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जमीन से जुड़े काम के लिए अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, यूपी सरकार ने लॉन्च किए 3 नए ऑनलाइन पोर्टल - up launches online revenue services land records ews digital

जमीन से जुड़े काम के लिए अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, यूपी सरकार ने लॉन्च किए 3 नए ऑनलाइन पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व सेवाओं को डिजिटल करते हुए धारा 116, ईडब्ल्यूएस और सरलीकृत खतौनी पोर्टल लॉन्च किए हैं। H…

Jagran के अनुसार12 सितंबर 2026 को 06:04 am बजे
जमीन से जुड़े काम के लिए अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, यूपी सरकार ने लॉन्च किए 3 नए ऑनलाइन पोर्टल
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सौजन्य से:- Jagran

जमीन से जुड़े काम के लिए अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, यूपी सरकार ने लॉन्च किए 3 नए ऑनलाइन पोर्टल

उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व सेवाओं को डिजिटल करते हुए धारा 116, ईडब्ल्यूएस और सरलीकृत खतौनी पोर्टल लॉन्च किए हैं।

HighLights

- धारा 116, ईडब्ल्यूएस, सरलीकृत खतौनी पोर्टल लॉन्च।

- जमीन बंटवारे, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र अब ऑनलाइन बनेंगे।

- राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, तहसील के चक्कर घटेंगे।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। जमीन का बंटवारा कराना हो या ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनवाना, अब हर कदम पर तहसील की दौड़ लगाने की मजबूरी कम होगी। प्रदेश सरकार ने राजस्व सेवाओं को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए शुक्रवार को धारा 116 पोर्टल, ईडब्ल्यूएस पोर्टल और सरलीकृत खतौनी पोर्टल शुरू कर दिया है।

हालांकि आमजन के लिए यह पोर्टल अगले कुछ दिनों में उपलब्ध हो सकेंगे। इन पोर्टल पर केवल आवेदन ही नहीं होगा, बल्कि प्रकरण किस अधिकारी के पास है, क्या कार्रवाई हुई और कहां लंबित है, इसकी भी आनलाइन निगरानी की जा सकेगी।

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने तीनों पोर्टल का शुभारंभ किया।

साझी जमीन में अपना हिस्सा अलग कराने के लिए सह-खातेदार अब राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत ऑनलाइन वाद दाखिल कर सकेंगे। अभी तक ऐसे मामलों में आवेदन, दस्तावेज, लेखपाल की रिपोर्ट और अन्य प्रक्रियाओं के लिए लोगों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

धारा 116 पोर्टल में जीआईएस तकनीक जोड़ी गई है। इसके जरिए संबंधित जमीन की भौगोलिक स्थिति और नक्शे से जुड़े विवरण देखे जा सकेंगे। इससे राजस्व न्यायालय में चल रहे मामले और मौके पर भूमि की स्थिति के बीच तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। भूमि विभाजन के मामलों में खतौनी, नक्शा और पुराने राजस्व अभिलेख महत्वपूर्ण होते हैं। नई व्यवस्था इन सूचनाओं को तकनीक के माध्यम से एक साथ देखने और मामला निस्तारण अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम है।

ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र में भी घटेगी भागदौड़

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनवाना भी आसान होगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रकरण लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर डिजिटल माध्यम से पहुंचेगा। आवेदक को अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। किस स्तर पर मामला लंबित है, इसकी निगरानी संभव हो सकेगी।

खतौनी अब समझने में होगी ज्यादा आसान

सरलीकृत खतौनी में जमीन का क्षेत्रफल रिकॉर्ड में दिखेगा। अब भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक दर्ज किया जाएगा। इससे छोटे भूखंडों के क्षेत्रफल की जानकारी भी अधिक सटीक मिलेगी। दर्ज पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होगी। इससे जमीन के पुराने स्वामित्व और उस पर हुए आदेशों को समझने में सुविधा होगी।

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