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सहारनपुर में 70 साल पुरानी कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन, ढांचे को ध्वस्त किया गया

सहारनपुर में 70 साल से भी ज्यादा पुरानी कलक्ट्रेट परिसर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। मस्जिद को आज सुबह ढहा दिया गया है। सहारनपुर : सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। आज सुबह शुरू हुई कार्रवाई…

Navbharat Times के अनुसार5 सितंबर 2026 को 05:30 am बजे
सहारनपुर में 70 साल पुरानी कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन, ढांचे को ध्वस्त किया गया

सौजन्य से:- Navbharat Times

सहारनपुर में 70 साल से भी ज्यादा पुरानी कलक्ट्रेट परिसर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। मस्जिद को आज सुबह ढहा दिया गया है।

सहारनपुर : सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। आज सुबह शुरू हुई कार्रवाई के तहत प्रशासन ने मस्जिद को ढहा दिया है। इसको लेकर रात से ही प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली थी। 2 सितंबर को जिला जज का आदेश आने के बाद मस्जिद को हटाई जाने की कार्रवाई शुरू की गई है। देर रात ही जेसीबी डंपर आदि कलक्ट्रेट परिसर पहुंच गए थे।

इसके बाद सुबह धीरे-धीरे मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम शुरू हुआ। इससे पहले पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बीच कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट को सील कर दिया गया था। किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया। इस दौरान आरएएफ समेत भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।

कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

बता दें कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन की ओर से मस्जिद को अवैध बताया गया था। इसके बाद पर बुलडोजर एक्शन शुरू हुआ है। इस दौरान मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और बुलडोजर की मदद से निर्माण को हटाया गया। जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर में यह मस्जिद करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही थी। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से इसे अवैध निर्माण बताया गया था। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की। प्रशासन की निगरानी में बुलडोजर चलाकर मस्जिद के निर्माण को ध्वस्त किया गया।

कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से मौजूद इस निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया है। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण अवैध माना था। मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर बताया कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस्जिद बन गई थी। जबकि प्रशासन ने सबूत रखा कि सहारनपुर में पहली बार बिजली ही 1912 में आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि कलक्ट्रेट परिसर के अंदर मौजूद मस्जिद 70 साल से भी ज्यादा पुरानी है।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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