जयपुर में गिरफ़्तारी या फ़िरोज़ाबाद में? यूपी पुलिस पर ‘फ़र्ज़ी एनकाउंटर’ का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट | जनचौक
पुलिस अधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। यह मामला जयपुर (राजस्थान) से चोरी के आरोपी की ग…

सौजन्य से:- जनचौक
पुलिस अधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। यह मामला जयपुर (राजस्थान) से चोरी के आरोपी की गिरफ़्तारी और उसके बाद फ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) में कथित पुलिस एनकाउंटर में उसके घायल होने से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के सामने आने के बाद उठा है।
जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने आरोपी की पत्नी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने आगरा ज़ोन के अवर पुलिस महा निदेशक को एनकाउंटर के बारे में अपना निजी हलफ़नामा (एफ़िडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही जयपुर के पुलिस आयुक्त को भी घटना के बारे में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता के पति अवधेश, जयपुर की एक कंपनी में काम करते हैं। याचिकाकर्ता पत्नी ने राजस्थान पुलिस से शिकायत की थी कि 5 दिसंबर, 2025 को रात करीब 10 बजे पुलिसकर्मी कंपनी परिसर में पहुंचे और उनके पति को “बिना किसी कारण” के और परिवार को यह बताए बिना कि उन्हें कहाँ ले जाया जा रहा है, अपने साथ ले गए।
इसके बाद राजस्थान पुलिस ने शिकायत की जांच की। जयपुर के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा जारी सूचना में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पति फ़िरोज़ाबाद के एक पुलिस थाने में दर्ज चोरी के मामले में वांछित हैं और संबंधित पुलिस थाने के कर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया।
राजस्थान पुलिस की रिपोर्ट में आगे कहा गया कि बाद में उन्हें फ़िरोज़ाबाद ज़िले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और जयपुर पुलिस के कर्मियों ने मदद के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस टीम का साथ दिया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि गिरफ़्तारी के संबंध में एफआईआर दिया गया ब्यौरा राजस्थान पुलिस के बयान से अलग है। एफआईआर और अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने पुलिस को याचिकाकर्ता के पति के ठिकाने की जानकारी दी थी। वह और उसका सह-आरोपी फ़िरोज़ाबाद में चितराई जाने वाली सड़क पर एक कोल्ड स्टोरेज के पास पाए गए।
एफआईआर/अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने पुलिसकर्मियों को चुनौती दी और पुलिस टीम पर हथियारों से हमला किया। दावा किया गया कि इसके बाद हुई मुठभेड़ में याचिकाकर्ता के पति को गोली लगी। राजस्थान पुलिस के बयान के अनुसार, आरोपी को चोरी के मामले में जयपुर से फिरोजाबाद पुलिस ले गई।
वहीं, उत्तर प्रदेश की एफआईआर एक अलग कहानी बताई गई, जिसमें आरोप है कि वह फिरोजाबाद में अपने साथी आरोपी के साथ मिला और पुलिस टीम पर हथियारों से हमला किया, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में वह घायल हो गया।
इन अलग-अलग दावों को देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि उनके पति एक “फर्जी मुठभेड़” में घायल हुए, जिसे पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर “अपनी साख चमकाने” के लिए अंजाम दिया।
इन आरोपों को देखते हुए बेंच ने आगरा ज़ोन के अपर पुलिस महानिदेशक और जयपुर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस मामले से जुड़ी अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उसके आदेश की एक प्रति राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के ज़रिए जयपुर के पुलिस आयुक्त को भेजी जाए। इस मामले की सुनवाई 17 सितंबर के लिए तय की गई।
(जनचौक ब्यूरो)
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