होमक्राइमप्रयागराज में 44 राजघरानों की 12 हजार करोड़ की संपत्ति पर 'कब्जा', 44 रियासतों की संपत्तियों की जांच शुरू - prayagraj probe into 12000 cr royal properties encroachment
क्राइम

प्रयागराज में 44 राजघरानों की 12 हजार करोड़ की संपत्ति पर 'कब्जा', 44 रियासतों की संपत्तियों की जांच शुरू - prayagraj probe into 12000 cr royal properties encroachment

प्रयागराज में 44 राजघरानों की 12 हजार करोड़ की संपत्ति पर 'कब्जा', 44 रियासतों की संपत्तियों की जांच शुरू प्रयागराज में 44 रियासतों की 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर कब्जा हो गया ...और पढ़ें…

Jagran के अनुसार17 सितंबर 2026 को 08:04 am बजे
प्रयागराज में 44 राजघरानों की 12 हजार करोड़ की संपत्ति पर 'कब्जा', 44 रियासतों की संपत्तियों की जांच शुरू
 - prayagraj probe into 12000 cr royal properties encroachment

सौजन्य से:- Jagran

प्रयागराज में 44 राजघरानों की 12 हजार करोड़ की संपत्ति पर 'कब्जा', 44 रियासतों की संपत्तियों की जांच शुरू

प्रयागराज में 44 रियासतों की 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर कब्जा हो गया ...और पढ़ें

HighLights

- प्रयागराज में 44 रियासतों की 12 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति।

- इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक संपत्तियों पर दशकों से है कब्जा।

- जिला प्रशासन ने जांच कमेटी गठित करने का प्रस्ताव किया तैयार।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। राजघराने अब बीते जमाने की बात भले ही हो गए मगर अपनी वैभवशाली विरासत, परंपरा और शान की कहानी कहते आज भी कुछ राजमहल खड़े हैं। संगम नगरी में देश के विभिन्न राज्यों की 44 रियासतों की 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्तियां हैं। इनमें 70 प्रतिशत से ज्यादा की संपत्तियों पर यहां के लोगो का दशकों से कब्जा है। अब संबंधित राज्यों की ओर से इन संपत्तियों पर अधिकार प्राप्त होने से इनकी जानकारी जुटाई जाने लगी है।

हाल ही में जयपुर राजघराने की संपत्ति को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार हुआ है। इसके पहले बिहार के बेतिया राजघराने की संपत्तियों के लिए कार्यवाही शुरू हुई है। बिहार सरकार की ओर से शहर में कार्यालय भी खोल दिया गया है, जिसमें राजस्व परिषद के अफसर भी तैनात हैं।

प्रयागराज के धार्मिक, रणनीतिक और राजनीतिक महत्व के चलते वैभवशाली राजाओं ने इस शहर में महल और कोठियों का निर्माण कराया था। धर्मशाला, सरांय, बाजार और कई स्थानों घाट भी बनवाए गए थे। कुंभनगरी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न नजपदों के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, उड़ीसा की रियासतों की संपत्तियां हैं।

इनमें कोठियां, महल, घाट, धर्मशाला व सरांय तक शामिल हैं। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन ने इन रियासतों की संपत्तियों की मौजूदा हालत का पता करने के लिए जांच कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में एडीएम सिटी, मुख्य राज्सव अधिकारी, एसडीएम सदर, एसडीएम करछना, एसडीएम फूलपुर व एस़डीएम सोरांव तथा एआइजी स्टांप को शामिल करेन का प्रस्ताव तैयार कराया गया है।

जिन राज्यों की रियासतों की संपत्तियां हैं, वहां के अधिकारी एसआइटी से समन्वय बनाकर कार्यवाही आगे बढ़ाएंगी। दरअसल, इन रियासतों की 70 से 75 प्रतिशत संपत्तियों पर कब्जा हो चुका है। यही नहीं कब्जेदारी, किराएदारी और बेदखली के सैकड़ों के मुकदमें विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। जांच कमेटी दस्तावेजों को खंगालेगी और फिर इसकी रिपोर्ट उत्तर राजस्व परिषद को भेजी जाएगी।

राजस्थान की मंत्री दिया कुमारी ने दिखाई रुचि, दो प्रदेशों के अफसरों ने बढ़ाए कदम

प्रयागराज शहर के कटरा, मेंहदौरी, राजापुर, टैगोर टाउन के फतेहपुर बिछुआ में लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में राजस्थान के जयपुर स्टेट की संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों की जानकारी होने पर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री तथा जयपुर स्टेट की उत्तराधिकारी दिया कुमारी ने रुचि दिखाई।

इस पर राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने उत्तर सरकार के राजस्व परिषद के आयुक्त को पत्र भेजा है। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन ने भी तेजी से कदम बढ़ा दिए। परिषद के आयुक्त के पत्र पर डीएम प्रयागराज ने जय स्टेट की संपत्तियों की जांच कर दस्तावेजों को तलब कर लिया है।

जयपुर स्टेट की सबसे ज्यादा संपत्ति कटरा में है। लक्ष्मी टाकीजा चौराहा, मनमोहन पार्क चौराहे पर करोड़ों की संपत्तियां हैं। नेतराम चौराहा से मनमोहन पार्क चौराहा, विवि मार्ग चौराहे से विज्ञान संकाय मार्ग पर भी संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों की देखरेख के लिए कटरा में गल्ला मंडी में जयपुर स्टेट का कार्यालय भी खोला गया था। राजघराने के अंतिम राजा सवाई मान सिंह ने यह कार्यालय खोलवाया था।

इसमें उपेंद्र सिंह प्रबंधक थे। उनके साथ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती की गई थी। उपेंद्र के सेवानिवृत्त होेने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के निधन के बाद लगभग चार वर्षों से यह कार्यालय बंद हो गया। कुल संपत्तियों में लगभग 20 प्रतिशत संपत्तियों की बिक्री की जा चुकी है।अब बची हुई 80 फीसद संपत्तियों के लिए ही आगे की कार्यवाही होगी।

यह भी पढ़ें- प्रयागराज में सीएम सुरक्षा की रिजर्व ड्यूटी से 44 पुलिसकर्मी गैरहाजिर, मांगा गया स्पष्टीकरण

निम्न प्रमुख राज्यों और स्थानीय रियासतों की संपत्तियां

- रीवा राज्य (मध्य प्रदेश), ग्वालियर रियासत (सिंधिया राजवंश -मध्य प्रदेश), दरभंगा राज (बिहार), बेतिया राज (बिहार), जयपुर स्टेट (राजस्थान), जोधपुर राजघराना (राजस्थान), होल्कर स्टेट।

- मांडा राजघराना (पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह का), शंकरगढ़ रियासत, दारागंज में बड़ी कोठी, मझली कोठी और छोटी कोठी। आनापुर स्टेट, ढिंगवस कोठी अलोपीबाग, बरांव स्टेट, काशी नरेश की कोठी, डैया राजघराना, कालाकांकर स्टेट, भदरी स्टेट।

यह भी पढ़ें- नाबालिग रेप पीड़िता के गर्भपात पर हाई कोर्ट सख्त, CMO प्रयागराज को 48 घंटे का अल्टीमेटम

शहर तथा आसपास विभिन्न रियासतों की संपत्तियों की मौजूदा हालत की जांच के लिए जल्द ही उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित होगी। जयपुर स्टेट की संपत्तियों की राजस्व अभिलेख तलब किए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट शीघ्र राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश को भेजी जाएगी। फिर परिषद के निर्णय पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें