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मेरठ में पुलिस भर्ती फर्जीवाड़ा; ₹8 लाख में दोस्त को परीक्षा में बैठाया, पास होने पर ट्रेनिंग भी शुरू कर दी

मेरठ में पुलिस भर्ती फर्जीवाड़ा; ₹8 लाख में दोस्त को परीक्षा में बैठाया, पास होने पर ट्रेनिंग भी शुरू कर दी असली उम्मीदवार ने पुलिस लाइन में सिपाही के रूप में आधारभूत प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया. By ETV Bharat Uttar Prades…

etvbharat.com के अनुसार11 सितंबर 2026 को 09:04 am बजे
मेरठ में पुलिस भर्ती फर्जीवाड़ा; ₹8 लाख में दोस्त को परीक्षा में बैठाया, पास होने पर ट्रेनिंग भी शुरू कर दी

सौजन्य से:- etvbharat.com

मेरठ में पुलिस भर्ती फर्जीवाड़ा; ₹8 लाख में दोस्त को परीक्षा में बैठाया, पास होने पर ट्रेनिंग भी शुरू कर दी

असली उम्मीदवार ने पुलिस लाइन में सिपाही के रूप में आधारभूत प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 11, 2026 at 2:03 PM IST

मेरठ: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली और फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आगरा निवासी एक युवक ने खुद परीक्षा देने के बजाय अपने दोस्त को ₹8 लाख के सौदे पर भर्ती प्रक्रिया में बैठा दिया. साल्वर बने दोस्त ने लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल जांच तक की सारी प्रक्रियाएं पास कर लीं. इसके बाद असली उम्मीदवार ने पुलिस लाइन मेरठ में सिपाही (आरक्षी रिक्रूट) के रूप में आधारभूत प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) भी शुरू कर दी. हालांकि, एक शिकायती पत्र के बाद हुई गहन विभागीय जांच में बायोमेट्रिक व फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड का मिलान न होने पर पूरे खेल का पर्दाफाश हो गया.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी रिक्रूट मुकुल (पुत्र पप्पूराम), निवासी ग्राम महाराजपुर, थाना निबोहरा (आगरा) ने अपनी जगह अपने दोस्त रामरूप (पुत्र किशनचंद निषाद), निवासी शाहबेद नरी का पुरा, निबोहरा (आगरा) को परीक्षा में बैठाया था. एडमिट कार्ड और भर्ती से जुड़े फॉर्म पर मुकुल की जगह उसके दोस्त रामरूप का फोटो लगाया गया था, ताकि परीक्षा केंद्रों पर चेकिंग के दौरान कोई पहचान न सके. जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बीच ₹8 लाख के वित्तीय लेनदेन से जुड़ी बैंक डिटेल्स भी मिली हैं, जिसे अहम सबूत के तौर पर केस में शामिल किया गया है.

पुलिस लाइन मेरठ में मुकुल का प्रशिक्षण चल रहा था. कुछ माह पूर्व पुलिस अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से एक गोपनीय शिकायती पत्र प्राप्त हुआ. शिकायतकर्ता ने मुकुल के स्थान पर उसके दोस्त रामरूप के परीक्षा देने का आरोप लगाया और मुकुल का वास्तविक फोटो भी साथ संलग्न किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इसकी जांच एसपी यातायात मेरठ को सौंपी.

भर्ती प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए एडमिट कार्ड, फाइल फोटो और ट्रेनिंग ले रहे मुकुल के वास्तविक चेहरे का मिलान नहीं हुआ. परीक्षा केंद्र और शारीरिक परीक्षण के समय दर्ज किए गए बायोमेट्रिक व फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड को जब रिक्रूट मुकुल के फिंगरप्रिंट से मिलाया गया, तो दोनों में भारी भिन्नता पाई गई. शारीरिक मानक परीक्षण के दस्तावेज भी मुकुल के वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए.

एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर एसपी ट्रैफिक द्वारा निष्पक्ष विभागीय जांच कराई गई. जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं. रिक्रूट मुकुल की जगह उसके साथी रामरूप के परीक्षा व अन्य प्रक्रियाओं में शामिल होने के पुख्ता बायोमेट्रिक एवं तकनीकी साक्ष्य मिले हैं.

दोनों आरोपियों रिक्रूट मुकुल और फर्जी तरीके से परीक्षा देने वाले रामरूप के खिलाफ थाना सिविल लाइंस, मेरठ में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है. दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो विशेष टीमें गठित कर आगरा व संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. शीघ्र ही दोनों को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.

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