएजी रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ...और पढ़ें

HighLights

- बिना सर्वेक्षण के पर्यटन परियोजनाएं की गईं चिह्नित।

- डीपीआर में खामियां, निधि प्रबंधन में अनियमितता उजागर।

- करोड़ों की परिसंपत्तियां वर्षों तक रहीं अनुपयोगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विधानमंडल के मानसून सत्र में बुधवार को पेश रिपोर्ट के अनुसार पर्यटन निदेशालय ने कई परियोजनाओं की पहचान बिना सर्वेक्षण और अवसंरचना अंतराल (आवश्यक सुविधाओं और उपलब्ध सुविधाओं में अंतर) का आकलन किए ही कर दी।

रिपोर्ट में डीपीआर तैयार करने में वित्तीय अनियमितताएं, परियोजनाओं को समय पर पूरा न कर पाना, निजी ट्रस्ट की भूमि पर निर्माण और करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियों के वर्षों तक उपयोग में न आने जैसी गंभीर कमियां भी सामने आई हैं।

योजना निर्माण की गंभीर खामी

सीएजी के अनुसार, पर्यटन निदेशालय ने वर्ष 2014-15 से 2023-24 के बीच केंद्र सरकार की तीन योजनाओं के तहत 12 परियोजनाओं पर 392.40 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं वर्ष 2020-21 से 2022-23 के दौरान राज्य सरकार की चार योजनाओं के तहत 970 परियोजनाओं पर 774.26 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

इन सभी परियोजनाओं का क्रियान्वयन विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से कराया गया। प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि 82 नमूना परियोजनाओं में 397.50 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों और सुविधाओं का प्रस्ताव बिना किसी पूर्व सर्वेक्षण या अवसंरचना अंतराल के विश्लेषण के तैयार कर दिया गया। सीएजी ने इसे योजना निर्माण की गंभीर खामी माना है।

डीपीआर और प्राक्कलन तैयार करने में भी अनियमितताएं सामने आईं। केंद्रीय योजनाओं के दिशा-निर्देशों के विपरीत 44.53 लाख रुपये का कर शामिल किया गया। स्वीकृति आदेशों के उल्लंघन में 29.73 लाख रुपये का सेंटेज जोड़ा गया, जबकि श्रम उपकर और उस पर जीएसटी के लिए आवश्यक 1.23 करोड़ रुपये का प्रावधान ही नहीं किया गया।

खबरें और भी

निधि प्रबंधन पर भी सवाल

रिपोर्ट में निधि प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि रामायण सर्किट थीम के तहत चित्रकूट के विकास के संबंध में भारत सरकार को प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट (दिसम्बर 2021) के अनुसार, कार्यदायी संस्था (यूपीआरएनएन) ने कंटिनजेंसी के लिए 98.77 लाख रुपये प्रभारित किए, जबकि उसने कोई कंटिनजेंसी व्यय नहीं किया था।

सीएजी के अनुसार, केंद्र पोषित सभी 12 परियोजनाएं (मई 2024 तक) छह से 44 महीने की देरी से पूरी हुईं या उस समय प्रगति पर थीं। वहीं राज्य योजनाओं की जांची गई 77 परियोजनाओं में से 46 परियोजनाएं एक से 22 महीने की अवधि तक की देरी से पूरी हुईं।

रिपोर्ट में निजी ट्रस्टाें के स्वामित्व वाली भूमि कार्य कराने की बात भी सामने आई है। कहा गया है कि योजना के दिशा-निर्देशों के विपरीत गोवर्धन (मथुरा) का विकास और बौद्ध थीमैटिक सर्किट के तहत श्रावस्ती, कुशीनगर व कपिलवस्तु का विकास, योजना में परियोजनाओं में निजी संस्थाओं के स्वामित्व वाली भूमि-संपत्ति पर परिसम्पत्तियों के निर्माण पर 4.95 करोड़ का व्यय किया गया था। सीएजी ने परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर भी टिप्पणी की है।

कहा है कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत 4.14 करोड़ रुपये की एक परिसंपत्ति 23 महीने की देरी से चालू हुई, जबकि 59.53 करोड़ रुपये की अन्य परिसंपत्तियां निर्माण पूरा होने के 13 से 44 महीने बाद तक भी संचालन में नहीं लाई गई थीं।

सीएजी ने यह भी पाया कि चार केंद्रीय सहायता प्राप्त परियोजनाओं की क्लोजर रिपोर्ट में 6.68 करोड़ रुपये का व्यय अनियमित रूप से दर्शाया गया, जबकि योजना के अनुसार जीएसटी और संचालन एवं रखरखाव का खर्च राज्य सरकार को वहन करना था। रिपोर्ट में पर्यटन निदेशालय की परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।

निदेशालय ने न तो पर्यटन स्थलों पर निर्मित परिसंपत्तियों का एसेट रजिस्टर तैयार किया और न ही उनका विवरण सार्वजनिक करने के लिए विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराया। सीएजी ने टिप्पणी की है कि निदेशालय द्वारा उप्र सरकार की राज्य योजना के दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें