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क्या उत्तर प्रदेश 4 राज्यों में बंटेगा? ओम प्रकाश राजभर के बयान से चर्चा गरम, जानें कानूनी प्रावधान

Explainer: क्या उत्तर प्रदेश 4 राज्यों में बंटेगा? ओम प्रकाश राजभर के बयान से चर्चा गरम, जानें कानूनी प्रावधान उत्तर प्रदेश को 4 हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव नया नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की…

Hindustan के अनुसार21 सितंबर 2026 को 08:04 pm बजे
क्या उत्तर प्रदेश 4 राज्यों में बंटेगा? ओम प्रकाश राजभर के बयान से चर्चा गरम, जानें कानूनी प्रावधान

सौजन्य से:- Hindustan

Explainer: क्या उत्तर प्रदेश 4 राज्यों में बंटेगा? ओम प्रकाश राजभर के बयान से चर्चा गरम, जानें कानूनी प्रावधान

उत्तर प्रदेश को 4 हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव नया नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा ने ध्वनिमत से राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था।

उत्तर प्रदेश को 4 अलग-अलग राज्यों में बांटने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि राज्य का चार हिस्सों में बंटना तय है और जातीय जनगणना पूरी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राजभर ने दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत तौर पर बात की है और उन्हें भरोसा दिया गया कि जातीय जनगणना पूरी होने के बाद राज्य के बंटवारे में कोई रुकावट नहीं होगी। हालांकि, अभी केंद्र सरकार की ओर से यूपी को चार राज्यों में बांटने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी शर्त साफ है। उनके मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में राजभर समुदाय का वोट हिस्सा सबसे बड़ा है, इसलिए प्रस्तावित पूर्वांचल के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर राजभर समुदाय का बेटा होना चाहिए। राजभर ने कहा, ‘युवाओं, हिम्मत मत हारो। राज्य को 4 हिस्सों में बांटा जाएगा। जिस दिन पूर्वांचल राज्य बनेगा, अगर किसी जाति से मुख्यमंत्री बनना होगा, तो पूर्वांचल का मुख्यमंत्री राजभर का बेटा ही बनेगा। काम करते समय यह बात ध्यान में रखना। सपा, बसपा या कांग्रेस में शामिल होने के लिए गुमराह मत होना।’

यूपी को बांटकर किन 4 नए राज्यों की बात

उत्तर प्रदेश को 4 हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव नया नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा ने ध्वनिमत से राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था। इसमें पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, यह प्रस्ताव केंद्र के स्तर पर आगे नहीं बढ़ सका और संसद से इसे मंजूरी नहीं मिली। प्रस्तावित चार क्षेत्रों में पूर्वांचल में गोरखपुर और वाराणसी जैसे पूर्वी जिलों को रखा गया था। पश्चिम प्रदेश या हरित प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र, बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश की सीमा से लगे दक्षिणी और सूखा प्रभावित इलाके, जबकि अवध प्रदेश में लखनऊ के आसपास के मध्य क्षेत्र शामिल करने की कल्पना की गई थी।

राज्य के बंटवारे का क्या है कानूनी प्रावधान?

कानूनी तौर पर उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटना संभव है। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत मौजूदा राज्य की सीमा बदलकर नया राज्य बनाया जा सकता है। इसके लिए संसद में विधेयक पेश किया जाता है, लेकिन ऐसा विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पेश हो सकता है। इसके बाद राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य की विधानसभा के पास उसकी राय जानने के लिए भेजते हैं। विधानसभा को एक तय समय में अपनी राय देनी होती है। हालांकि, विधानसभा की राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती। यानी उत्तर प्रदेश विधानसभा प्रस्ताव का समर्थन करे या विरोध, अंतिम फैसला संसद के पास रहता है। संविधान में राज्य के पुनर्गठन के लिए अलग से संविधान संशोधन की जरूरत नहीं बताई गई है।

यूपी के बंटवारे पर फिलहाल महज चर्चा

अगर उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इसके लिए संसद में पुनर्गठन से जुड़ा कानून पारित करना होगा। पुराने प्रस्ताव के अनुसार, ये चार हिस्से पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश होंगे। लेकिन अभी यह केवल राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय है। ओम प्रकाश राजभर का ताजा बयान जातीय जनगणना के बाद बंटवारे की बात करता है, जबकि उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में बंटवारे का कोई नया औपचारिक फैसला या केंद्र की मंजूरी सामने नहीं आई है। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि किसी राज्य का बंटवारा केवल राजनीतिक बयान से नहीं होता, बल्कि इसके लिए राष्ट्रपति की सिफारिश, विधानसभा से राय और संसद की विधायी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

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