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प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण को कैबिनेट की मंजूरी: 6 जिलों का बनेगा स्पेशल रीजन, धार्मिक पर्यटन से लेकर उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार - Chitrakoot News

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Dainik Bhaskar के अनुसार5 अगस्त 2026 को 10:18 pm बजे
प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण को कैबिनेट की मंजूरी:  6 जिलों का बनेगा स्पेशल रीजन, धार्मिक पर्यटन से लेकर उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार - Chitrakoot News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण को कैबिनेट की मंजूरी:6 जिलों का बनेगा स्पेशल रीजन, धार्मिक पर्यटन से लेकर उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी गई। इस बैठक में कुल 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी शामिल है।

यह नई विकास योजना लखनऊ के स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) की तर्ज पर तैयार की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रयागराज, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर और महोबा सहित छह जिलों को शामिल किया जाएगा। यह विशेष विकास क्षेत्र लगभग 23 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। इसका मुख्य उद्देश्य इन जिलों का समन्वित विकास करना, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना, औद्योगिक निवेश आकर्षित करना और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है।

प्रस्तावित मास्टर प्लान के तहत प्रयागराज को इस क्षेत्र का जोनल केंद्र बनाया जाएगा। चित्रकूट को धार्मिक पर्यटन केंद्र और बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की योजना है। कामदगिरि, मंदाकिनी तट और अन्य धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी में सुधार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही सुगम हो सके।

योजना के अनुसार, कौशांबी को बौद्ध पर्यटन केंद्र, फतेहपुर को कृषि व्यापारिक हब और बांदा को बुंदेलखंड का आर्थिक केंद्र बनाया जाएगा। हमीरपुर और महोबा को खनिज एवं औद्योगिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति है। इस क्षेत्रीय विकास योजना से बुंदेलखंड और पूर्वांचल में लॉजिस्टिक्स पार्क, आईटी हब, एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट और डिफेंस कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि यह एकीकृत विकास मॉडल छह जिलों के बीच सड़क, रेल और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करेगा। इससे धार्मिक पर्यटन, उद्योग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। चित्रकूट जैसे धार्मिक नगर को प्रदेश की नई विकास नीति में प्रमुख स्थान मिलने से बुंदेलखंड के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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