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यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी होगा मूल वेतन, योगी कैबिनेट में बड़ा फैसला

यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी होगा मूल वेतन, योगी कैबिनेट में बड़ा फैसला यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी मूल वेतन होगा। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजद…

Hindustan के अनुसार4 अगस्त 2026 को 08:18 pm बजे
यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी होगा मूल वेतन, योगी कैबिनेट में बड़ा फैसला

सौजन्य से:- Hindustan

यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी होगा मूल वेतन, योगी कैबिनेट में बड़ा फैसला

यूपी के हर श्रमिक की तनख्वाह का 50 फीसदी मूल वेतन होगा। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी मिल गई।

यूपी के लाखों कामगारों और सेवायोजकों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी मिल गई। इसके लागू होने के बाद अब किसी भी पात्र कर्मचारी को न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं दिया जा सकेगा, चाहे वह किसी भी क्षेत्र, प्रतिष्ठान या नियोजन में कार्यरत हो। संहिता में प्रावधान किया गया है कि कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन होगा।

नई नियमावली के हिसाब से भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारियों को अधिक लाभ मिल सकेगा। समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा समाप्ति के दो दिन के भीतर बकाया भुगतान, नियमित कार्य अवधि से अधिक काम कराने पर दोगुनी ओवरटाइम मजदूरी और वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा।

कौशल और काम की प्रकृति से निर्धारित होगी मजदूरी

नई श्रम संहिता के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था को सभी पात्र कर्मचारियों तक विस्तारित किया गया है। कौशल, कार्य की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर मजदूरी निर्धारित होगी। केंद्र सरकार द्वारा तय 'फ्लोर वेज' से कम न्यूनतम मजदूरी कोई राज्य सरकार तय नहीं कर सकेगी। वहीं श्रमिकों की मजदूरी से वैधानिक कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता पर होगी। मृत कर्मचारी के बकाया भुगतान के लिए नामित व्यक्ति और उसके अभाव में विधिक उत्तराधिकारी को राशि देने का प्रावधान भी किया गया है।

नियोक्ता-श्रमिकों को नहीं जाना होगा कोर्ट

नियोक्ताओं को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। पहली बार नियमों के उल्लंघन पर उपशमन का प्रावधान होगा। अनुपालन का बोझ घटाते हुए अब केवल तीन रजिस्टर और दस प्रपत्र रखने होंगे। वार्षिक विवरण सहित अन्य दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किए जा सकेंगे। नई संहिता में श्रम निरीक्षण प्रणाली को भी पारदर्शी बनाने का प्रावधान किया गया है। ऑनलाइन और जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू होगी तथा 'श्रम निरीक्षक' की जगह 'निरीक्षक-सह-सुविधा प्रदाता' की व्यवस्था होगी, जो नियमों के अनुपालन के साथ नियोक्ताओं और कर्मचारियों को परामर्श एवं मार्गदर्शन भी देगा। इसके अलावा विवादों में विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील की व्यवस्था की गई है। पहले इसमें हाईकोर्ट जाने की व्यवस्था थी।

इसके साथ ही भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन) उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक 2020 को भारत सरकार से वापस लिए जाने संबंधी श्रम विभाग के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। दरअसल नई श्रम संहिताओं के प्रभावी होने के चलते पुरानी नियमावली के स्वत: ही निष्प्रभावी होने के चलते यह निर्णय लिया गया है।

लेखक के बारे में

Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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