लखनऊ में कारोबारी का अपहरण, 9 घंटे तक गाड़ी में लेकर घूमते रहे, पैसा मिलने पर शहीद पथ पर छोड़कर भागे
लखनऊ में कारोबारी का अपहरण, 9 घंटे तक गाड़ी में लेकर घूमते रहे, पैसा मिलने पर शहीद पथ पर छोड़कर भागे पुलिस ने गैंग के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. करीब 220 से 240 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाले गए. By ETV Bharat U…

सौजन्य से:- ETV Bharat
लखनऊ में कारोबारी का अपहरण, 9 घंटे तक गाड़ी में लेकर घूमते रहे, पैसा मिलने पर शहीद पथ पर छोड़कर भागे
पुलिस ने गैंग के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. करीब 220 से 240 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाले गए.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 20, 2026 at 7:19 PM IST
|Updated : September 20, 2026 at 7:51 PM IST
लखनऊ : कृष्णानगर में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कारोबारी का अपहरण करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है. पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से दो तमंचे, तीन कारतूस, ढाई लाख रुपये नकद, स्कॉर्पियो, दो फर्जी नंबर प्लेट और चार कूटरचित पुलिस अधिकारी के आईडी कार्ड बरामद हुए हैं.
गिरफ्तार आरोपियों ने एक कारोबारी को फर्जी पुलिस आईडी कार्ड दिखाकर पूछताछ के बहाने गाड़ी में बैठाया, फिर असलहे के बल पर डरा-धमकाकर उसकी पत्नी से फिरौती की मांग की थी. डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया, 12 सितंबर को सुदर्शन घोष अपने ऑफिस जा रहे थे. इसी दौरान आरोपियों ने रास्ते में उन्हें रोका और खुद को पुलिस अधिकारी बताया.
आरोपियों ने फर्जी पुलिस आईडी कार्ड दिखाकर उन्हें भरोसे में लिया और पूछताछ के नाम पर जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया. इसके बाद असलहे के बल पर उन्हें धमकाया और मारपीट की. आरोपियों ने सुदर्शन से उनकी पत्नी को फोन करवाकर फिरौती की रकम मंगाने को कहा. इस दौरान आरोपियों ने सुदर्शन की पत्नी से नकदी और जेवर की भी मांग की.
आरोपी 9 घंटे तक गाड़ी में व्यापारी को लेकर घूमते रहे. सुदर्शन के ड्राइवर के जरिए 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर आरोपियों तक पहुंचाए गए. इसके बाद बदमाश सुदर्शन को शहीद पथ के पास छोड़ कर फरार हो गए. डीसीपी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया, घटना के खुलासे के लिए आठ टीमें लगाई थीं. टीमों ने करीब 220 से 240 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले.
इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्य, मैनुअल इनपुट और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों को पकड़ा गया. आरोपियों की पहचान अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, अनुराग कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार के रूप में हुई है. पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उनका गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और गिरोह ऐसे लोगों की तलाश करता था, जिनके पास काफी पैसा हो.
गिरोह पहले उनकी रेकी करता है, फिर मौका देखकर वारदात को अंजाम देते हैं. पुलिस के मुताबिक, इस घटना में गिरोह के एक सदस्य ने सुदर्शन के बारे में जानकारी दी थी. इसके बाद आरोपियों ने लखनऊ में रहकर उनकी गतिविधियों और आने जाने की रेकी की थी. गिरोह वारदात में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों पर कूटरचित नंबर प्लेट लगाते थे और खुद को पुलिस अधिकारी साबित करने के लिए फर्जी आईडी कार्ड रखते थे.
डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया गया है. घटना के खुलासे वाली टीम को डीसीपी दक्षिणी की ओर से 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया है.
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