उत्तर प्रदेश के सिर्फ 31 घंटे के मुख्यमंत्री, कोर्ट के आदेश से चली गई थी कुर्सी
उत्तर प्रदेश के सिर्फ 31 घंटे के मुख्यमंत्री, कोर्ट के आदेश से चली गई थी कुर्सी उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। यूपी में 1950 से लेकर अब तक कुल 21 व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं,…

सौजन्य से:- Jagran Josh
उत्तर प्रदेश के सिर्फ 31 घंटे के मुख्यमंत्री, कोर्ट के आदेश से चली गई थी कुर्सी
उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। यूपी में 1950 से लेकर अब तक कुल 21 व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिनमें वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हैं। इसके अलावा, कुछ समय के लिए कार्यकारी मुख्यमंत्री भी रहे हैं।
उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। राजनीतिक रूप से यह राज्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि केंद्र की राजनीति का रास्ता यूपी से ही होकर गुजरता है। उत्तर प्रदेश में 1950 से लेकर अब तक कुल 21 व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। इनमें वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं। इनके अलावा, कुछ समय के लिए कार्यकारी मुख्यमंत्री भी रहे हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यूपी में सिर्फ 31 घंटे के सीएम कौन रहे हैं? इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
कौन हैं 31 घंटे के मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक ऐसी राजनीतिक घटना भी हुई थी, जिसमें सिर्फ 31 घंटे बाद ही मुख्यमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा था। यूपी में सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड जगदंबिका पाल के नाम है। वह फरवरी 1998 में मुख्यमंत्री बने थे और अगले 31 घंटे बाद उन्होंने सीएम का पद छोड़ दिया था।
क्यों छोड़ा था पद
इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 21 फरवरी 1998 की रात उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया था और जगदंबिका पाल को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिला दी थी। ऐसे में राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गई थी। हाईकोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था और कल्याण सिंह सरकार को वापस बहाल करने का आदेश दिया था।
जगदंबिका पाल को छोड़ना पड़ा था पद
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अगले दिन यानि 31 घंटे बाद जगदंबिका पाल को अपना सीएम का पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद फ्लोर टेस्ट हुआ और कल्याण सिंह को दोबारा मुख्यममंत्री की कुर्सी मिल गई थी।
कौन हैं जगदंबिका पाल
जगदंबिका पाल ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वर्ष 1997 में अन्य नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने 'अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस' का गठन किया था। हालांकि, बाद में वह कांग्रेस में लौट आए और डुमरियागंज सीट से कांग्रेस से सांसद चुने गए। साल 2014 में वह बीजेपी में शामिल हो गए और लगातार डुमरियागंज से सांसद की सीट जीतते आए हैं। वर्तमान में वह एक लोकसभा सांसद हैं और वक्फ संशोधन विधेयक पर बनी संयुक्त समिति के अध्यक्ष हैं।
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