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23 मुकदमे, हत्या, लूट के कई केस, लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर अपराधी

23 मुकदमे, हत्या, लूट के कई केस, लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर अपराधी यूपी एसटीएफ की टीम ने बाराबंकी से किया गिरफ्तार, विधिक कार्रवाई की जा रही. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August 27, 2026 at 7:23 AM IS…

ETV Bharat के अनुसार27 अगस्त 2026 को 03:23 am बजे
23 मुकदमे, हत्या, लूट के कई केस, लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर अपराधी

सौजन्य से:- ETV Bharat

23 मुकदमे, हत्या, लूट के कई केस, लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर अपराधी

यूपी एसटीएफ की टीम ने बाराबंकी से किया गिरफ्तार, विधिक कार्रवाई की जा रही.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 27, 2026 at 7:23 AM IST

लखनऊ: अपराध की दुनिया में लंबा सफर और पुलिस की फाइलों में दर्ज मुकदमों की लंबी फेहरिस्त फिरोज उर्फ इम्तियाज उर्फ बाबर उर्फ मातू एक बार फिर पुलिस के शिकंजे में है. इंदिरानगर थाने में दर्ज मुकदमे में वांछित चल रहे इस आरोपी को यूपी एसटीएफ की टीम ने बाराबंकी के पलहरी चौराहे के पास गिरफ्तार किया है.

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ वर्ष 2013 से 2023 तक 23 मुकदमे दर्ज हैं. इनमें चोरी, लूट, हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं.

तीन महीने पहले जेल से आया था बाहर: एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि फिरोज करीब तीन महीने पहले ही जेल से बाहर आया था. पुलिस के मुताबिक वर्ष 2015 में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के दौरान हुई चुनावी रंजिश में फिरोज और उसके साथियों सुरेंद्र रावत, रामू, रज्जो और राजू ने राम बहादुर सिंह के बेटे दुर्गेश की हत्या कर दी थी.

इस मामले में इंदिरानगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था और फिरोज जेल चला गया था. जेल से बाहर आने के बाद भी उसका नाम एक और मामले में सामने आया.

रात में घर में घुसे, विरोध हुआ तो घायल कर भागे: पुलिस के मुताबिक 24 जुलाई 2025 की रात फिरोज अपने साथियों के साथ इंदिरानगर के अमराही गांव में एक घर में घुसा और चोरी की घटना को दे रहा था. घर के सदस्यों ने विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें घायल कर दिया और वहां से भाग निकले. इस घटना के संबंध में इंदिरानगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. इसी मुकदमे में फिरोज वांछित चल रहा था.

दबिश बढ़ी तो लखनऊ छोड़ बाराबंकी पहुंचा: घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश शुरू की. पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते फिरोज और उसके साथी गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग हो गए और छिपकर रहने लगे. इसी दौरान फिरोज बाराबंकी पहुंच गया. पुलिस के मुताबिक वह वहां किसी से मिलने आया था.

इसी बीच एसटीएफ को उसकी लोकेशन की सूचना मिली. मुखबिर से मिली सूचना पर टीम ने पलहरी चौराहे के पास घेराबंदी की. मुखबिर की निशानदेही पर एसटीएफ ने दबिश दी और फिरोज को पकड़ लिया. पूछताछ में उसने अपना नाम फिरोज बताया.

साथी बच निकला, अब उसकी तलाश: पूछताछ में फिरोज ने इस मामले में अपने साथी दरबारी उर्फ ननकुन्ना का नाम भी बताया. पुलिस के अनुसार दरबारी सीतापुर के रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र का रहने वाला है और इस अपराध में उसके शामिल होने की बात सामने आई है. एसटीएफ ने उसकी तलाश में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला. अब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है.

2013 से शुरू हुआ मुकदमों का सिलसिला: फिरोज का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है. उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ वर्ष 2013 से मुकदमों का सिलसिला शुरू होने का उल्लेख है. रामसनेहीघाट, मोहम्मदपुर खाला, इंदिरानगर लखनऊ, जैदपुर, देवा, टिकैतनगर, फतेहपुर, हरदोई, संत कबीरनगर और कोठी समेत अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ मामले दर्ज बताए गए हैं.

रिकॉर्ड के मुताबिक शुरुआती मामलों में चोरी और लूट से संबंधित धाराएं थीं. बाद के वर्षों में हत्या, विस्फोटक पदार्थ, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर मामलों में भी उसका नाम दर्ज हुआ. वर्ष 2022 में फतेहपुर, बाराबंकी में उसके खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट के मुकदमे दर्ज होने का भी रिकॉर्ड में उल्लेख है.

अपराध का दायरा कई जिलों तक: पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि फिरोज के खिलाफ दर्ज मुकदमे किसी एक थाने या जिले तक सीमित नहीं रहे. बाराबंकी और लखनऊ के अलावा हरदोई तथा संत कबीरनगर समेत कई जिलों के मामलों में भी उसका नाम सामने आया. रिकॉर्ड में वर्ष 2023 तक दर्ज मुकदमों की संख्या 23 बताई गई है.

STF की सूचना पर हुई गिरफ्तारी: एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ की टीम को फरार और वांछित आरोपियों के संबंध में लगातार सूचनाएं मिल रही थीं. इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में टीम सूचना जुटा रही थी. फिरोज के बाराबंकी में होने की सूचना मिलने के बाद उपनिरीक्षक तेज बहादुर सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई और उसे गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपी को इंदिरानगर थाने में दर्ज मुकदमे में दाखिल कर दिया गया है. आगे की कार्रवाई स्थानीय पुलिस कर रही है.

पुलिस की फाइल में ‘बाबर’ का सफर: एएसपी एसटीएफ दीपक सिंह ने बताया कि फिरोज के खिलाफ वर्षों से अलग-अलग तरह के आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. 2013 में चोरी-लूट से शुरू हुआ मुकदमों का सिलसिला बाद में हत्या, विस्फोटक, हथियार और गैंगस्टर एक्ट तक पहुंचा. जेल जाने के बाद बाहर आया तो फिर इंदिरानगर के एक मामले में वांछित हो गया. लखनऊ में पुलिस की दबिश बढ़ी तो बाराबंकी में ठिकाना तलाशा रहा था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है.

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