यूपी में सामान्य वर्ग के 73 जेई की बर्खास्तगी रद, HC ने कहा- अफसरों की गलती नहीं भुगतेंगे कर्मचारी - up jal nigam je dismissal quashed by allahabad hc
यूपी में सामान्य वर्ग के 73 जेई की बर्खास्तगी रद, HC ने कहा- अफसरों की गलती नहीं भुगतेंगे कर्मचारी इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी जल निगम की 2013 की जूनियर इंजीनियर भर्ती में 73 सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की बर…

सौजन्य से:- Jagran
यूपी में सामान्य वर्ग के 73 जेई की बर्खास्तगी रद, HC ने कहा- अफसरों की गलती नहीं भुगतेंगे कर्मचारी
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी जल निगम की 2013 की जूनियर इंजीनियर भर्ती में 73 सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की बर्खास्तगी रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की गलती का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए, जिनकी नियुक्ति वैध प्रक्रिया से हुई थी।
HighLights
- 73 सामान्य वर्ग के जूनियर इंजीनियरों की बर्खास्तगी रद।
- अधिकारियों की गलती का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगतेंगे।
- कर्मचारियों को 2013 से सेवा निरंतरता के साथ बहाल किया जाए।
विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश जल निगम की वर्ष 2013 की जूनियर इंजीनियर भर्ती में सामान्य वर्ग के 73 कर्मचारियों की बर्खास्तगी रद कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों से हुई गलती का खामियाजा उन कर्मचारियों को नहीं भुगताया जा सकता, जिनकी नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृत पदों पर विधिवत चयन प्रक्रिया के तहत की थी और जिन पर धोखाधड़ी, गलतबयानी या हेरफेर का कोई आरोप नहीं था।
न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल पीठ ने जूनियर इंजीनियर राकेश प्रताप सिंह समेत अन्य की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला शुक्रवार को सुनाया। कोर्ट ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 28 जनवरी 2014 के आदेश को भी अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था लागू करना अनिवार्य है, लेकिन उसे सुधारने के नाम पर ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती, जो कानून और मूल चयन प्रक्रिया के विपरीत हो। मामला वर्ष 2013 में 470 जूनियर इंजीनियर पदों की भर्ती से जुड़ा है। वर्गवार चयन के बाद आरक्षित वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों के चयन को लेकर सवाल उठे।
सात जनवरी 2014 गठित समिति ने 15 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में छूटे हुए अतिरिक्त आरक्षित अभ्यर्थियों को दूसरे चरण की 469 रिक्तियों में समायोजित करने और किसी भी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी की सेवा समाप्त नहीं करने की सिफारिश की थी। जल निगम ने आरक्षित अभ्यर्थियों के समायोजन की सिफारिश स्वीकार कर ली, लेकिन सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखने की सिफारिश पर अमल नहीं किया।
इसके बाद 136 अतिरिक्त ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। इससे मूल 470 पदों के मुकाबले कुल नियुक्तियां 543 हो गईं। दो दिसंबर 2014 को राकेश प्रताप सिंह समेत 73 सामान्य वर्ग के जेई की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
हाई कोर्ट ने 18 दिसंबर 2014 को पहली बर्खास्तगी रद करते हुए मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। जल निगम ने फिर से सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की और 14 मई 2015 को दोबारा बर्खास्तगी आदेश जारी कर दिया।
अदालत ने कहा कि कारण बताओ नोटिस महज औपचारिकता नहीं हो सकती। कर्मचारियों ने चयन प्रक्रिया, आरक्षण कानून, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकार क्षेत्र और पूर्व हाई कोर्ट के आदेश समेत कई आपत्तियां उठाई थीं, लेकिन इन पर वास्तविक और सार्थक विचार नहीं किया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमित चयन और नियुक्ति के बाद केवल चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितता के आधार पर नियुक्तियों को शून्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने 14 मई 2015 का बर्खास्तगी आदेश निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को सेवा में बनाए रखने और 21 अक्टूबर 2013 की मूल नियुक्ति तिथि से सेवा निरंतरता देने का निर्देश दिया।
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