यूपी चुनाव के बीच BJP में ऑल इज नॉट वेल! नेताओं के बगावती तेवर बिगाड़ सकते हैं सोशल इंजीनियरिंग - up bjp faces internal dissent social engineering at risk dharmendra kashyap kaushal kishor birjbhushan sharan singh
यूपी चुनाव के बीच BJP में ऑल इज नॉट वेल! नेताओं के बगावती तेवर बिगाड़ सकते हैं सोशल इंजीनियरिंग भाजपा में कई नेताओं के बगावती तेवर सामने आ रहे हैं, जिससे पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग प्रभावित हो सकती है। HighLights - धर्मे…

सौजन्य से:- Jagran
यूपी चुनाव के बीच BJP में ऑल इज नॉट वेल! नेताओं के बगावती तेवर बिगाड़ सकते हैं सोशल इंजीनियरिंग
भाजपा में कई नेताओं के बगावती तेवर सामने आ रहे हैं, जिससे पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग प्रभावित हो सकती है।
HighLights
- धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़ी।
- कौशल किशोर और बृजभूषण शरण सिंह ने भी नाराजगी जताई।
- भाजपा में आंतरिक कलह से सोशल इंजीनियरिंग की लय बिगड़ी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। चुनावी कसरत में जुटी भाजपा के अंदर विरोधी स्वर तेज हो रहे हैं। आंवला लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में सांसद चुने गए धर्मेंद्र कश्यप ने राज्य सभा का टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़ दी। वह साइकिल पर सवार हो सकते हैं। विधान परिषद चुनाव में गोरखपुर-अयोध्या शिक्षक सीट पर शर्मा गुट के ध्रुव त्रिपाठी को टिकट मिलने से नाराज संजयन त्रिपाठी गाड़ी से भाजपा का झंडा हटाकर सपा के प्रत्याशी बन गए।
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं दलित नेता कौशल किशोर और कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का मलाल कई अवसरों पर छलका है। विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा में कई स्तरों पर उभरते अंतर्विरोध से सोशल इंजीनियरिंग की लय बिगड़ सकती है।
धर्मेंद्र 2024 में भाजपा के टिकट पर आंवला सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। कहा जा रहा है कि वो बरेली के धर्मपाल सिंह एवं श्रुति गंगवार को राज्य सभा भेजे जाने से भी नाराज हुए। कश्यप ने पार्टी पर आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में हराने वालों को भाजपा पद एवं प्रतिष्ठा में वरीयता दे रही है।
मोहनलालगंज के पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री रहे पासी समाज से आने वाले कौशल किशोर के बगावती सुर लंबे समय से सुनाई पड़ रहे हैं लेकिन राज्य सभा न भेजे जाने पर उनके बेटे व भाजपा अनुसूचित मोर्चा के पदाधिकारी विकास किशोर ने लिखा कि ‘जहां मां-बाप का सम्मान न हो, वहां नहीं रहना चाहिए’। इसके बड़े राजनीतिक मायने हैं।
बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खुलकर तारीफ करने के साथ ही कई बार इशारों में भाजपा पर प्रश्न खड़े कर चुके हैं। बीच में चर्चा उठी कि उन्हें सपा राज्य सभा भेज सकती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मुजफ्फरनगर के सांसद रहे डॉ. संजीव बालियान कई बार अधिकारियों के व्यवहार के बहाने प्रदेश सरकार की कार्यशैली की आलोचना कर चुके हैं। बालियान साफ कहते हैं कि विधान सभा चुनाव में भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला है।
प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश राठौर सितंबर में सीतापुर कोतवाली के भीतर पुलिस कार्रवाई से नाराज होकर रो पड़े थे। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद गोंडा में कार्यकर्ता विनोद कुमार सहनी की हत्या पर कलेक्ट्रेट और केजीएमयू की मर्चरी पर धरने पर बैठे थे।
दर्जनों बार भाजपा विधायक एवं मंत्री अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सरकार, संघ एवं संगठन तक से शिकायत कर चुके हैं। पिछले दिनों क्षेत्रीय संगठन की सूची जारी होने के बाद मेरठ, मथुरा, बरेली समेत कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने कई पदाधिकारियों पर पद बांटने के गंभीर आरोप लगाए थे।
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