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यूपी की 82 लाख महिला किसानों के लिए गेमचेंजर बनी ये योजना, जो बदल रही गांवों की तस्वीर

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को खेती, रोजगार और छोटे कारोबार से जोड़ा जा रहा है. इस पहल से जुड़े स्वयं सहायता समूह अब गांवों में कमाई और आत्मनिर्भरता का जरिया बन रहे हैं. प्रदेश की…

Aaj Tak News के अनुसार8 सितंबर 2026 को 02:31 pm बजे
यूपी की 82 लाख महिला किसानों के लिए गेमचेंजर बनी ये योजना, जो बदल रही गांवों की तस्वीर

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को खेती, रोजगार और छोटे कारोबार से जोड़ा जा रहा है. इस पहल से जुड़े स्वयं सहायता समूह अब गांवों में कमाई और आत्मनिर्भरता का जरिया बन रहे हैं. प्रदेश की 82 लाख से ज्यादा महिला किसानों का जुड़ाव इस बदलाव की बड़ी तस्वीर दिखाता है. महिलाओं को खेती से जुड़े काम के साथ आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं. वहीं स्वयं सहायता समूहों के जरिए उन्हें प्रशिक्षण, ऋण और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसका असर गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है.

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दरअसल, ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं. इन समूहों से करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े हैं. समूहों ने महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का काम किया है. इन समूहों से जुड़ी 82 लाख से ज्यादा महिला किसान ग्रामीण बदलाव की नई अग्रदूत बनकर उभर रही हैं. खेती से जुड़े काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ उन्हें कमाई के नए अवसर भी मिल रहे हैं.

खेती से आगे बढ़कर कारोबार से जुड़ी महिलाएं

ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है. उन्हें प्रशिक्षण, ऋण, उद्यम और बाजार से जोड़कर आय के स्थायी अवसर तैयार किए जा रहे हैं. इसका असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है.

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महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों के निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में छोटे उद्यम चला रही हैं. इन कामों से महिलाओं के हाथ में कमाई आई है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है. घर की जरूरतों में योगदान देने के साथ महिलाएं अपने फैसले खुद लेने और दूसरे परिवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं.

बचत और ऋण से कारोबार तक पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं को बचत और ऋण की व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्यमिता के अवसर दिए गए. प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव ने गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों की नींव रखने में मदद की है.

अरुण कुमार इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी पहचान कारोबारी के रूप में बना रही हैं. महिला समूहों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं. एक महिला के उद्यमी बनने का असर उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता. समूह की दूसरी महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं.

बैंकिंग से मजबूत हुई महिलाओं की आर्थिक स्थिति

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ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी मिशन की अहम उपलब्धियों में शामिल है. वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं को बचत, ऋण और दूसरे आर्थिक अवसरों तक पहुंच मिली है. इससे गांवों में छोटी पूंजी के आधार पर कारोबार शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं. सरकार का जोर अब इन समूहों को सिर्फ सक्रिय रखने के बजाय उन्हें उद्यम, रोजगार और बाजार के अवसरों से जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार करने पर है. स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास के साथ महिला सशक्तीकरण का भी माध्यम बनते जा रहे हैं.

स्वयं सहायता समूहों से गांवों में बढ़ रही आर्थिक गतिविधियां

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश में साढ़े 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रहा है. एक ओर इससे आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की नई पहचान मिल रही है.

ग्रामीण आजीविका का यह मॉडल महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है. 82 लाख से ज्यादा महिला किसानों का स्वयं सहायता समूहों से जुड़ना इसी बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है.

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