होम›विकास›तेंदुए का नया ठिकाना प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र बना, 3 के आने की पुष्टि; और कितने घूम रहे... पता नहीं - leopard sightings rise in prayagraj gangapar area peoples in penic
विकास

तेंदुए का नया ठिकाना प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र बना, 3 के आने की पुष्टि; और कितने घूम रहे... पता नहीं - leopard sightings rise in prayagraj gangapar area peoples in penic

तेंदुए का नया ठिकाना प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र बना, 3 के आने की पुष्टि; और कितने घूम रहे... पता नहीं प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र तेंदुओं का नया ठिकाना बन गया है, जहाँ 25 किलोमीटर के दायरे में इनकी बढ़ती मौजूदगी ...और…

Jagran के अनुसार8 अक्टूबर 2026 को 05:04 pm बजे
तेंदुए का नया ठिकाना प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र बना, 3 के आने की पुष्टि; और कितने घूम रहे... पता नहीं
 - leopard sightings rise in prayagraj gangapar area peoples in penic

सौजन्य से:- Jagran

तेंदुए का नया ठिकाना प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र बना, 3 के आने की पुष्टि; और कितने घूम रहे... पता नहीं

प्रयागराज का गंगापार क्षेत्र तेंदुओं का नया ठिकाना बन गया है, जहाँ 25 किलोमीटर के दायरे में इनकी बढ़ती मौजूदगी ...और पढ़ें

HighLights

- 25 किलोमीटर के दायरे में तेंदुए यह कभी इस गांव तो कभी उस गांव घूम रहे हैं

- झूंसी स्थित हरिश्चंद्र अनुसंधान केंद्र में बढ़ाए गए पिंजरे, अफसरों ने लिया जायजा

- कछार, झाड़ियों वाले मैदान और खेत-खलिहान दे रही प्राकृतिक आवास की सुविधाएं

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पिछले एक साल से जिस तरह तेंदुए ने संगम नगरी की ओर रुख किया है, वह किसी भी तरह से सुखद नहीं हो सकता। खास बात यह है कि तेंदुओं की सबसे अधिक मौजूदगी गंगापार में है। 25 किमी के दायरे में यह कभी इस गांव तो कभी उस गांव घूम रहे हैं।

सैदाबाद से लेकर झूंसी तक इनकी दहशत

एक तेंदुआ आठ जनवरी को बहादुरपुर के छिवैया में पकड़ा गया। दूसरे की प्रयागराज-मीरजापुर हाईवे पर डिघिया के पास में सड़क हादसे में मौत हो गई। अब एक अन्य तेंदुआ छतनाग स्थित हरिश्चंद्र अनुसंधान संस्थान में देखा गया। अभी और कितने हैं, इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। क्योंकि, सैदाबाद से लेकर झूंसी तक इनकी दहशत है। कोटवा, ऊष्मापुर, सुदनीपुर तो कभी एचआरआई। घूम-फिर कर यह 25 किमी के क्षेत्र में घूम रहे हैं।

घरों से निकलने व खेतों में जाने से हिचक रहे लोग

विशेषज्ञ कहते हैं कि गंगा नदी का किनारा, झांड़ियों वाले मैदान, पेट भरने के लिए नीलगाय, जंगली सुअर, सियार जैसे शिकार और छिपने के लिए खेत, इन्हें प्राकृतिक आवास का अहसास करा रहे हैं। नतीजा, तेंदुए ने यहां कदम जमा लिए हैं। लोगों का घरों से निकलना और खेतों की तरफ जाना दुश्वार है। एचआरआई के शोधार्थी और वैज्ञानिक भी दहशत में है। वन विभाग के अधिकारी तेंदुआ को पकड़ने के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा कर रहे हैं। यहां तक कि अफसर अभी यह नहीं पता लगा सके कि आखिर तेंदुए हैं कितने।

HRI में बढ़ाए गए पिंजरे, अफसरों ने लिया जायजा

छतनाग स्थित एचआरआइ में तेंदुआ दिखने के दूसरे दिन गुरुवार को दो पिंजरे और बढ़ा दिए गए। तीन पिंजरे और नाइट विजन कैमरे पहले से लगे थे। बढ़ाए गए दो पिंजरों में तेंदुआ के कदम रखते ही पिंजरे का दरवाजा बंद हो जाएगा। जबकि, पहले से लगे पिंजरों में तेंदुआ जब मांस खींचता है तो दरवाजा बंद होता है। फूलपुर रेंज के रेंजर लक्ष्मीकांत दुबे ने अपनी टीम के साथ पहुंच कर निरीक्षण किया। कहा कि लगातार निगरानी की जा रही है। दोबारा तेंदुआ नहीं दिखा है।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें