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5600 करोड़ का घोटाला: कानपुर-उन्नाव में कागजों पर चल रही थीं 77 फर्में, जमीनी पड़ताल में खुली पोल - kanpur unnao 5600 cr cyber fraud 77 fake firms exposed

5600 करोड़ का घोटाला: कानपुर-उन्नाव में कागजों पर चल रही थीं 77 फर्में, जमीनी पड़ताल में खुली पोल कानपुर और उन्नाव में 77 फर्जी फर्मों के जरिए 5600 करोड़ रुपये के साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी ...और पढ़ें HighL…

Jagran के अनुसार15 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
5600 करोड़ का घोटाला: कानपुर-उन्नाव में कागजों पर चल रही थीं 77 फर्में, जमीनी पड़ताल में खुली पोल
 - kanpur unnao 5600 cr cyber fraud 77 fake firms exposed

सौजन्य से:- Jagran

5600 करोड़ का घोटाला: कानपुर-उन्नाव में कागजों पर चल रही थीं 77 फर्में, जमीनी पड़ताल में खुली पोल

कानपुर और उन्नाव में 77 फर्जी फर्मों के जरिए 5600 करोड़ रुपये के साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी ...और पढ़ें

HighLights

- कानपुर-उन्नाव में 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा।

- 77 फर्जी फर्में मनी लॉन्ड्रिंग, जीएसटी चोरी में लिप्त पाई गईं।

- ईडी और आयकर विभाग को जांच सौंपने की संभावना है।

जागरण संवाददाता, कानपुर। देश के 18 राज्यों और विदेश तक तीन साल में दो हजार लोगों से 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में सामने आया गिरोह कानपुर व उन्नाव में 77 फर्में बनाकर मनी लांड्रिंग, जीएसटी से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) चोरी और हवाला का ही काम करता था। इसके संकेत दैनिक जागरण की पड़ताल में पुख्ता हुए हैं। कागजों पर जिन फर्मों के खातों में 100-100 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन दर्ज था, वे जमीनी हकीकत में पूरी तरह से खोखली निकलीं।

मंगलवार को दैनिक जागरण टीम जब एक फर्म के पते पर पहुंची तो वहां दूसरा परिवार रहता मिला। दूसरी फर्म के पते पर पहुंचने पर जर्जर घर व पीछे खाली गोदाम में चमड़े के कुछ टुकड़े मिले। ओवैश एक्जिम नामक फर्म के पते पर महज एक किराये का मकान मिला, जिसके खाते में 131.69 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ था। मकान के पीछे बने जर्जर गोदाम में केवल चमड़े के कुछ टुकड़े पड़े मिले, जबकि ओवैश फरार है।

इसी तरह एनजी इंटरनेशनल फर्म के खाते में 109.95 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है, जिसमें प्रोपराइटर मन्नू अरोड़ा हैं। दस्तावेज में दर्ज पते पर पहुंचने पर वहां केयर टेकर राकेश तिवारी ने मालिक का नाम गजेंद्र अरोड़ा बताया। गजेंद्र से जब फोन पर बात की गई तो उन्होंने इस नाम की फर्म उनकी होने से इनकार कर दिया। पुलिस पता कर रही कि सभी फर्मों के खातों से रकम किन-किन लोगों को भेजी गई।

गिरोह के दो आरोपित पुलिस के रडार पर और आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें जल्द कई राज्यों में छापेमारी करेंगी। साइबर क्राइम टीम ने हाल ही में गिरोह के सरगना शाहजेब वारिस को हैदराबाद एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था।

एसआई रविशंकर ने बताया कि शाहजेब शहर में एक होटल में सीए के अधीन अकाउंटेंट था, जबकि सलमान का घर पर ही मेडिकल स्टोर है। जांच में पुलिस को नौ खाते मिले, जिनमें 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ। अब इस पूरे प्रकरण में मनी लांड्रिंग और टैक्स चोरी की पुख्ता आशंका को देखते हुए जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग को सौंपी जा सकती है।

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