होमक्राइमराज्य कर विभाग वाराणसी की जांच में रेलवे ठेकेदार फर्म की जांच में 4.25 करोड़ की कर चोरी उजागर - state tax department inspects varanasi reveals tax theft of rupees over four crore in railway contractor firm
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राज्य कर विभाग वाराणसी की जांच में रेलवे ठेकेदार फर्म की जांच में 4.25 करोड़ की कर चोरी उजागर - state tax department inspects varanasi reveals tax theft of rupees over four crore in railway contractor firm

राज्य कर विभाग वाराणसी की जांच में रेलवे ठेकेदार फर्म की जांच में 4.25 करोड़ की कर चोरी उजागर राज्य कर विभाग वाराणसी की विशेष अनुसंधान शाखा ने बीएलडब्ल्यू के पास एक रेलवे ठेकेदार फर्म और टेंट हाउस फर्म ...और पढ़ें HighLi…

Jagran के अनुसार22 सितंबर 2026 को 12:04 pm बजे
राज्य कर विभाग वाराणसी की जांच में रेलवे ठेकेदार फर्म की जांच में 4.25 करोड़ की कर चोरी उजागर
 - state tax department inspects varanasi reveals tax theft of rupees over four crore in railway contractor firm

सौजन्य से:- Jagran

राज्य कर विभाग वाराणसी की जांच में रेलवे ठेकेदार फर्म की जांच में 4.25 करोड़ की कर चोरी उजागर

राज्य कर विभाग वाराणसी की विशेष अनुसंधान शाखा ने बीएलडब्ल्यू के पास एक रेलवे ठेकेदार फर्म और टेंट हाउस फर्म ...और पढ़ें

HighLights

- रेलवे ठेकेदार फर्म में 4.25 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी उजागर।

- अनुचित आईटीसी क्लेम और मैनपावर सप्लाई की आय छिपाई गई।

- पंजीकरण रद्द होने के बाद भी टेंट हाउस फर्म का कारोबार जारी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। राज्य कर विभाग वाराणसी के प्रथम जोन की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) की वाराणसी इकाई ने बीएलडब्ल्यू के पास स्थित रेलवे ठेकेदार फर्म और उसी परिसर में संचालित टेंट हाउस फर्म की जांच में करोड़ों रुपये की जीएसटी कर चोरी उजागर की है।

रेलवे ठेकेदार फर्म में करीब 4.25 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आई है। जांच के बाद फर्म ने अब तक 46.64 लाख रुपये जमा किए हैं, जबकि शेष कर शीघ्र जमा करने का आश्वासन दिया है। विभाग के अनुसार ठेकेदार फर्म सिविल निर्माण के साथ मैनपावर सप्लाई का काम करती है।

जेम पोर्टल के माध्यम से विभिन्न विभागों से मैनपावर सप्लाई के ठेके लेने के बावजूद वर्ष 2025-26 के रिटर्न में वर्क कांट्रैक्ट सेवा के अतिरिक्त अन्य आपूर्ति नहीं दिखाई गई। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच फर्म को 5.50 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिला, लेकिन इस पर एक करोड़ रुपये से अधिक का कर जमा नहीं किया गया।

जांच में बिना खरीद के 2.88 करोड़ रुपये की अनुचित आइटीसी (इंपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम करने और अन्य फर्मों के फर्जी बिलों के आधार पर करीब 36 लाख रुपये की आइटीसी लेने का मामला भी सामने आया। इस तरह अनुचित आइटीसी के जरिये तीन करोड़ रुपये से अधिक के कर चोरी का पता चला।

पंजीयन रद होने के बाद भी चल रहा था टेंट हाउस का कारोबार

उसी परिसर में संचालित दूसरी फर्म का जीएसटी पंजीयन मार्च 2026 में निरस्त हो चुका था। जुलाई 2025 से रिटर्न भी दाखिल नहीं किया गया, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर कैटरिंग और टेंट सामग्री किराये पर देने का कारोबार चलता मिला। टीम ने एक दर्जन से अधिक रजिस्टर और बिल बुक जब्त की हैं। प्रारंभिक जांच में वर्ष 2022-23 से अब तक दो से ढाई करोड़ रुपये की बिक्री सामने आई जिसका इन्होंने जीएसटी रिटर्न में घोषित नहीं किया था।

अपर आयुक्त ग्रेड-2 (एसआइबी) दीप्ति कटियार ने बताया कि मैनपावर सप्लाई में वास्तविक आइटीसी की गुंजाइश कम रहती है। इसके बावजूद रिटर्न में अनुचित आइटीसी का सुनियोजित उपयोग कर कर चोरी किया गया। उन्होंने कहा कि फर्जी बिल, अवैध आइटीसी और टर्नओवर छिपाने के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

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