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यूपी की वो 50 सीटें, जहां 10 हजार से भी कम वोटों ने बदल दिया 2022 का चुनाव! अब अखिलेश यादव की उन्हीं पर निगाहें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की सभी सीटों पर 27 हजार वोट बढ़ाने का टार्गेट तय किया है। सपा इस टार्गेट के जरिए उन 50 सीटों पर फोकस करना चाहती है, जहां हार-जीत का अंतर महज 10000 वोटों से कम था। लखनऊ: समाजवादी पार्टी के…

Navbharat Times के अनुसार22 सितंबर 2026 को 08:04 am बजे
यूपी की वो 50 सीटें, जहां 10 हजार से भी कम वोटों ने बदल दिया 2022 का चुनाव! अब अखिलेश यादव की उन्हीं पर निगाहें

सौजन्य से:- Navbharat Times

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की सभी सीटों पर 27 हजार वोट बढ़ाने का टार्गेट तय किया है। सपा इस टार्गेट के जरिए उन 50 सीटों पर फोकस करना चाहती है, जहां हार-जीत का अंतर महज 10000 वोटों से कम था।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर कम से कम 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। यह बयान सिर्फ चुनावी नारा नहीं, बल्कि चुनावी कैलकुलेशन है। 2022 विधानसभा में चुनावों करीब 50 ऐसी सीटें थीं, जहां 10,000 से कम वोटों से हार-जीत तय हुई थी।

इसमें से ज्यादातर सीटों पर बीजेपी या उसके सहयोगी दल को जीत मिली थी। अब सपा 27,000 वोट बढ़ाकर कम अंतर वाली विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना चाहती है।

क्या है राजनीतिक लक्ष्य

पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 15 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 से भी कम था। इन 15 में से 6 सीटें समाजवादी पार्टी को मिलीं और 8 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। एक सीट पर निषाद पार्टी के रमेश सिंह जीते थे। इसी तरह 14 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच था। इनमें से 7 सीटें बीजेपी ने, 4 सीटें सपा ने, 2 सीटें अपना दल (सोनेलाल) ने जीतीं और एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी।

सपा ने 27 हजार वोट का रखा टार्गेट

इसके अलावा ऐसी कुल 8 सीटें थीं, जिन पर जीत का अंतर 2000 से 3000 के बीच था। इसमें से 5 सीटों पर समाजवादी पार्टी और 3 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं 3,000 से 4000 वोट के अंतर वाली कुल 7 सीटें थी। इसमें से सपा को 4, बीजेपी को दो और अपना दल (एस) को एक सीट पर जीत मिली। 4000 से 5000 वोट के अंतर से जीत हार वाली कुल 9 सीटें थीं। इनमें से 7 सीटें बीजेपी के खाते में गईं और सपा सिर्फ 2 ही सीटें जीत पाई। जानकार मानते हैं कि अखिलेश यादव का 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य ऐसी ही सीटों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

सपा का पीडीए पर फोकस

सपा की रणनीति का केंद्र पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम मतदाता रहे हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी, अति पिछड़े वर्ग और युवाओं में भी अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश तेज की है। 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य इसी सामाजिक विस्तार की ओर एक कदम है।

पार्टी को ग्राउंड पर एक्टिव करने की कोशिश

पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर हर बूथ पर नए समर्थक जोड़ने, वोटरों को सक्रिय करने और संगठन की पहुंच गांव स्तर तक बढ़ाने की योजना सफल हुई तो बीजेपी के मजबूत गढ़ों में भी मुकाबला कठिन बनाया जा सकता है। सपा मुखिया के इस बयान को संगठन को ग्राउंड लेवल पर ऐक्टिवेट करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। दरअसल, अखिलेश विधानसभावार लक्ष्य देकर संगठन को पहले से ऐक्टिवेट करना चाहते हैं।

लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें

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