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ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-37 जोनल स्पोर्ट्स में कॉम्प्लेक्स पर पुलिस ने जड़ दिया ताला, लोग भड़के

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम को लेकर विवाद हो गया है। ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम को लेकर विवाद रविवार…

Navbharat Times के अनुसार7 सितंबर 2026 को 06:31 am बजे
ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-37 जोनल स्पोर्ट्स में कॉम्प्लेक्स पर पुलिस ने जड़ दिया ताला, लोग भड़के

सौजन्य से:- Navbharat Times

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम को लेकर विवाद हो गया है।

ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित हॉकी स्टेडियम को लेकर विवाद रविवार को सड़क पर उतर आया। विरोध के बीच पुलिस ने रविवार सुबह खेल मैदान के मुख्य गेट पर ताला जड़कर लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। मैदान बंद नियमित अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के साथ वॉक करने पहुंचे लोगों को भी दिक्कत हुई। गेट पर पुलिस बल की तैनाती ने माहौल को और गरमा दिया।

नाराज लोगों ने मौके पर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। तालाबंदी की सूचना पर अधिवक्ता उमेश भाटी भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक हुई। उमेश भाटी ने आरोप लगाया कि विरोध करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करा रहे हैं और लोगों को उकसाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि खिलाड़ियों के अभ्यास के मैदान को ही बंद करना समस्या का समाधान कैसे हो सकता है।

हॉकी स्टेडियम बनाने का विरोध नहीं

जोनल स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स बचाओ समिति के सतेंद्र नागर और मुकेश विधूड़ी ने कहा कि यह शहर का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान है, जहां 15 से 20 खेलों के खिलाड़ी नियमित अभ्यास करते हैं। मैदान बंद होने से इनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि हॉकी स्टेडियम बनाने का विरोध नहीं है, लेकिन इसके लिए दूसरी जगह तय हो। समिति ने मंग की कि मैदान को पहले की तरह खिलाड़ियों के लिए खोला जाए और हॉकी स्टेडियम के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशा जाए। सोमवार को प्राधिकरण के अधिकारियों से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।

मैदान बना राजनीति का अखाड़ा

ग्रेटर नोएडा सेक्टर-37 स्थित स्पोर्ट्स ग्राउंड इन दिनों खेल से ज्यादा राजनीतिक वर्चस्व की जंग का मैदान बनता नजर आ रहा है। एक ओर सासद, दादरी विधायक, एमएलसी, खिलाड़ी और आसपास की आरडब्ल्यूए, फेडरेशन और अन्य लोग मौजूदा स्वरूप में मैदान को बनाए रखने की मांग कर रहे है। जन प्रतिनिधियों ने इसकी यथास्थिति के लिए प्राधिकरण को लेटर भी लिखे है। दूसरी ओर होंकी से जुड़े लोग व एक अन्य विधायक इस ग्राउंड को हॉकी स्टेडियम में तब्दील कराना चाहते हैं। इस खींचतान का असर खिलाड़ियों पर पड़ रहा है।

निवासियों के मुताबिक, सेक्टर-37 का यह मैदान आसपास के 12 सेक्टरों और 10 सोसायटियो के लिए महत्वपूर्ण है। यहा विभिन्न खेलो के खिलाड़ी अभ्यास करते है। युवा पुलिस और सेना की भर्ती के लिए फिजिकल की तैयारी करते हैं। सुबह के समय लोग टहलने के लिए आते है।

दोनों पक्षों के हैं अपने-अपने तर्क

हॉकी मैदान के समर्थको का तर्क है कि क्षेत्र में बेहतर हॉकी सुविधाए विकसित होने से खिलाडियों को लाभ मिलेगा। वहीं इसका विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि किसी एक खेल के लिए मैदान को समर्पित करने से अन्य खेलों के लिए जगह सीमित हो जाएगी। हॉकी के मैच साल में एक-दो बार होंगे। हॉकी के लिए जीबीयू में स्टेडियम बनाया जा सकता है।

क्या आपको लगता है कि खेल मैदान को बंद करना खिलाड़ियों की तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा? इस मुद्दे पर अपने विचार कमेंट में बताएं।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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