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यूपी चुनाव की लड़ाई महिला वोट बैंक तक आई; फ्री बस सेवा से लेकर 40 हजार के दावे तक, क्या बदलेगी सियासत

महिला वोट बैंक ने हाल के चुनाव में जिस प्रकार से चुनावी समीकरणों को बदला है, उसने तमाम राजनीतिक दलों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी है। राजनीतिक दलों को इस वोट बैंक के लिए रणनीति तैयार करने पर मजबूर कर दिया है। यही वजह है…

Navbharat Times के अनुसार26 अगस्त 2026 को 03:23 pm बजे
यूपी चुनाव की लड़ाई महिला वोट बैंक तक आई; फ्री बस सेवा से लेकर 40 हजार के दावे तक, क्या बदलेगी सियासत

सौजन्य से:- Navbharat Times

महिला वोट बैंक ने हाल के चुनाव में जिस प्रकार से चुनावी समीकरणों को बदला है, उसने तमाम राजनीतिक दलों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी है। राजनीतिक दलों को इस वोट बैंक के लिए रणनीति तैयार करने पर मजबूर कर दिया है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के मुद्दे राजनीतिक मैदान में गरमा गए हैं। हर दल की कोशिश महिला वोट बैंक को अपने पाले में लाने की है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने जहां बुधवार को फ्री बस सेवा की सौगात दी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस मौके पर एक के बाद एक कई घोषणाएं कर डाली। इसमें सरकार बनने पर 40,000 रुपये की आर्थिक मदद का दावा भी किया गया है।

महिला वोट बैंक क्यों अहम?

आधी आबादी ने हाल के चुनावों में अपनी अलग धारा अपनाई है। पिछले दो विधानसभा चुनावों के रिजल्ट ने महिला वोट बैंक की बदलती रणनीति को साफ कर दिया है। बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला वोट बैंक जिस प्रकार से बाजी पलटती दिखी हैं, उसने तमाम राजनीतिक दलों के समीकरण को ध्वस्त कर दिया है। यूपी चुनाव 2022 में भी महिला वोट बैंक ने साइलेंट वोटर के तौर पर बाजी पलटने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं को नकद राशि देने के मामले ने बड़ी भूमिका निभाई।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिलाओं के सामने असुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा था। इसके अलावा धर्म के मुद्दे पर भी वे एकजुट हुईं। इस मामले ने प्रदेश में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। आरजी कर में छात्रा के साथ घटना ने आग में घी का काम किया। महिला ने ममता बनर्जी की बाजी पलट दी। कुछ ऐसा ही माहौल 2022 के यूपी चुनाव में बना था। 2017 के पहले महिलाओं के सामने असुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा था।

यूपी चुनाव 2022 के दौरान अखिलेश यादव ने सीएम योगी को 'बुलडोजर बाबा' नाम दिया। इस नाम को सीएम योगी ने चुनावी मुद्दा बनाया। महिलाओं की सुरक्षा के मसले को सीएम योगी लगातार उठाते रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बुलडोजर एक्शन, हाफ एनकाउंटर से एनकाउंटर तक के मामले लगातार सामने आए हैं। ऐसे में भाजपा सरकार महिलाओं को साधने की रणनीति में आगे बढ़ती दिखी है। दरअसल, 2024 में करीब 5 फीसदी महिला वोट भाजपा से छिटकता दिखा था। इसको लेकर अब योगी सरकार एक्शन मोड में दिख रही है।

योगी सरकार का बड़ा निर्णय

महिलाओं को लेकर सीएम योगी ने बड़ा निर्णय लिया है। 60 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को आजीवन फ्री बस सेवा का लाभ दिया जाएगा। पहले भी यूपी सरकार रक्षाबंधन के मौके पर बहनों को फ्री बस राइड का तोहफा देती रही थी। इस बार का तोहफा खास है। इसके अलावा योगी सरकार ने छात्राओं को स्कूटी से लेकर आर्थिक मदद की कई योजनाओं को शुरू किया हुआ है। इसका लाभ महिलाओं को मिला है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार बिहार की तर्ज पर नकद राशि दिए जाने की योजना ला सकती है।सपा का ऐलान अहम

समाजवादी पार्टी ने भी रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की महिला वोटरों को साधने के लिए बड़ी घोषणा की। अखिलेश यादव ने स्वयं सरकार बनने पर 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया। महिलाओं के हित में कई बड़े ऐलान किए गए। हालांकि, इस ऐलान के बाद से अखिलेश यादव से सहयोगी कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी के ऐलान पर सवाल शुरू हो गया। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान रिजल्ट आने के बाद खटाखट-खटाखट एक लाख रुपये खाते में आने का ऐलान किया था। चुनाव के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने कांग्रेस दफ्तर पहुंच कर फॉर्म भी जमा कराए।राहुल गांधी की घोषणा चुनावी घोषणा साबित हुई। बाद में कांग्रेस की ओर से सरकार बनने की स्थिति में इस चुनावी वादे को पूरा किए जाने की बात कही गई। अखिलेश यादव की इस घोषणा को महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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