होमक्राइमयूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा: ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन; 75 जिलों में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
क्राइम

यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा: ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन; 75 जिलों में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

- Hindi News - Up khaas - UP Police Special 32 Forensic Experts To Boost Crime Scene Investigation यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा:‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन; 75 जिलों में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य जुटाने की…

Dainik Bhaskar के अनुसार22 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा:  ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन; 75 जिलों में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Up khaas

- UP Police Special 32 Forensic Experts To Boost Crime Scene Investigation

यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा:‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन; 75 जिलों में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

- कॉपी लिंक

उत्तर प्रदेश में अपराध की जांच को अब और वैज्ञानिक बनाने की तैयारी है। घटनास्थल पर मिले छोटे से छोटे साक्ष्य को सुरक्षित रखने और उसे जांच का हिस्सा बनाने के लिए पुलिस के 32 अधिकारियों को विशेषज्ञ के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इन्हें फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है। यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में चल रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन अधिकारियों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल प्रदेश के सभी 75 जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

600 अफसरों में से चुने गए 32 विशेषज्ञ

इससे पहले पुलिस के 600 अधिकारियों को छह बैच में 40-40 दिन की ट्रेनिंग दी गई। हर बैच में 100 अधिकारी शामिल रहे। प्रशिक्षण के बाद इन अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में दूसरे पुलिसकर्मियों को भी ट्रेनिंग दी। अब इन्हीं 600 प्रशिक्षित अधिकारियों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 32 अधिकारियों को चुना गया है। इन्हें फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की एडवांस ट्रेनिंग दी जा रही है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के मुताबिक, इस ट्रेनिंग में अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता पर खास फोकस है। इसके लिए कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर अधिकारियों की क्षमता भी परखी जा रही है।

घटनास्थल से सबूत जुटाने की बारीकियां सीख रहे

मास्टर ट्रेनिंग में पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल की तलाशी और जब्ती के नियमों से लेकर क्राइम सीन नोट्स तैयार करने तक की जानकारी दी जा रही है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के साथ साक्ष्यों की पहचान और उन्हें सुरक्षित तरीके से जुटाने की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है। फिंगरप्रिंट और खून के नमूनों जैसे साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से पहचानने, संग्रह करने और संरक्षित करने पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मकसद यह है कि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्य छूट न जाएं और जांच के दौरान उनका सही इस्तेमाल हो सके।

दिन-रात और अलग-अलग परिस्थितियों में क्राइम सीन की ट्रेनिंग

अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में घटनास्थल को संभालने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें दिन और रात के समय तैयार किए गए क्राइम सीन भी शामिल हैं। ट्रेनिंग के दौरान उन परिस्थितियों पर भी अभ्यास कराया जा रहा है, जहां अपराध के साक्ष्य मिटाने, छिपाने या घटनास्थल के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश हो सकती है। अधिकारियों को ऐसे मामलों में घटनास्थल को सुरक्षित रखने और साक्ष्य की पूरी कड़ी बनाए रखने पर फोकस कराया जा रहा है।

हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग पर जोर

डॉ. जीके गोस्वामी के मुताबिक, आपराधिक जांच में क्राइम सीन मैनेजमेंट की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी वजह से मास्टर ट्रेनिंग में सिर्फ लेक्चर के बजाय हैंड्स-ऑन सेशन और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के लेक्चर के साथ अधिकारियों को मौके पर साक्ष्य पहचानने, उन्हें सुरक्षित करने और घटनास्थल का दस्तावेजीकरण करने का अभ्यास कराया जा रहा है।

75 जिलों में बढ़ेगी वैज्ञानिक जांच की क्षमता

600 अधिकारियों की शुरुआती ट्रेनिंग के बाद 32 विशेषज्ञों को तैयार करने का अगला चरण शुरू किया गया है। इन अधिकारियों के अनुभव का इस्तेमाल आगे जिलों में पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने में किया जाएगा। इससे घटनास्थल, वैज्ञानिक साक्ष्य और विवेचना के बीच की कड़ी मजबूत करने की कोशिश है। साक्ष्यों के बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से संग्रह से जांच को ज्यादा तथ्य आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार की योजना है कि ‘स्पेशल 32’ की विशेषज्ञता का इस्तेमाल प्रदेश के सभी 75 जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाए।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें