कानपुर की सड़कों पर दम तोड़ती व्यवस्था, 5 महकमे, 15 बैठकें... नतीजा सिर्फ 'महाजाम' - kanpur traffic jam 5 departments 15 meetings but traffic jams continue
कानपुर की सड़कों पर दम तोड़ती व्यवस्था, 5 महकमे, 15 बैठकें... नतीजा सिर्फ 'महाजाम' कानपुर की सड़कें अब केवल मंजिल का रास्ता नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और अव्यवस्था की दर्दनाक तस्वीर बन चुकी ...और पढ़ें HighLights…

सौजन्य से:- Jagran
कानपुर की सड़कों पर दम तोड़ती व्यवस्था, 5 महकमे, 15 बैठकें... नतीजा सिर्फ 'महाजाम'
कानपुर की सड़कें अब केवल मंजिल का रास्ता नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और अव्यवस्था की दर्दनाक तस्वीर बन चुकी ...और पढ़ें
HighLights
- शहर और आबादी बढ़ने के साथ सिकुड़ती गईं सड़कें, सुगम यातायात के लिए कागजों में ही बनती रहीं योजनाएं
- यातायात, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, केडीए और पुलिस विभाग के बीच तमाम बैठकों के बाद भी नतीजा सिफर
- 75,619 ई-रिक्शा या अन्य थ्री व्हीलर हैं शहर में, -593 एंबुलेंस पंजीकृत हैं , 1400 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था है तीन नए मल्टीलेवल पार्किंग में
जागरण संवाददाता, कानपुर। शहर की जो सड़कें हमारी मंजिल का रास्ता थीं, वे अब जनता की बेबसी और सरकारी नाकामी की दर्दनाक तस्वीर बन चुकी हैं। हर दिन लाखों लोग सड़कों पर सिर्फ सफर नहीं करते, बल्कि रेंगते ट्रैफिक, बेलगाम अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के नरक से जूझते हैं। सबसे शर्मनाक यह है कि इसी अव्यवस्था के बीच कहीं जिंदगी बचाने निकली एंबुलेंस दम तोड़ती है तो कहीं मासूम बच्चे स्कूल जाने के बजाय घंटों धूल-धुएं के बीच खड़े रहते हैं।
आबादी और गाड़ियां बढ़ती गईं, लेकिन योजनाकारों का ट्रैफिक मैनेजमेंट सोया रहा। यातायात व्यवस्था की इसी हकीकत को सामने लाने और जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से दैनिक जागरण चार दिवसीय अभियान शुरू कर रहा है। इसमें शहर की यातायात व्यवस्था का जमीनी सच, खामियां और सुधार के रास्ते सामने रखे जाएंगे। पढ़िए, जागरण संवाददाता रितेश द्विवेदी की रिपोर्ट...
्र
झकरकटी पुल पर लगा जाम। जागरण
करीब 60 लाख की आबादी वाले शहर की सड़कें सिर्फ वाहनों का बोझ नहीं ढो रहीं, बल्कि वर्षों की अनदेखी का भार भी उठा रही हैं। आबादी बढ़ी, वाहनों की संख्या बढ़ी, बाजारों का विस्तार हुआ और शहर की सीमाएं फैलती गईं, लेकिन सड़कें, पार्किंग, फुटपाथ और यातायात प्रबंधन का प्लान फाइलों से बाहर निकलकर विकसित नहीं हो सका।
नतीजा यह है कि उद्योग और कारोबार की पहचान रखने वाला शहर आज रोजाना जाम के आगे बेबस नजर आता है। सुबह घर से निकलने वाला व्यक्ति यह नहीं जानता कि सड़क से चौराहे तक पहुंचने में कितना समय लगेगा और शाम को लौटते समय किस सड़क पर यातायात थम जाएगा। यह केवल यातायात का संकट नहीं है। यह शहर की विकास व्यवस्था का एक्स-रे रिपोर्ट है।
सड़क पर खड़ा एक वाहन, फुटपाथ पर लगी एक दुकान, नाले के ऊपर बना अतिक्रमण, अधूरी सड़क और गलत जगह लगा बैरिकेड ये सभी मिलकर उस व्यवस्था को कमजोर करते हैं, जिसकी कीमत आम नागरिक अपने समय, ईंधन और मानसिक तनाव से चुका रहा है।
सुगम यातायात की राह की सबसे बड़ी बाधाओं की बात करें तो अतिक्रमण, टूटी सड़कें, बेतरतीब निर्माण कार्य, खराब ट्रैफिक लाइटें, पार्किंग की कमी, फुटपाथ पर कब्जे, आटो-टेंपो स्टैंड की कमी, बेलगाम ई-रिक्शा चालक और नियम उल्लंघन सबसे प्रमुख हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत है। विभागों में समन्वय बनाकर कार्रवाई हो और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जाए तो इस समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है।
वीआइपी आगमन पर इसका उदाहरण धरातल पर कई बार शहर की जनता ने देखा भी है। ऐसा नहीं है कि इसके लिए प्रयास नहीं किया गया। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और इसकी राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई। इसमें यातायात, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, केडीए और पुलिस विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। लगातार बैठकों का दौर चला, कार्ययोजनाएं बनीं।
सड़कों के चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने, ब्लैक स्पाट खत्म करने और ई-रिक्शा को नियंत्रित करने के लिए योजना बनाई गई। अफसोस, ये योजनाएं कागजों में ही दम तोड़ गईं। कभी अफसरों के तबादले का बहाना बनाया गया तो कभी संसाधनों की कमी का रोना रोते रहे।
सवाल उठने पर विभागों के जिम्मेदार अफसरों ने कार्रवाई के नाम पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप दी। नतीजा, करीब तीन साल से बनी योजनाएं अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाईं और जनता ध्वस्त यातायात व्यवस्था का दंश झेल रही है।
सुगम यातायात की राह में ये हैं प्रमुख बाधाएं
- बेलगाम आटो, ई-रिक्शा
- बेतरतीब निर्माण कार्य
- सड़कों और फुटपाथ पर अतिक्रमण
- टूटी जर्जर सड़कें
- खराब ट्रैफिक लाइटें
- पार्किंग की कमी
- यातायात नियमों का उल्लंघन
सुगम यातायात के लिए इन तीन प्रमुख विभागों पर यह है जिम्मेदारी
1: यातायात पुलिस
- चौराहों पर गाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित करना और जाम लगने से रोकना।
- ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग और नशे में गाड़ी चलाने वालों पर जुर्माना लगाना।
- सड़कों को ब्लाक करने वाले वाहनों को क्रेन से हटाना और चालान करना।
- एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे वाहनों को प्राथमिकता से रास्ता दिलाना।
- नगर निगम के साथ मिलकर सड़कों और फुटपाथों को अवैध कब्जों से मुक्त कराना।
2: नगर निगम
- फुटपाथों, सड़कों और चौराहों पर से अवैध दुकानों, ठेलों और स्थायी-अस्थायी कब्जों को हटाना।
- व्यस्त व्यापारिक और सार्वजनिक क्षेत्रों में पर्याप्त पार्किंग, मल्टीलेवल पार्किंग और वेंडिंग जोन की व्यवस्था करना।
- सड़कों को गड्ढा मुक्त रखना, जेब्रा क्रासिंग व लेन की मार्किंग करना और मुख्य मार्गों पर डिवाइडर व संकेतक लगाना।
- सड़कों पर पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करना और जलभराव को रोकना, ताकि इससे यातायात ठप न हो।
- सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों को पकड़ना, जो अक्सर बड़े हादसों और अचानक लगने वाले जाम का कारण बनते हैं।
3: पुलिस विभाग
- त्योहारों या बड़े जाम के दौरान ट्रैफिक पुलिस बल को मदद करना।
- अवैध रूप से चलने वाले आटो, टेंपो और ई-रिक्शा स्टैंड्स को हटाना।
- व्यस्त बाजारों और नो-इंट्री जोन में भारी वाहनों के अवैध प्रवेश को रोकना।
- नगर निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद दोबारा अतिक्रमण न होने देना।
- सड़क दुर्घटना होने पर तुरंत मौके पर पहुंचकर कानून व्यवस्था संभालना और रास्ता साफ करवाना।
बोले जिम्मेदार....
जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, केडीए और यातायात पुलिस अधिकारियों की पूर्व ही कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी के सुझाव पर सड़कों के चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने के साथ ही ब्लैक स्पाट खत्म करने की कार्रवाई की जा रही है। ई-रिक्शा को नियंत्रित करने के लिए भी एक्शन प्लान तैयार किया गया था। जल्द ही कमेटी की बैठक करके इन समस्याओं के निराकरण के लिए कदम उठाए जाएंगे।
के. विजयेन्द्र पांडियन, मंडलायुक्त
शहरी क्षेत्र में 10 से अधिक सड़कों के चौड़ीकरण के साथ डिवाइडर बनाने का कार्य किया जा रहा है। कालपी रोड, मैनावती मार्ग, चावला मार्केट से किदवई नगर रोड के साथ ही बर्रा बाईपास से श्रीराम चौक तक सड़कों का चौड़ीकरण किया गया, इसके साथ ही चौराहों के चौड़ीकरण को लेकर प्लान तैयार किया जा रहा है। वाहनों की संख्या जितनी तेजी से बढ़ रही है, सड़कों की लंबाई और चौड़ीकरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में आबादी अधिक होने और जमीन उपलब्ध नहीं होने से समस्या होती है। जहां संभव है वहां चौड़ीकरण किया जा रहा है।
रविदत्त कुमार, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम लगातार काम कर रहा है। सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग को हटाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रमुख मार्गों और चौराहों को चिह्नित कर यातायात के दबाव को कम करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मल्टीस्टोरी पार्किंग का अधिक से अधिक उपयोग हो, इसके लिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। सड़क, फुटपाथ और नालियों से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा। जहां भी विभागीय स्तर पर कमियां सामने आएंगी, वहां जिम्मेदारी तय कर सुधार कराया जाएगा।
अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

UP में पलटी मारेगा मौसम! लखनऊ समेत इन 20 जिलों में बारिश का अलर्ट

Varanasi News: शिवपुर में बस की टक्कर से ठेकेदार की मौत

कानपुर में दवा कारोबारी हत्याकांड में बेटा गिरफ्तार, नौकर का दावा- शालू ने नहीं सुब्रत ने करवाई पिता की हत्या - kanpur vineet minocha murder case son subrat arrested confronted with shalu during probe


